धनतेरस २०२४: कुबेर देव को प्रसन्न करने के गुप्त रहस्य और अचूक उपाय
प्रस्तावना
सनातन धर्म में त्योहारों का एक विशेष महत्व है और धनतेरस उन्हीं में से एक अत्यंत शुभ पर्व है। दीपावली के आगमन से ठीक दो दिन पूर्व मनाया जाने वाला यह पवित्र दिन धन, समृद्धि और आरोग्य के देव भगवान धन्वंतरि, धन की देवी माँ लक्ष्मी और धन के अधिपति कुबेर देव को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किए गए पूजन और उपायों से व्यक्ति के जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं रहती और घर में सुख-शांति का वास होता है। वर्ष २०२४ में धनतेरस का यह पावन अवसर हमारे लिए विशेष फलदायी सिद्ध हो सकता है, यदि हम इसके गुप्त रहस्यों और अचूक उपायों को जान लें। यह लेख आपको कुबेर देव को प्रसन्न करने के उन विशेष मंत्रों, पूजा विधि और गुप्त रहस्यों से अवगत कराएगा जो आपके जीवन में अपार समृद्धि के द्वार खोल सकते हैं। आइए, इस पावन पर्व पर हम सब मिलकर भगवान कुबेर की कृपा प्राप्त करें और अपने जीवन को धन्य बनाएं।
पावन कथा
प्राचीन काल में, एक अत्यंत धर्मात्मा और दयालु ब्राह्मण था, जिसका नाम गुणाक्य था। वह भगवान शिव का परम भक्त था और अपनी सीमित आय के बावजूद दान-पुण्य में कभी पीछे नहीं हटता था। उसका हृदय करुणा और भक्ति से ओत-प्रोत था। गुणाक्य के पास धन तो अधिक नहीं था, किंतु उसका मन धनवानों से भी अधिक उदार था। वह अपना जीवन सादगी से व्यतीत करता था और जो कुछ भी उसे प्राप्त होता, उसका एक अंश वह गरीबों और असहायों की सेवा में लगा देता था। उसकी पत्नी भी उसी के समान धर्मपरायण और पतिव्रता थी।
एक बार की बात है, गुणाक्य के गाँव में अकाल पड़ गया। चारों ओर भुखमरी और त्राहि-त्राहि मच गई। लोग दाने-दाने को तरसने लगे। ऐसे विकट समय में गुणाक्य ने अपने घर के सभी अन्न भंडार खोल दिए और बिना किसी भेदभाव के सभी जरूरतमंदों को भोजन कराना प्रारंभ कर दिया। उसके पास जो भी था, वह सब उसने लोगों की सेवा में लगा दिया। कुछ ही समय में उसका अपना घर खाली हो गया, किंतु उसके चेहरे पर संतोष का भाव बना रहा। वह जानता था कि सच्ची संपत्ति दान और सेवा में ही निहित है।
गुणाक्य की इस निस्वार्थ सेवा और भक्ति से भगवान शिव और माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुए। एक दिन जब गुणाक्य अपने नित्यकर्मों से निवृत्त होकर भगवान शिव का ध्यान कर रहा था, तभी आकाशवाणी हुई, “हे गुणाक्य! तेरी भक्ति और निस्वार्थ सेवा से हम अत्यंत प्रसन्न हैं। इस जन्म में तूने भले ही भौतिक अभाव झेले हों, किंतु तेरे अगले जन्म में तुझे धन के अधिपति का पद प्राप्त होगा। तू समस्त देवताओं का कोषाध्यक्ष कहलाएगा और तेरा नाम कुबेर होगा।” गुणाक्य यह सुनकर आनंदित हो उठा। उसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर भगवान शिव और माता पार्वती का कोटि-कोटि धन्यवाद किया।
अगले जन्म में, गुणाक्य ने कुबेर के रूप में जन्म लिया और अपनी पूर्व जन्म की भक्ति और कर्मों के फल स्वरूप वह धन के देवता बन गए। उनकी नगरी अलकापुरी धन-धान्य से परिपूर्ण हो गई। कुबेर देव ने अपने जीवन में सीखा कि सच्चा धन केवल भौतिक वस्तुओं में नहीं होता, बल्कि दान, धर्म और सेवा में ही परम सुख और समृद्धि का वास होता है। इसलिए, धनतेरस पर कुबेर देव की पूजा हमें यह संदेश देती है कि धन का सदुपयोग और दान ही हमें वास्तविक समृद्धि की ओर ले जाता है।
दोहा
धनतेरस का पर्व है, सुख समृद्धि का सार।
कुबेर देव कृपा करें, भर दें घर संसार।।
श्रद्धा से जो पूजता, मन में धरे संतोष।
धन वैभव बढ़ता सदा, मिटते सब ही दोष।।
चौपाई
जय जय जय श्री कुबेर देवा, धनपति नाथ करो तुम सेवा।
कमला संग तुम रहो बिराजे, सकल भुवन की शोभा साजे।।
अलकापुरी तेरो धाम सुहाना, यक्ष-यक्षिणी नित गुण गाना।
धन धान्य के तुम हो दातारी, कृपा करो हम सब पर भारी।।
जड़ चेतन सब तुम से पावें, दीन दुखारी शरण में आवें।
रोग शोक भय दरिद्रता भागे, कुबेर कृपा जब मन में जागे।।
धनतेरस के शुभ अवसर पर, जो भी ध्यावे तुमको हर पल।
ऋद्धि सिद्धि शुभ मंगल पावे, जीवन सुखमय सदा बितावे।।
पाठ करने की विधि
धनतेरस पर कुबेर देव और माँ लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी होती है। यहाँ पाठ (पूजन) करने की विस्तृत विधि दी गई है:
१. शुभ मुहूर्त: धनतेरस की पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग २.५ घंटे तक) में करना सबसे उत्तम माना जाता है।
२. शुद्धि: सर्वप्रथम प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
३. स्थापना: एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान कुबेर, माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि प्रतिमा न हो तो आप केवल कुबेर यंत्र भी रख सकते हैं। उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
४. दीपक प्रज्वलन: शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। यह दीपक पूरी पूजा अवधि तक जलना चाहिए।
५. संकल्प: हाथ में जल, चावल और पुष्प लेकर अपनी मनोकामना कहते हुए पूजा का संकल्प लें।
६. गणेश पूजन: किसी भी शुभ कार्य से पूर्व भगवान गणेश का आवाहन और पूजन आवश्यक है। उन्हें दूर्वा, मोदक और रोली-चावल अर्पित करें।
७. धन्वंतरि पूजन: भगवान धन्वंतरि को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप अर्पित करें। आरोग्य की कामना करें।
८. लक्ष्मी-कुबेर पूजन:
माँ लक्ष्मी और कुबेर देव को रोली, अक्षत, हल्दी, चंदन, पुष्पमाला, कमल का फूल, बिल्वपत्र अर्पित करें।
मिठाई, फल, पंचामृत और श्रीफल (नारियल) का भोग लगाएं।
धूप और दीप प्रज्वलित करें।
माँ लक्ष्मी के चरणों में धनिया, कौड़ी, कमलगट्टा और एकाक्षी नारियल अर्पित करें।
कुबेर देव को दक्षिणावर्ती शंख, पीली कौड़ी और सिक्के (चांदी या सामान्य) अर्पित करें।
कुबेर यंत्र स्थापित किया है तो उसकी भी विधिवत पूजा करें।
९. मंत्र जाप:
कुबेर मंत्र: “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।” इस मंत्र का १०८ बार जाप करें।
धनतेरस कुबेर मंत्र: “ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय नमः।”
लक्ष्मी मंत्र: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।”
१०. आरती: पूजन के अंत में माँ लक्ष्मी, कुबेर देव और धन्वंतरि देव की आरती करें।
११. क्षमा याचना: जाने-अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें।
१२. विसर्जन: आरती के बाद पुष्प अर्पित कर पूजा का विसर्जन करें और प्रसाद वितरित करें।
पाठ के लाभ
धनतेरस पर कुबेर देव की सच्ची निष्ठा और विधि-विधान से की गई पूजा अनगिनत लाभ प्रदान करती है:
१. धन-धान्य में वृद्धि: यह पूजा आर्थिक समृद्धि और धन के आगमन के द्वार खोलती है। व्यक्ति को अचानक धन लाभ और व्यापार में उन्नति प्राप्त होती है।
२. कर्ज मुक्ति: कुबेर देव की कृपा से व्यक्ति को कर्ज और ऋण से मुक्ति मिलती है। रुके हुए धन की प्राप्ति होती है।
३. आरोग्य लाभ: भगवान धन्वंतरि के पूजन से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य और रोगों से मुक्ति मिलती है। परिवार में आरोग्य बना रहता है।
४. स्थिर लक्ष्मी: माँ लक्ष्मी की पूजा से धन की स्थिरता आती है। लक्ष्मी चंचल स्वभाव की होती हैं, किंतु इस दिन की पूजा उन्हें घर में स्थायी निवास के लिए प्रेरित करती है।
५. व्यापार में सफलता: व्यवसायियों के लिए यह पूजा विशेष फलदायी है। व्यापार में वृद्धि, नए अवसर और लाभ के मार्ग प्रशस्त होते हैं।
६. नकारात्मकता का नाश: घर से दरिद्रता, दुर्भाग्य और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, जिससे घर में सकारात्मकता और खुशहाली का संचार होता है।
७. मानसिक शांति: धन संबंधी चिंताओं से मुक्ति मिलती है, जिससे मानसिक शांति और संतोष का अनुभव होता है।
८. समग्र सुख-समृद्धि: यह पूजा न केवल भौतिक सुख प्रदान करती है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और परिवार में सामंजस्य भी लाती है, जिससे समग्र सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
९. यश और कीर्ति: कुबेर देव की कृपा से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और यश की प्राप्ति होती है।
नियम और सावधानियाँ
कुबेर देव की पूजा करते समय कुछ महत्वपूर्ण नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:
१. पवित्रता: पूजा से पूर्व स्वयं को और पूजा स्थल को पूरी तरह से स्वच्छ और पवित्र रखें। मन में किसी प्रकार का द्वेष या नकारात्मक विचार न लाएं।
२. श्रद्धा और विश्वास: पूजा पूरी श्रद्धा, भक्ति और अटूट विश्वास के साथ करें। केवल दिखावे के लिए की गई पूजा फलदायी नहीं होती।
३. सही दिशा: कुबेर देव को उत्तर दिशा का स्वामी माना जाता है। अतः पूजा करते समय आपका मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। कुबेर यंत्र या प्रतिमा भी उत्तर दिशा में स्थापित करें।
४. दान का महत्व: धनतेरस के दिन धन की देवी और कुबेर देव को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण तरीका दान भी है। अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को दान अवश्य करें।
५. नई खरीदारी: इस दिन धातु, विशेषकर सोना, चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इससे धन में तेरह गुणा वृद्धि होती है। किंतु लोहे या धारदार वस्तुएं खरीदने से बचें।
६. अंधेरा न करें: धनतेरस की रात घर के किसी भी कोने में अंधेरा न रखें। हर जगह दीये या रोशनी की व्यवस्था करें, विशेषकर घर के मुख्य द्वार पर और धन रखने के स्थान पर।
७. जुए से बचें: इस दिन जुआ या किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्यों से दूर रहें। यह माँ लक्ष्मी और कुबेर देव को अप्रसन्न कर सकता है।
८. महिलाओं का सम्मान: घर की महिलाओं का सम्मान करें, क्योंकि वे घर की लक्ष्मी का स्वरूप होती हैं।
९. अन्न का अपमान नहीं: धनतेरस के दिन अन्न या धन का अपमान न करें। बर्बाद न करें।
१०. स्वच्छता का ध्यान: घर में कबाड़ न रखें। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें, खासकर घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) और उत्तर दिशा को साफ-सुथरा रखें।
निष्कर्ष
धनतेरस का पर्व केवल भौतिक समृद्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि यह हमें जीवन में संतुलन, नैतिकता और दान के महत्व का भी स्मरण कराता है। कुबेर देव की पावन कथा हमें सिखाती है कि सच्चा धन लोभ में नहीं, अपितु निस्वार्थ सेवा और भक्ति में छिपा है। जब हम पवित्र मन और शुद्ध हृदय से माँ लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव का पूजन करते हैं, तो वे अवश्य ही हम पर अपनी कृपा बरसाते हैं। यह २०२४ का धनतेरस आपके जीवन में केवल धन ही नहीं, अपितु उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी लेकर आए। आइए, हम सब इस पावन अवसर पर अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और समृद्धि के दीपक प्रज्वलित करें। याद रखें, वास्तविक धन वह है जो हमें दूसरों की सेवा करने और जीवन को सार्थक बनाने की शक्ति प्रदान करता है। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आपका जीवन सदैव सुखमय और समृद्धिशाली रहे। जय कुबेर देव, जय माँ लक्ष्मी!

