Posted inभक्ति संग्रह
सनातन धर्म में नाम जप का विशेष महत्व बताया गया है। ईश्वर के अनगिनत रूप हैं और प्रत्येक रूप से जुड़े अनेक नाम भी हैं। इन नामों में ही उनकी संपूर्ण शक्ति और कृपा समाहित होती है। जब हम किसी देवी या देवता के 108 नामों की माला पिरोकर उनका जाप करते हैं, जिसे नामावली कहते हैं, तो यह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं होता, बल्कि यह अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माध्यम बन जाता है। विशेषकर, पवनपुत्र हनुमान जी की 108 नामावली का जाप भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान है, जो उनकी हर मनोकामना को पूर्ण करने में सहायक होता है और समस्त दुखों तथा बाधाओं का नाश करता है।
सनातन धर्म में नाम जप का विशेष महत्व बताया गया है। ईश्वर के अनगिनत रूप हैं और प्रत्येक रूप से जुड़े अनेक नाम भी हैं। इन नामों में ही उनकी संपूर्ण शक्ति और कृपा समाहित होती है। जब हम किसी देवी या देवता के 108 नामों की माला पिरोकर उनका जाप करते हैं, जिसे नामावली कहते हैं, तो यह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं होता, बल्कि यह अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माध्यम बन जाता है। विशेषकर, पवनपुत्र हनुमान जी की 108 नामावली का जाप भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान है, जो उनकी हर मनोकामना को पूर्ण करने में सहायक होता है और समस्त दुखों तथा बाधाओं का नाश करता है।









