पापमोचनी एकादशी, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी है, जो सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और सच्ची श्रद्धा से इसे करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। इस लेख में हम इस पावन एकादशी की कथा, महत्व, पूजा विधि और नियमों पर विस्तृत प्रकाश डालेंगे।

पापमोचनी एकादशी, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी है, जो सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और सच्ची श्रद्धा से इसे करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। इस लेख में हम इस पावन एकादशी की कथा, महत्व, पूजा विधि और नियमों पर विस्तृत प्रकाश डालेंगे।

पापमोचनी एकादशी, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी है, जो सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और सच्ची श्रद्धा से इसे करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। इस लेख में हम इस पावन एकादशी की कथा, महत्व, पूजा विधि और नियमों पर विस्तृत प्रकाश डालेंगे।
सनातन धर्म में बेलपत्र का विशेष स्थान है, और पाँच पत्तों वाला बेलपत्र तो महादेव को अत्‍यंत प्रिय है। यह दुर्लभ पत्ता भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार करता है। इस लेख में जानिए इस पावन बेलपत्र की महिमा, इसकी कथा, अर्पण विधि और इससे प्राप्त होने वाले असीम लाभ।

सनातन धर्म में बेलपत्र का विशेष स्थान है, और पाँच पत्तों वाला बेलपत्र तो महादेव को अत्‍यंत प्रिय है। यह दुर्लभ पत्ता भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार करता है। इस लेख में जानिए इस पावन बेलपत्र की महिमा, इसकी कथा, अर्पण विधि और इससे प्राप्त होने वाले असीम लाभ।

सनातन धर्म में बेलपत्र का विशेष स्थान है, और पाँच पत्तों वाला बेलपत्र तो महादेव को अत्‍यंत प्रिय है। यह दुर्लभ पत्ता भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का संचार करता है। इस लेख में जानिए इस पावन बेलपत्र की महिमा, इसकी कथा, अर्पण विधि और इससे प्राप्त होने वाले असीम लाभ।
सनातन धर्म में परशुराम जयंती का पर्व भगवान विष्णु के छठे अवतार, महर्षि परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पावन तिथि अक्षय तृतीया के साथ पड़ती है और शौर्य, न्याय तथा धर्मनिष्ठा का प्रतीक है। इस ब्लॉग में हम वर्ष 2025 में आने वाली परशुराम जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और भगवान परशुराम की प्रेरक कथा का विस्तृत वर्णन करेंगे।

सनातन धर्म में परशुराम जयंती का पर्व भगवान विष्णु के छठे अवतार, महर्षि परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पावन तिथि अक्षय तृतीया के साथ पड़ती है और शौर्य, न्याय तथा धर्मनिष्ठा का प्रतीक है। इस ब्लॉग में हम वर्ष 2025 में आने वाली परशुराम जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और भगवान परशुराम की प्रेरक कथा का विस्तृत वर्णन करेंगे।

सनातन धर्म में परशुराम जयंती का पर्व भगवान विष्णु के छठे अवतार, महर्षि परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पावन तिथि अक्षय तृतीया के साथ पड़ती है और शौर्य, न्याय तथा धर्मनिष्ठा का प्रतीक है। इस ब्लॉग में हम वर्ष 2025 में आने वाली परशुराम जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और भगवान परशुराम की प्रेरक कथा का विस्तृत वर्णन करेंगे।
नवरात्रि, शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना का महापर्व है। यह वह समय है जब ब्रह्मांड में देवी शक्ति का विशेष संचार होता है, और भक्तगण माँ के नौ दिव्य रूपों की पूजा कर उनकी असीम कृपा के पात्र बनते हैं। यह लेख बताता है कि कैसे सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से माँ दुर्गा की पूजा कर उनकी सर्वकल्याणकारी कृपा को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, जिसमें पूजा विधि, लाभ, नियम और एक पावन कथा शामिल है।

नवरात्रि, शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना का महापर्व है। यह वह समय है जब ब्रह्मांड में देवी शक्ति का विशेष संचार होता है, और भक्तगण माँ के नौ दिव्य रूपों की पूजा कर उनकी असीम कृपा के पात्र बनते हैं। यह लेख बताता है कि कैसे सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से माँ दुर्गा की पूजा कर उनकी सर्वकल्याणकारी कृपा को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, जिसमें पूजा विधि, लाभ, नियम और एक पावन कथा शामिल है।

नवरात्रि, शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना का महापर्व है। यह वह समय है जब ब्रह्मांड में देवी शक्ति का विशेष संचार होता है, और भक्तगण माँ के नौ दिव्य रूपों की पूजा कर उनकी असीम कृपा के पात्र बनते हैं। यह लेख बताता है कि कैसे सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से माँ दुर्गा की पूजा कर उनकी सर्वकल्याणकारी कृपा को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, जिसमें पूजा विधि, लाभ, नियम और एक पावन कथा शामिल है।
नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है, जो तप, वैराग्य और संयम की साक्षात् प्रतिमूर्ति हैं। यह ब्लॉग उनके दिव्य स्वरूप, कठोर तपस्या की पावन कथा, पूजा विधि, और आराधना से प्राप्त होने वाले अलौकिक लाभों का विस्तृत वर्णन करता है, जिससे भक्तगण आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक शांति प्राप्त कर सकें।

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नवरात्रि के पावन पर्व का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित है। उनका तेजस्वी स्वरूप हमें भयमुक्त जीवन और अदम्य साहस का आशीर्वाद देता है। इस लेख में जानिए उनकी महिमा, पूजन विधि और प्राप्त होने वाले अद्भुत लाभ।

नवरात्रि के पावन पर्व का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा को समर्पित है। उनका तेजस्वी स्वरूप हमें भयमुक्त जीवन और अदम्य साहस का आशीर्वाद देता है। इस लेख में जानिए उनकी महिमा, पूजन विधि और प्राप्त होने वाले अद्भुत लाभ।

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नव वर्ष में शुभता और समृद्धि के लिए सनातन धर्म में बताई गई विशेष पूजा विधि, उसके लाभ, पवित्र कथा और पालन करने योग्य नियम व सावधानियों को जानें। यह लेख आपको आने वाले वर्ष को दिव्य आशीर्वादों से भरने में सहायता करेगा।

नव वर्ष में शुभता और समृद्धि के लिए सनातन धर्म में बताई गई विशेष पूजा विधि, उसके लाभ, पवित्र कथा और पालन करने योग्य नियम व सावधानियों को जानें। यह लेख आपको आने वाले वर्ष को दिव्य आशीर्वादों से भरने में सहायता करेगा।

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देवोत्थान एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी और देवउठनी ग्यारस भी कहते हैं, भगवान विष्णु के चातुर्मास की योगनिद्रा से जागने का पावन पर्व है। यह दिन समस्त शुभ कार्यों के आरंभ और तुलसी विवाह के मंगलमय आयोजन का साक्षी बनता है। यह ब्लॉग इस पवित्र दिवस के महत्व, पौराणिक कथा, पूजा विधि, लाभ और नियमों पर विस्तृत प्रकाश डालता है, जो भक्तों के हृदय में श्रद्धा और भक्ति का संचार करेगा।

देवोत्थान एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी और देवउठनी ग्यारस भी कहते हैं, भगवान विष्णु के चातुर्मास की योगनिद्रा से जागने का पावन पर्व है। यह दिन समस्त शुभ कार्यों के आरंभ और तुलसी विवाह के मंगलमय आयोजन का साक्षी बनता है। यह ब्लॉग इस पवित्र दिवस के महत्व, पौराणिक कथा, पूजा विधि, लाभ और नियमों पर विस्तृत प्रकाश डालता है, जो भक्तों के हृदय में श्रद्धा और भक्ति का संचार करेगा।

देवोत्थान एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी और देवउठनी ग्यारस भी कहते हैं, भगवान विष्णु के चातुर्मास की योगनिद्रा से जागने का पावन पर्व है। यह दिन समस्त शुभ कार्यों के आरंभ और तुलसी विवाह के मंगलमय आयोजन का साक्षी बनता है। यह ब्लॉग इस पवित्र दिवस के महत्व, पौराणिक कथा, पूजा विधि, लाभ और नियमों पर विस्तृत प्रकाश डालता है, जो भक्तों के हृदय में श्रद्धा और भक्ति का संचार करेगा।
तुलसी विवाह की पावन प्रक्रिया को गहराई से जानें, जिसमें पौराणिक कथाएँ, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ सम्मिलित हैं। यह लेख आपको इस दिव्य विवाह के प्रत्येक चरण से परिचित कराएगा, जो समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है।

तुलसी विवाह की पावन प्रक्रिया को गहराई से जानें, जिसमें पौराणिक कथाएँ, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ सम्मिलित हैं। यह लेख आपको इस दिव्य विवाह के प्रत्येक चरण से परिचित कराएगा, जो समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है।

तुलसी विवाह की पावन प्रक्रिया को गहराई से जानें, जिसमें पौराणिक कथाएँ, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ सम्मिलित हैं। यह लेख आपको इस दिव्य विवाह के प्रत्येक चरण से परिचित कराएगा, जो समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है।
सनातन धर्म में तुलसी माता का विशेष महत्व है। उन्हें हरि प्रिया और लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इस लेख में तुलसी माता की पावन कथा, उन्हें प्रसन्न करने की विधि, पूजा के लाभ और नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है, ताकि हर भक्त उनकी कृपा प्राप्त कर सके और अपने जीवन को सुख, शांति व समृद्धि से भर सके।

सनातन धर्म में तुलसी माता का विशेष महत्व है। उन्हें हरि प्रिया और लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इस लेख में तुलसी माता की पावन कथा, उन्हें प्रसन्न करने की विधि, पूजा के लाभ और नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है, ताकि हर भक्त उनकी कृपा प्राप्त कर सके और अपने जीवन को सुख, शांति व समृद्धि से भर सके।

सनातन धर्म में तुलसी माता का विशेष महत्व है। उन्हें हरि प्रिया और लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इस लेख में तुलसी माता की पावन कथा, उन्हें प्रसन्न करने की विधि, पूजा के लाभ और नियमों के बारे में विस्तार से बताया गया है, ताकि हर भक्त उनकी कृपा प्राप्त कर सके और अपने जीवन को सुख, शांति व समृद्धि से भर सके।