बुधवार को क्या नहीं करना चाहिए
**प्रस्तावना**
सनातन धर्म में प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व है और वह किसी न किसी देवता या ग्रह से संबंधित होता है। बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश को समर्पित है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता हैं। इसके अतिरिक्त, यह दिन नवग्रहों में से एक, बुध ग्रह से भी संबंधित है, जिसे वाणी, बुद्धि, व्यापार और संचार का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बुध ग्रह शुभ होने पर व्यक्ति को तीक्ष्ण बुद्धि, कुशल संवाद क्षमता और व्यापार में सफलता प्रदान करता है, जबकि इसके अशुभ होने पर व्यक्ति को भ्रम, निर्णय लेने में कठिनाई और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
हमारे ऋषि-मुनियों ने अपनी गहन तपस्या और दिव्य दृष्टि से ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के प्रवाह को समझा और तदनुसार प्रत्येक दिन के लिए कुछ नियम निर्धारित किए। इन नियमों का पालन करने से हम प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हैं और नकारात्मक प्रभावों से बचकर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। बुधवार के दिन कुछ विशेष कार्यों को वर्जित बताया गया है, जिनका पालन न करने पर व्यक्ति को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह केवल अंधविश्वास नहीं, अपितु खगोलीय गणनाओं और ऊर्जा के सूक्ष्म प्रवाह पर आधारित गहन विज्ञान है। बुधवार को क्या नहीं करना चाहिए, इस विषय पर चिंतन करना हमें आत्म-अनुशासन, ग्रहों की चाल के प्रति जागरूकता और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है। आइए, सनातन धर्म के इन गूढ़ रहस्यों को समझें और अपने जीवन को सुखमय तथा समृद्ध बनाएं।
**पावन कथा**
प्राचीन काल में, भरतखंड में धर्मपुर नामक एक अत्यंत धनी नगर था। उस नगर में श्रीधर नाम का एक अत्यंत धनी व्यापारी रहता था। श्रीधर बहुत परिश्रमी था, किंतु वह ज्योतिषीय नियमों और देवी-देवताओं के प्रति उतना श्रद्धालु नहीं था। विशेषकर, वह बुधवार के दिन के नियमों को कभी गंभीरता से नहीं लेता था। श्रीधर का मानना था कि कर्म ही सब कुछ है और दिन-वार के नियम केवल लोगों को भ्रमित करते हैं।
एक बार, श्रीधर को व्यापार के सिलसिले में दूर के नगर जाना था। उसकी पत्नी, जिसका नाम सुशीला था, बहुत धर्मपरायण स्त्री थी। बुधवार का दिन था और सुशीला ने श्रीधर से आग्रह किया, “स्वामी, आज बुधवार है। कृपया आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा न करें और न ही किसी को उधार दें। यह दिन बुध ग्रह से संबंधित है और इन कार्यों से बचना शुभ माना जाता है।”
श्रीधर ने अपनी पत्नी की बात सुनकर उपहास किया, “प्रिय, तुम भी इन पुरानी बातों में विश्वास करती हो? व्यापार का अवसर समय नहीं देखता। यदि मैं आज नहीं जाऊंगा तो यह सौदा हाथ से निकल जाएगा।” यह कहकर वह बुधवार के दिन ही उत्तर दिशा की ओर अपनी यात्रा पर निकल पड़ा। रास्ते में उसे एक अन्य व्यापारी मिला, जिसने श्रीधर से अपने व्यापार के लिए भारी धन उधार मांगा। श्रीधर ने बिना सोचे-समझे उसे उधार दे दिया, यह भी भूल गया कि उसकी पत्नी ने बुधवार को उधार देने से मना किया था।
कुछ ही दिनों बाद, श्रीधर को ज्ञात हुआ कि जिस व्यापारी को उसने धन उधार दिया था, वह अचानक गायब हो गया था और अब उसे धन की वापसी की कोई उम्मीद नहीं थी। इसके बाद, जिस व्यापार के लिए वह इतनी दूर गया था, वह भी किसी कारणवश सफल नहीं हो सका और उसे भारी हानि उठानी पड़ी। उदास मन से जब वह वापस अपने नगर लौट रहा था, तब उसकी मुलाकात एक सिद्ध महात्मा से हुई। महात्मा ने श्रीधर के उदास मुख को देखकर उसके मन की व्यथा पूछी।
श्रीधर ने अपनी सारी कहानी महात्मा को सुनाई। महात्मा ने मुस्कुराते हुए कहा, “पुत्र, तुमने अपनी पत्नी की बात नहीं मानी और बुधवार के नियमों का उल्लंघन किया। बुधवार का दिन बुध ग्रह और भगवान गणेश का दिन है। बुध वाणी, व्यापार और बुद्धि का कारक है। बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा वर्जित मानी जाती है, क्योंकि इस दिन उत्तर दिशा में बुध का वास होता है, जो यात्रा में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसी प्रकार, बुधवार को उधार देने या लेने से धन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, किंतु जब उनके दिन नियमों का अनादर होता है, तो वे विघ्न डालते हैं ताकि व्यक्ति सही मार्ग पर आ सके।”
महात्मा ने आगे कहा, “बुधवार के दिन हरी वस्तुओं का दान, गणेश जी की पूजा, हरे रंग के वस्त्र धारण करना और बुध मंत्र का जाप अत्यंत शुभ होता है। तुम प्रायश्चित करो, भगवान गणेश और बुध देव की आराधना करो और भविष्य में इन नियमों का पालन करो।”
श्रीधर को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह महात्मा के चरणों में गिर पड़ा और उनसे क्षमा याचना की। नगर लौटकर उसने सुशीला से भी क्षमा मांगी और बुधवार के नियमों का पालन करना शुरू कर दिया। उसने हर बुधवार को भगवान गणेश की पूजा की, हरी वस्तुओं का दान किया और बुध मंत्रों का जाप किया। धीरे-धीरे उसके व्यापार में फिर से बरकत आने लगी, खोया हुआ विश्वास वापस लौटा और उसका जीवन सुख-शांति से भर गया। तब से श्रीधर ने सभी को बुधवार के नियमों के पालन का महत्व समझाया और स्वयं भी जीवनपर्यंत उनका श्रद्धापूर्वक पालन किया।
**दोहा**
बुधवार गणेश को प्रिय है, बुध ग्रह का भी वास,
नियम धरम जो मानत नहीं, पावत दुख औ त्रास।
**चौपाई**
जय जय जय श्री गणेश देवा, तुमरि कृपा जग करत सेवा।
बुधवार शुभ मंगलकारी, जो मानत नियम नर-नारी।
व्यापार बुद्धि को तुम ही दाता, संकट मोचन विघ्नहर्ता।
हरि वस्त्र हरे पदार्थ सुहावे, बुध देव मन को अति भावे।
जो नर-नारी करे मनमानी, भोगत दुख की अगम कहानी।
तुमरी शरण जो आवे देवा, पावे सुख धन और मेवा।
**पाठ करने की विधि**
बुधवार के दिन भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए कुछ विशेष विधियों का पालन करना चाहिए। सबसे पहले, प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो हरे रंग के वस्त्र धारण करें, क्योंकि यह रंग बुध ग्रह को प्रिय है। घर के पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें दूर्वा अर्पित करें, जो उन्हें अत्यंत प्रिय है। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके उपरांत, “ॐ गं गणपतये नमः” या “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का कम से कम १०८ बार जाप करें। बुधवार व्रत रखने वाले लोग इस दिन एक समय फलाहार कर सकते हैं। दान का विशेष महत्व है; इस दिन हरी मूंग दाल, हरे वस्त्र, या अन्य हरी वस्तुओं का दान किसी गरीब या ब्राह्मण को करना शुभ होता है। गौमाता को हरा चारा खिलाना भी पुण्यकारक माना जाता है। इस दिन क्रोध और कटु वचन बोलने से बचें और वाणी में मधुरता लाएं, क्योंकि बुध वाणी का भी कारक है।
**पाठ के लाभ**
बुधवार के नियमों का पालन करने और भगवान गणेश व बुध ग्रह की उपासना करने से अनगिनत लाभ प्राप्त होते हैं।
* **बुद्धि और ज्ञान:** बुध ग्रह बुद्धि का कारक है। इसकी शुभ स्थिति से स्मरण शक्ति बढ़ती है, निर्णय लेने की क्षमता सुधरती है और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
* **व्यापार में सफलता:** बुध व्यापार और वाणिज्य का स्वामी है। बुधवार के नियमों का पालन करने से व्यापार में उन्नति और सफलता मिलती है, धन आगमन के मार्ग खुलते हैं।
* **वाणी में मधुरता:** बुध ग्रह वाणी का भी प्रतिनिधित्व करता है। जो लोग बुधवार को नियमों का पालन करते हैं, उनकी वाणी में मिठास आती है, वे स्पष्ट और प्रभावशाली ढंग से संवाद कर पाते हैं।
* **बाधाओं का निवारण:** भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं। उनकी पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।
* **स्वास्थ्य लाभ:** बुध ग्रह त्वचा और तंत्रिका तंत्र से भी जुड़ा है। इसकी प्रसन्नता से इन क्षेत्रों से संबंधित रोगों से मुक्ति मिलती है।
* **मन की शांति:** नियमों का पालन करने से आत्म-अनुशासन बढ़ता है, मन शांत रहता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
* **सामाजिक प्रतिष्ठा:** उत्तम बुद्धि, वाणी और व्यापारिक सफलता व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान दिलाती है।
यह सभी लाभ न केवल भौतिक स्तर पर, अपितु आध्यात्मिक और मानसिक स्तर पर भी व्यक्ति को समृद्ध बनाते हैं।
**नियम और सावधानियाँ**
बुधवार के दिन कुछ विशेष कार्यों को वर्जित बताया गया है, जिनका ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है:
1. **धन का लेनदेन:** बुधवार को भूलकर भी किसी को धन उधार न दें और न ही किसी से उधार लें। मान्यता है कि इस दिन किया गया धन का लेनदेन हानि और आर्थिक संकट का कारण बनता है। उधार दिया गया धन वापस मिलने में कठिनाई आती है और लिया गया उधार चुकाना मुश्किल हो जाता है।
2. **उत्तर दिशा की यात्रा:** बुधवार के दिन उत्तर दिशा की यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता है। यदि बहुत आवश्यक हो तो यात्रा पर निकलने से पहले तिल या धनिया खाकर निकलें और कुछ कदम उल्टी दिशा में चलकर फिर यात्रा प्रारंभ करें।
3. **बाल और नाखून काटना:** कुछ परंपराओं के अनुसार, बुधवार को बाल कटवाना या नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से धन हानि और बुद्धि संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
4. **कन्या या बहन को दूध या तेल देना:** बुधवार के दिन अपनी पुत्री या बहन को दूध या तेल देने से बुध ग्रह कमजोर होता है और अशुभ परिणाम मिल सकते हैं। यह संबंध विच्छेद या कष्ट का कारण बन सकता है।
5. **नए जूते-कपड़े खरीदना:** कुछ मान्यताओं के अनुसार, बुधवार को नए जूते या कपड़े खरीदना शुभ नहीं होता, विशेषकर हरे रंग के कपड़े छोड़कर। यह शुभ फल नहीं देते और जल्दी खराब हो सकते हैं।
6. **वाणी का संयम:** बुधवार वाणी का दिन है। इस दिन किसी से भी कटु वचन न बोलें, झूठ न बोलें और विवाद से बचें। अपनी वाणी को संयमित और मधुर रखें, अन्यथा बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव से सम्मान में कमी आ सकती है।
7. **अशुभ कार्यों से बचें:** कोई भी ऐसा कार्य जो अनैतिक हो, छल-कपट से भरा हो या दूसरों को हानि पहुँचाने वाला हो, बुधवार के दिन तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। इससे बुध और गणेश जी दोनों अप्रसन्न होते हैं।
इन नियमों का पालन करके आप बुधवार के दिन के शुभ प्रभावों को आकर्षित कर सकते हैं और नकारात्मक ऊर्जाओं से बच सकते हैं।
**निष्कर्ष**
सनातन धर्म का प्रत्येक नियम, प्रत्येक मर्यादा हमारे जीवन को सुचारु, संतुलित और समृद्ध बनाने के लिए ही है। बुधवार के दिन के विशेष नियमों का पालन करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ एक गहरा संबंध स्थापित करना है। भगवान गणेश और बुध ग्रह की कृपा प्राप्त करने से हमारा जीवन सुख-शांति, बुद्धि और समृद्धि से परिपूर्ण हो जाता है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति के हर स्पंदन का हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है, और हमें उस प्रभाव को समझकर उसके साथ सामंजस्य बिठाना चाहिए। जब हम बुधवार को कुछ कार्यों से परहेज करते हैं, तो हम वास्तव में अपने भीतर आत्म-नियंत्रण और अनुशासन की भावना को प्रबल करते हैं। यह हमें अज्ञानता से ज्ञान की ओर, अभाव से पूर्णता की ओर और अशांति से शांति की ओर ले जाता है। आइए, इस प्राचीन ज्ञान को अपने जीवन में अपनाकर, हम न केवल स्वयं को लाभान्वित करें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी सनातन धर्म के इस शाश्वत सत्य से परिचित कराएं, ताकि उनका जीवन भी दिव्य ज्योति से आलोकित हो सके। बुध देव और विघ्नहर्ता गणेश जी की कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे।

