पीले फूल, चने की दाल, गुड़, और हल्दी अर्पित करें।
**प्रस्तावना**
सनातन धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है और उन दिनों की अपनी विशिष्ट पूजा पद्धतियाँ तथा सामग्री होती है। इन सभी में, बृहस्पतिवार का दिन अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है। यह दिन देवों के गुरु बृहस्पति देव और जगत पालक भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन की गई उपासना और विशेष सामग्री का अर्पण व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, समृद्धि, विवाह, संतान और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करता है। बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग का विशेष महत्व है, इसलिए पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और हल्दी जैसी पवित्र सामग्री का अर्पण बहुत शुभ फलदायी माना जाता है। ये साधारण सी वस्तुएँ हमारी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक बनकर देवकृपा को आकर्षित करती हैं। इस ब्लॉग में हम इन सामग्रियों के अद्भुत महत्व, इनकी पावन कथा, पूजा विधि, उससे प्राप्त होने वाले लाभ और आवश्यक नियमों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि हर भक्त देवगुरु की कृपा प्राप्त कर सके।
**पावन कथा**
प्राचीन काल में एक नगर में सुशीला नाम की एक अत्यंत pious और धर्मपरायण स्त्री रहती थी। वह भगवान विष्णु की परम भक्त थी और गुरुदेव बृहस्पति में उसकी अटूट श्रद्धा थी। किंतु दुर्भाग्यवश, उसके जीवन में सदा अभाव और कष्टों का वास था। उसका पति अत्यंत आलसी और दुराचारी था, जो न तो कोई काम करता था और न ही धर्म में उसकी कोई रुचि थी। सुशीला के बच्चे भी कुपोषित और अस्वस्थ रहते थे। घर में दरिद्रता का ऐसा वास था कि कई बार तो उन्हें भूखा ही सोना पड़ता था। सुशीला इन सब कष्टों से इतनी दुखी थी कि उसका मन विचलित रहने लगा। वह सोचती थी कि जब वह इतनी भक्ति करती है, तो फिर उसके जीवन में इतना दुख क्यों है? एक दिन जब वह अपने घर के बाहर उदास बैठी थी, तभी एक वृद्धा साध्वी उसके द्वार पर आईं। सुशीला ने उन्हें प्रणाम किया और अपनी व्यथा सुनाई। साध्वी ने धैर्यपूर्वक उसकी बात सुनी और मुस्कुराते हुए कहा, “पुत्री, तुम गुरुवार के दिन बृहस्पति देव का व्रत क्यों नहीं करती? उनकी कृपा से तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जाएँगे और घर में सुख-शांति आएगी।” सुशीला ने उत्सुकता से पूछा, “हे माता, इस व्रत को करने की क्या विधि है और इसमें कौन सी सामग्री आवश्यक है?” साध्वी ने बताया, “पुत्री, गुरुवार के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करो। भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का ध्यान करते हुए केले के वृक्ष की पूजा करो। उन्हें पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और थोड़ी सी हल्दी अर्पित करो। विधि-विधान से कथा सुनो और फिर अपनी यथाशक्ति भोग लगाकर स्वयं और परिवार के सदस्यों को प्रसाद दो। नमक का सेवन न करो और मन में पूर्ण श्रद्धा रखो।” सुशीला ने साध्वी की बात मानी और अगले गुरुवार से ही व्रत का संकल्प लिया। घर में कुछ न होने पर भी उसने पड़ोसियों से थोड़ी सी चने की दाल और गुड़ माँगकर लाए, पास के वन से पीले फूल चुनकर लाई और थोड़ी हल्दी का प्रबंध किया। अत्यंत श्रद्धा भाव से उसने बृहस्पति देव की पूजा की। पहले कुछ सप्ताह तो उसके जीवन में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया, किंतु सुशीला की श्रद्धा अटल थी। वह निरंतर निष्ठा से पूजा करती रही। कुछ ही समय बाद, उसकी भक्ति और विश्वास का फल उसे मिलने लगा। एक दिन उसका पति, जो अब तक कोई काम नहीं करता था, उसे एक व्यापारी ने काम पर रखा और उसे उचित पारिश्रमिक मिलने लगा। धीरे-धीरे घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी। उसके बच्चों का स्वास्थ्य भी बेहतर होने लगा और वे पढ़ने-लिखने में रुचि लेने लगे। सुशीला ने अपनी श्रद्धा और बृहस्पति देव के आशीर्वाद से अपने घर को खुशियों से भर दिया। उसने कभी यह नहीं सोचा था कि पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और हल्दी जैसे साधारण से पदार्थ उसके जीवन को इतना बदल सकते हैं। इस कथा से यह प्रेरणा मिलती है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए छोटे से भी प्रयास से भगवान अवश्य प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाते हैं। सुशीला ने अपने दृढ़ विश्वास और भक्ति से न केवल अपने जीवन को संवारा, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी।
**दोहा**
पीले सुमन, चने की दाल, गुड़ हल्दी का हो संग।
बृहस्पति देव करें कृपालु, भरे जीवन में शुभ रंग॥
**चौपाई**
गुरुवार का दिन पावन है, देवगुरु का पूजन भावन है।
पीले पुष्प चढ़ा मन लाई, चने की दाल से कृपा पाई॥
गुड़ की मिठास जीवन घोले, हल्दी रोग और दोषों को धोले।
जो जन श्रद्धा से यह अर्पित करे, उसके जीवन में खुशियाँ भरे॥
विद्या, बुद्धि, धन और संतान, गुरुदेव देते हैं हर वरदान।
विष्णु संग गुरु कृपा जब होय, मन शांत हो, भय फिर न कोइ॥
**पाठ करने की विधि**
बृहस्पतिवार के दिन की गई पूजा अत्यंत फलदायी होती है। इस पूजा को करने की विधि निम्नलिखित है:
1. **प्रातःकाल स्नान और संकल्प:** गुरुवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। हाथ में जल लेकर अपनी इच्छा का संकल्प लें, जैसे कि विवाह बाधा दूर हो, संतान प्राप्ति हो, धन लाभ हो आदि।
2. **केले के वृक्ष की पूजा:** यदि संभव हो, तो केले के वृक्ष के पास जाकर उसकी जड़ में जल अर्पित करें। वृक्ष पर हल्दी का तिलक लगाएं, पीले फूल चढ़ाएं और चने की दाल एवं गुड़ अर्पित करें। दीपक प्रज्वलित करें।
3. **बृहस्पति देव का आवाहन:** चौकी पर स्थापित प्रतिमा के समक्ष एक जल का कलश रखें। भगवान बृहस्पति देव का आवाहन करें।
4. **विशेष सामग्री अर्पण:** सबसे पहले भगवान को पीले फूल अर्पित करें। फिर चने की दाल (रात भर भिगोई हुई या कच्ची, अपनी श्रद्धा अनुसार) अर्पित करें। इसके बाद गुड़ का एक टुकड़ा या छोटे-छोटे टुकड़े चढ़ाएं। अंत में, थोड़ी सी हल्दी रोली के साथ तिलक के रूप में या जल में मिलाकर अर्पित करें। कुछ लोग आटे में हल्दी और गुड़ मिलाकर दीपक बनाकर भी प्रज्वलित करते हैं।
5. **कथा श्रवण और मंत्र जाप:** बृहस्पति देव की व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” या “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः” जैसे गुरु मंत्रों का यथाशक्ति 11, 21, 51 या 108 बार जाप करें।
6. **आरती और प्रसाद:** पूजा के अंत में कपूर से बृहस्पति देव या भगवान विष्णु की आरती करें। अर्पित की गई सामग्री (चने की दाल, गुड़) को प्रसाद के रूप में वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें। केले के वृक्ष पर चढ़ाया गया प्रसाद भी ग्रहण किया जा सकता है।
7. **आशीर्वाद और विसर्जन:** भगवान से अपनी मनोकामना पूर्ण करने और सभी संकटों को दूर करने की प्रार्थना करें। जल को सूर्य देव को अर्घ्य दें।
**पाठ के लाभ**
पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और हल्दी के साथ बृहस्पति देव की पूजा करने से असंख्य लाभ प्राप्त होते हैं, जिनका वर्णन इस प्रकार है:
1. **ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति:** बृहस्पति देव ज्ञान और बुद्धि के कारक ग्रह हैं। इनकी पूजा से व्यक्ति को उच्च शिक्षा में सफलता मिलती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है।
2. **विवाह बाधाओं का निवारण:** जिन कन्याओं या युवकों के विवाह में देरी हो रही है या बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए यह पूजा अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। बृहस्पति देव की कृपा से योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और विवाह सुखमय होता है।
3. **संतान सुख की प्राप्ति:** निःसंतान दंपतियों को श्रद्धापूर्वक इस पूजा को करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। यह पूजा संतान के स्वास्थ्य और भविष्य को भी उज्ज्वल बनाती है।
4. **धन-धान्य और समृद्धि:** चने की दाल और गुड़ का अर्पण आर्थिक समृद्धि का प्रतीक है। इस पूजा से घर में धन की आवक बढ़ती है, व्यापार में उन्नति होती है और कर्ज से मुक्ति मिलती है। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण होता है।
5. **स्वास्थ्य लाभ और रोगमुक्ति:** हल्दी को शुभ और औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है। बृहस्पति देव की कृपा से शारीरिक रोगों, विशेषकर पाचन तंत्र, लिवर और पीलिया से संबंधित समस्याओं में लाभ मिलता है। यह शरीर को ऊर्जावान और स्वस्थ बनाती है।
6. **नकारात्मक ऊर्जा का नाश:** पीले फूल और हल्दी सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक हैं। इनकी पूजा से घर से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सकारात्मकता का संचार होता है, जिससे मानसिक शांति और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
7. **मान-सम्मान में वृद्धि:** यह पूजा व्यक्ति के सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि करती है और उसे समाज में उचित स्थान दिलाती है। नौकरी और करियर में भी पदोन्नति के अवसर प्राप्त होते हैं।
8. **गुरु ग्रह को मजबूत करना:** ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह पूजा कुंडली में कमजोर बृहस्पति ग्रह को मजबूत करती है, जिससे उसके अशुभ प्रभावों में कमी आती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।
**नियम और सावधानियाँ**
बृहस्पतिवार की पूजा और व्रत करते समय कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:
1. **स्वच्छता और पवित्रता:** पूजा करने वाले व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध होना चाहिए। पूजा स्थल भी स्वच्छ और पवित्र होना चाहिए।
2. **पीले वस्त्र:** इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। यह बृहस्पति देव को प्रिय है।
3. **नमक का त्याग:** व्रत रखने वाले व्यक्ति को इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। भोजन में भी पीली वस्तुओं जैसे बेसन, चने की दाल, केले आदि का प्रयोग करना चाहिए।
4. **बाल न धोना और कटवाना:** गुरुवार के दिन बाल धोना, बाल कटवाना, नाखून काटना या शेविंग करना वर्जित माना जाता है। इससे धन और आयु की हानि हो सकती है।
5. **कपड़े न धोना और पोछा न लगाना:** इस दिन कपड़े धोने और घर में पोछा लगाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा और धन का क्षय होता है।
6. **उधार न दें और न लें:** गुरुवार को किसी को धन उधार देना या किसी से उधार लेना शुभ नहीं माना जाता है, क्योंकि यह आर्थिक परेशानियों को बढ़ा सकता है।
7. **कथा का महत्व:** व्रत कथा को सुनना या पढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिना कथा सुने व्रत अधूरा माना जाता है।
8. **श्रद्धा और विश्वास:** सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि पूजा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाए। मन में किसी प्रकार का संदेह या नकारात्मक विचार नहीं होने चाहिए।
9. **केले का सेवन वर्जित:** पूजा में केला अर्पित करने के बाद स्वयं केले का सेवन नहीं करना चाहिए। यह प्रसाद के रूप में अन्य लोगों को दिया जा सकता है।
**निष्कर्ष**
बृहस्पतिवार का दिन एक ऐसा पवित्र अवसर है जब हम देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की कृपा को प्राप्त कर सकते हैं। पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और हल्दी जैसी साधारण और सुलभ सामग्री के माध्यम से की गई यह पूजा हमारे जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकती है। यह केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि अपनी श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने का एक माध्यम है। जिस प्रकार सुशीला ने अपनी निष्ठा और भक्ति से अपने जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर मोड़ा, उसी प्रकार हम भी इन सरल उपायों को अपनाकर अपने जीवन की बाधाओं को दूर कर सकते हैं। यह पूजा हमें न केवल भौतिक सुख-समृद्धि प्रदान करती है, बल्कि मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है। आइए, इस बृहस्पतिवार को हम अपनी श्रद्धा के साथ इन पवित्र सामग्रियों को अर्पित करें और देवगुरु बृहस्पति की असीम कृपा के भागी बनें, ताकि हमारा जीवन ज्ञान, प्रेम और सौभाग्य से परिपूर्ण हो सके।

