पवनपुत्र हनुमान जी की बाल लीलाएँ बच्चों के लिए अदम्य साहस, निस्वार्थ भक्ति और अटूट विश्वास की प्रेरणादायक कहानियाँ हैं। यह लेख उनके जन्म से लेकर श्रीराम से मिलन तक की पावन कथा, पाठ करने की विधि, लाभ और नियमों को प्रस्तुत करता है, जिससे बच्चे हनुमान जी के गुणों को आत्मसात कर सकें।

पवनपुत्र हनुमान जी की बाल लीलाएँ बच्चों के लिए अदम्य साहस, निस्वार्थ भक्ति और अटूट विश्वास की प्रेरणादायक कहानियाँ हैं। यह लेख उनके जन्म से लेकर श्रीराम से मिलन तक की पावन कथा, पाठ करने की विधि, लाभ और नियमों को प्रस्तुत करता है, जिससे बच्चे हनुमान जी के गुणों को आत्मसात कर सकें।

हनुमान जी की अद्भुत बाल लीलाएँ बच्चों के लिए

**प्रस्तावना**
प्यारे बच्चों, क्या आप जानते हैं कि हमारे धर्म ग्रंथों में एक ऐसे वीर, शक्तिशाली और बुद्धिमान देवता का वर्णन है, जो श्रीराम के परम भक्त थे? हाँ, हम बात कर रहे हैं पवनपुत्र हनुमान जी की! हनुमान जी का नाम सुनते ही हमारे मन में साहस, सेवा और भक्ति की भावना जागृत हो जाती है। वे ऐसे अद्भुत बलशाली और विनम्र हैं कि उनकी हर कहानी हमें कुछ नया सिखाती है। उनका जन्म ही एक विशेष उद्देश्य के लिए हुआ था, ताकि वे धर्म की रक्षा में अपना अनुपम योगदान दे सकें। उनकी बाल लीलाएँ, यानी बचपन की कहानियाँ, इतनी मनमोहक और शिक्षाप्रद हैं कि हर बच्चा उन्हें सुनकर प्रसन्न हो जाता है और प्रेरणा पाता है। आज हम ऐसी ही कुछ पावन और प्रेरक कथाओं को जानेंगे, जो हमें हनुमान जी के अलौकिक गुणों से परिचित कराएंगी और हमें भी उनके जैसा बनने के लिए प्रेरित करेंगी। हनुमान जी केवल अपनी शक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अटूट भक्ति, समर्पण और निस्वार्थ सेवा के लिए भी पूजे जाते हैं। उनकी कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि सच्ची शक्ति शारीरिक बल में नहीं, बल्कि मन की दृढ़ता, सत्यनिष्ठा और परमेश्वर के प्रति अटूट विश्वास में होती है। तो चलो, आज हम सब मिलकर हनुमान जी की मीठी और रोचक बाल लीलाओं की यात्रा पर निकलें, और उनके जीवन के महत्वपूर्ण पाठों को समझें।

**पावन कथा**
बहुत समय पहले की बात है, किष्किंधा नाम के एक सुंदर राज्य में अंजना नाम की एक देवी रहती थीं, जो देवों के आशीर्वाद से एक पुत्र प्राप्त करना चाहती थीं। उन्होंने कठोर तपस्या की और उनके तप से प्रसन्न होकर पवनदेव ने उन्हें वरदान दिया कि उनका पुत्र स्वयं उन्हीं के समान बलवान और वेगवान होगा। इसी प्रकार, चैत्र मास की पूर्णिमा को, अंजना मैया ने एक ऐसे शिशु को जन्म दिया, जिसका तेज सूर्य के समान था और जो दिखने में अत्यंत सुंदर था। यही शिशु आगे चलकर हनुमान जी के नाम से विख्यात हुआ। जब यह शिशु बहुत छोटा था, एक दिन उसे बहुत जोर की भूख लगी। उसने देखा कि आसमान में एक गोल, लाल रंग की चीज़ चमक रही है। उसने सोचा कि यह कोई बहुत ही मीठा फल होगा और उसे खाने के लिए वह अपनी दिव्य शक्ति से आसमान में उड़ चला। वह चीज़ और कोई नहीं, बल्कि स्वयं सूर्य देव थे, जो अपनी प्रचण्ड गर्मी से पूरे संसार को प्रकाशित करते हैं। नन्हें हनुमान ने बिना किसी डर के, सूर्य को अपने मुख में रख लिया।

पूरे संसार में अचानक अँधेरा छा गया। देवतागण और ऋषि-मुनि अत्यंत भयभीत हो गए। यह देखकर देवराज इंद्र बहुत क्रोधित हुए। उन्हें लगा कि हनुमान कोई राक्षस है जो सूर्य को निगल गया है। इंद्रदेव ने अपने वज्र से हनुमान जी पर प्रहार किया। वज्र के प्रहार से हनुमान जी मूर्छित होकर धरती पर गिर पड़े। पवनदेव, जो हनुमान जी के आध्यात्मिक पिता थे, अपने पुत्र की यह दशा देखकर अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गए। उन्होंने अपनी वायु को रोक लिया, जिससे संसार में साँस लेना मुश्किल हो गया। सभी जीव-जंतु और देवतागण वायु के अभाव में तड़पने लगे। तब सभी देवताओं ने पवनदेव से क्षमा माँगी और हनुमान जी को पुनर्जीवित करने का निवेदन किया। ब्रह्मा जी ने स्वयं हनुमान जी को जीवनदान दिया और उन्हें कई वरदान दिए। देवताओं ने हनुमान जी को अजर-अमर होने का वरदान दिया, कि कोई भी शस्त्र उन्हें हानि नहीं पहुँचा सकेगा। पवनदेव ने उन्हें अतुलनीय गति और बल का वरदान दिया। इस घटना के बाद से उन्हें ‘मारुति’ (पवन का पुत्र) और ‘बजरंगबली’ (वज्र के समान शरीर वाले) के नाम से भी जाना जाने लगा।

बचपन में हनुमान जी बहुत नटखट थे। वे अक्सर ऋषियों के आश्रम में जाकर उनके कमंडल तोड़ देते या उनकी यज्ञ सामग्री से छेड़छाड़ करते थे। ऋषियों ने उनके इस उपद्रव से परेशान होकर उन्हें एक श्राप दिया कि वे अपनी शक्तियों को तब तक भूल जाएँगे, जब तक कोई उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण नहीं कराएगा। यह श्राप दरअसल उनके लिए एक आशीर्वाद साबित हुआ, क्योंकि इसी वजह से वे विनम्र बने रहे और सही समय आने पर ही अपनी शक्तियों का उपयोग कर सके।

कई वर्ष बीत गए। जब भगवान श्रीराम अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ वनवास पर थे, तब दुष्ट रावण सीता माता का हरण कर लंका ले गया। श्रीराम अपनी पत्नी को ढूंढते हुए ऋष्यमूक पर्वत पर पहुँचे, जहाँ उनकी भेंट सुग्रीव से हुई। सुग्रीव ने उन्हें हनुमान जी से मिलवाया। हनुमान जी ने जैसे ही श्रीराम को देखा, उनके मन में प्रेम और भक्ति की लहर उमड़ पड़ी। उन्हें तुरंत यह अहसास हो गया कि श्रीराम कोई साधारण मनुष्य नहीं, बल्कि स्वयं परमात्मा हैं। हनुमान जी ने अपनी अद्वितीय बुद्धि और बल का परिचय देते हुए श्रीराम और सुग्रीव के बीच मित्रता कराई। इसके बाद श्रीराम ने सुग्रीव को उनका राज्य वापस दिलाया और बदले में सुग्रीव ने सीता माता को ढूंढने में श्रीराम की सहायता का वचन दिया।

सीता माता की खोज में जब सभी वानर दल समुद्र तट पर पहुँचे, तो विशाल समुद्र को देखकर सभी चिंतित हो गए। उन्हें लंका जाने का कोई उपाय नहीं दिख रहा था। तब जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी अद्भुत शक्तियों का स्मरण कराया। जैसे ही हनुमान जी को अपनी शक्तियाँ याद आईं, वे एक विशाल रूप धारण करके एक ही छलांग में समुद्र पार कर लंका पहुँच गए। वहाँ उन्होंने अशोक वाटिका में सीता माता का पता लगाया, उन्हें श्रीराम का संदेश दिया और लंका दहन करके वापस लौट आए। उनकी इस वीरता और भक्ति ने श्रीराम का मन मोह लिया।

आगे चलकर लंका युद्ध में हनुमान जी ने अतुलनीय पराक्रम दिखाया। लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर वे संजीवनी बूटी लाने के लिए पूरा द्रोणागिरि पर्वत ही उठाकर ले आए। हनुमान जी की सेवा, समर्पण, साहस और श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति अद्वितीय है। वे बच्चों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं, जो सिखाते हैं कि कैसे दृढ़ विश्वास और सेवाभाव से हर मुश्किल को जीता जा सकता है। उनकी यह पावन कथा हमें बताती है कि सच्ची भक्ति ही सबसे बड़ी शक्ति है।

**दोहा**
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

**चौपाई**
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।।
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा।।

**पाठ करने की विधि**
प्यारे बच्चों, हनुमान जी की इन अद्भुत कहानियों को पढ़ने या सुनने की एक सरल और पवित्र विधि है। सबसे पहले, एक शांत और स्वच्छ स्थान चुनें जहाँ आपको कोई परेशान न करे। यह स्थान आपके घर का पूजा घर भी हो सकता है या कोई भी कोना जहाँ आप शांति महसूस करते हैं। आप चाहें तो एक छोटी सी हनुमान जी की मूर्ति या चित्र अपने सामने रख सकते हैं। पढ़ने या सुनने से पहले अपने हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएँ। अब, आँखें बंद करके कुछ पल के लिए हनुमान जी का ध्यान करें। उनके बलशाली स्वरूप, उनके भक्तिमय हृदय और उनके सेवाभाव को याद करें। मन ही मन उनसे प्रार्थना करें कि वे आपको अपनी कहानियों से प्रेरणा दें और आपके मन को शुद्ध करें। अब, पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ कथा का पाठ करें या सुनें। कहानी पढ़ते समय या सुनते समय, हर घटना को अपने मन में कल्पना करें। सोचें कि आप स्वयं हनुमान जी के साथ उन घटनाओं का हिस्सा बन रहे हैं। कथा समाप्त होने पर, हनुमान जी को धन्यवाद दें और उनसे अपने जीवन में साहस, बुद्धि और भक्ति प्रदान करने की प्रार्थना करें। आप चाहें तो एक छोटा सा दीपक जला सकते हैं या थोड़े से फूल भी अर्पित कर सकते हैं। इन कहानियों को सप्ताह में एक बार या जब भी आपको अच्छा लगे, पढ़ सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप इसे सच्चे मन और प्रेम के साथ करें।

**पाठ के लाभ**
हनुमान जी की कहानियों का पाठ करने से बच्चों को अनगिनत लाभ मिलते हैं। पहला और सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि बच्चों में साहस और निडरता की भावना बढ़ती है। हनुमान जी की वीरतापूर्ण कहानियाँ सुनकर बच्चे भी बहादुर बनना चाहते हैं और मुश्किलों से घबराते नहीं हैं। दूसरा लाभ यह है कि बच्चों को बुद्धि और ज्ञान प्राप्त होता है। हनुमान जी स्वयं ज्ञानियों में अग्रगण्य थे, और उनकी कहानियाँ पढ़ने से बच्चों की सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है। वे सही और गलत का अंतर समझ पाते हैं। तीसरा लाभ है एकाग्रता और स्मरण शक्ति में सुधार। जब बच्चे ध्यान से कहानियाँ सुनते या पढ़ते हैं, तो उनकी एकाग्रता बढ़ती है, जिससे उन्हें पढ़ाई में भी मदद मिलती है। चौथा लाभ है भक्ति और नैतिक मूल्यों का विकास। हनुमान जी की श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति बच्चों को बड़ों का सम्मान करना, निस्वार्थ सेवा करना और सच्चाई के मार्ग पर चलना सिखाती है। वे समझते हैं कि प्रेम और सेवा ही जीवन के सबसे बड़े मूल्य हैं। पाँचवाँ लाभ है आत्मविश्वास में वृद्धि। हनुमान जी की कहानियाँ बच्चों को यह विश्वास दिलाती हैं कि वे भी अपनी क्षमताओं का सही उपयोग करके बड़े से बड़े कार्य कर सकते हैं। वे स्वयं पर भरोसा करना सीखते हैं। छठा लाभ है बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश। हनुमान जी ने रावण जैसे दुष्टों का संहार करके धर्म की स्थापना की। यह बच्चों को सिखाता है कि अंत में हमेशा अच्छाई की जीत होती है और हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। इस प्रकार, हनुमान जी की कहानियाँ बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं और उन्हें एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देती हैं।

**नियम और सावधानियाँ**
हनुमान जी की कहानियों का पाठ करते समय कुछ सरल नियमों और सावधानियों का पालन करना चाहिए, ताकि हमें पूर्ण लाभ मिल सके और मन में पवित्रता बनी रहे।
1. **स्वच्छता**: हमेशा स्वच्छ होकर ही कहानियों का पाठ करें। अपने हाथ-पैर धो लें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। जिस स्थान पर आप बैठकर पाठ कर रहे हैं, वह भी साफ-सुथरा होना चाहिए।
2. **पवित्र मन**: पाठ करते समय मन में कोई बुरे विचार या क्रोध नहीं होना चाहिए। शांति और श्रद्धा के भाव से पाठ करें। हनुमान जी को याद करते हुए मन को निर्मल रखें।
3. **एकाग्रता**: कहानी पढ़ते या सुनते समय आपका पूरा ध्यान उसी पर होना चाहिए। बीच में अन्य बातों पर ध्यान न दें या कोई और काम न करें। मोबाइल या टीवी जैसे विचलन पैदा करने वाली चीज़ों से दूर रहें।
4. **श्रद्धा**: हनुमान जी के प्रति सच्ची श्रद्धा और विश्वास रखें। यह समझें कि आप एक महान देवता की पवित्र कथा पढ़ रहे हैं। मन में संदेह का कोई स्थान न हो।
5. **उच्चारण**: यदि आप जोर से पाठ कर रहे हैं, तो शब्दों का उच्चारण स्पष्ट और सही करें। यदि आप सुन रहे हैं, तो ध्यान से सुनें।
6. **नियमितता (इच्छा अनुसार)**: यदि संभव हो तो किसी निश्चित समय पर या सप्ताह के किसी खास दिन (जैसे मंगलवार या शनिवार) पाठ करने का प्रयास करें। हालांकि, यह अनिवार्य नहीं है, आप जब चाहें तब पाठ कर सकते हैं, बस मन सच्चा होना चाहिए।
7. **आदर**: कहानी की पुस्तक या जिस डिवाइस पर आप पढ़ रहे हैं, उसका आदर करें। उसे ज़मीन पर या अपवित्र स्थान पर न रखें।
8. **सात्विक भोजन**: यदि आप विशेष रूप से हनुमान जी के लिए कोई व्रत या विशेष पाठ कर रहे हैं, तो उस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करने का प्रयास करें, यानी प्याज, लहसुन और मांसाहार से दूर रहें। हालांकि, बच्चों के लिए यह नियम उतनी सख्ती से लागू नहीं होता, बस भोजन शुद्ध और घर का बना होना चाहिए।
इन नियमों का पालन करने से बच्चों का मन शांत और स्थिर होता है, और उन्हें हनुमान जी की कृपा का अनुभव होता है।

**निष्कर्ष**
तो प्यारे बच्चों, आपने देखा कि हमारे प्यारे हनुमान जी कितने अद्भुत हैं। उनकी बाल लीलाएँ, उनका अदम्य साहस, उनकी बुद्धि और उनकी अटूट भक्ति हमें जीवन के हर मोड़ पर प्रेरणा देती है। हनुमान जी की कहानी केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पाठशाला है। यह हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न आए, अगर हमारे मन में सच्ची श्रद्धा, दृढ़ विश्वास और सेवा का भाव हो, तो हम हर बाधा को पार कर सकते हैं। हमें हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए, बड़ों का सम्मान करना चाहिए, और अपने दोस्तों व परिवारजनों के प्रति दयालु होना चाहिए। हनुमान जी की तरह हमें भी अपनी शक्तियों को पहचानना चाहिए, उन्हें अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए और कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। उनकी निस्वार्थ सेवा और श्रीराम के प्रति उनका प्रेम हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद करने में है। इसलिए, बच्चों, जब भी आपको किसी बात का डर लगे या आप किसी मुश्किल में पड़ो, तो हनुमान जी को याद करना। उनकी कहानियाँ आपको साहस देंगी और आपको सही राह दिखाएंगी। हनुमान जी सदा हमारे साथ हैं, हमारी रक्षा करते हैं और हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। जय श्री राम, जय हनुमान!

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Category: बाल कथाएँ, भक्ति कहानियाँ, पौराणिक कथाएँ
Slug: hanuman-ji-ki-kahani-bachchon-ke-liye
Tags: हनुमान जी, बच्चों की कहानी, भक्ति कथा, साहस, शक्ति, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, बजरंगबली, पवनपुत्र, प्रेरणादायक कहानी

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