छम छम नाचे वीर हनुमान: आनंदमयी भक्ति का अद्भुत प्रवाह और बजरंगबली कृपा का महात्म्य
वीर हनुमान का नाम लेते ही मन में भक्ति, शक्ति, सेवा और समर्पण का अद्भुत संगम साकार हो उठता है। पवनपुत्र हनुमान, जो भगवान राम के परम भक्त हैं, उनका स्मरण मात्र ही समस्त भय और बाधाओं को दूर कर देता है। जब हम ‘छम छम नाचे वीर हनुमान’ जैसे भजनों को सुनते हैं, तो हमारे मन में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा और आनंद का संचार होता है। यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि उस अलौकिक स्पंदन का अनुभव है जो बजरंगबली की उपस्थिति में महसूस होता है। यह भजन हनुमान जी के उस जीवंत और उत्साहपूर्ण स्वरूप का वर्णन करता है, जो अपनी भक्ति में लीन होकर आनंदित होता है। सनातन स्वर के इस भक्तिमय लेख में, आइए हम इस भजन के गहरे अर्थों, इसके आध्यात्मिक महत्व और हनुमान जी की असीम कृपा को विस्तार से समझें, जो हर भक्त के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह भर देता है।
बजरंगबली का आनंदमयी नृत्य: एक दिव्य कथा
यद्यपि शास्त्रों में हनुमान जी के किसी विशेष ‘छम छम’ नृत्य का सीधा वर्णन नहीं मिलता, किंतु ‘छम छम नाचे वीर हनुमान’ की यह कल्पना उनके उस अद्भुत ऊर्जावान और आनंदमय स्वरूप को दर्शाती है जो उनके प्रत्येक कार्य में परिलक्षित होता है। हनुमान जी का ‘नृत्य’ शारीरिक न होकर, उनकी आंतरिक ऊर्जा, उत्साह और श्रीराम के प्रति अनन्य प्रेम का प्रतीक है।
想象 कीजिए, जब हनुमान जी ने माता सीता की खोज में विशाल समुद्र लांघा था, तो उनके हर पग में कितनी शक्ति और गति थी! वह गति, वह उल्लास, वह संकल्प ही उनका दिव्य नृत्य था। जब उन्होंने लंका को जलाकर भस्म किया, तो उनके रौद्र रूप में भी श्रीराम के प्रति अटूट सेवा का आनंद झलकता था। संजीवनी बूटी लाने के लिए जब वे विशाल पर्वत को उठाकर लाए, तो उस कार्य में भी उनका अटूट विश्वास और उत्साह साफ दिखाई देता था। यह सब उनके जीवन का ‘नृत्य’ ही तो है – एक ऐसा नृत्य जिसमें हर कदम श्रीराम के नाम से ओत-प्रोत है, और हर भंगिमा में भक्ति का चरम उत्कर्ष है।
लंका दहन के पश्चात, जब हनुमान जी सकुशल माता सीता का समाचार लेकर प्रभु राम के पास पहुँचे, तो उनके मुख पर जो संतोष और आनंद की आभा थी, क्या वह किसी नृत्य से कम थी? श्रीराम के चरणों में अपना शीश झुकाकर, सेवा में लीन रहने वाला यह महावीर, अपने हर कार्य को एक उत्सव की भाँति करता था। उनके लिए श्रीराम का नाम जपना ही सबसे बड़ा संगीत था और उनकी सेवा करना ही सबसे बड़ा नृत्य।
एक बार, देवर्षि नारद ने हनुमान जी से पूछा, “हे पवनपुत्र! आप सदैव श्रीराम के नाम का स्मरण करते हुए किस प्रकार इतनी शक्ति और उत्साह से भरे रहते हैं?” हनुमान जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “देवर्षि! मेरे लिए श्रीराम का नाम ही मेरा जीवन है। जब मैं उनका नाम लेता हूँ, तो मेरे रोम-रोम में एक अद्भुत स्पंदन होता है, मानो मेरे भीतर ही कोई दिव्य ऊर्जा नाच उठती है। हर संकट का नाश करने वाला, हर भय को मिटाने वाला मेरा प्रभु जब मेरे हृदय में बसता है, तो मेरा पूरा अस्तित्व ‘छम छम’ की ध्वनि से भर उठता है। यह ध्वनि मेरे भक्तिमय आनंद और प्रभु की कृपा का साक्षात् प्रमाण है।”
यह भजन हमें हनुमान जी के उस आनंदमय स्वभाव से जोड़ता है, जहाँ भक्ति और शक्ति एकाकार हो जाती हैं। यह कल्पना हमें बताती है कि कैसे हनुमान जी अपने हर कार्य में लीन होकर, पूर्ण उत्साह और आनंद के साथ करते हैं, क्योंकि उनके हृदय में केवल और केवल श्रीराम ही बसते हैं। उनका ‘छम छम’ नृत्य भक्तों के हृदय में भी उसी ऊर्जा और उत्साह को जागृत करता है, जिससे वे अपने जीवन के हर चुनौती का सामना कर सकें।
छम छम नाचे वीर हनुमान भजन का आध्यात्मिक महत्व और लाभ
‘छम छम नाचे वीर हनुमान’ भजन केवल एक मनमोहक धुन नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक महत्व से ओत-प्रोत है। इस भजन का पाठ और श्रवण हमें कई प्रकार के लाभ प्रदान करता है:
* **भय और संकटों से मुक्ति:** हनुमान जी को ‘संकट मोचन’ कहा जाता है। इस भजन का नियमित पाठ करने से भक्तों के जीवन से भय, चिंता और हर प्रकार के संकट दूर होते हैं। हनुमान जी की कृपा से अज्ञात भय भी समाप्त हो जाते हैं।
* **आत्मविश्वास और मनोबल में वृद्धि:** हनुमान जी स्वयं साहस और शक्ति के प्रतीक हैं। उनके इस आनंदमयी स्वरूप का स्मरण करने से भक्तों में आत्मविश्वास और मनोबल का संचार होता है। वे जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक दृढ़ता से कर पाते हैं।
* **सकारात्मक ऊर्जा का संचार:** जब यह भजन पूरे भक्तिभाव से गाया जाता है, तो इसकी ध्वनि से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर जाती है। घर और मन में व्याप्त नकारात्मकता दूर होती है और शांति का अनुभव होता है।
* **रोग-दोष का निवारण:** हनुमान चालीसा में कहा गया है, “नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।” इस भजन का पाठ भी शारीरिक और मानसिक रोगों के निवारण में सहायक माना जाता है।
* **अष्ट सिद्धि नव निधि की प्राप्ति:** हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नव निधि का दाता माना जाता है। उनकी भक्ति से भक्तों को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जिससे जीवन में समृद्धि और सफलता आती है।
* **एकाग्रता और मानसिक शांति:** भक्ति में लीन होकर इस भजन को गाने से मन की चंचलता समाप्त होती है और एकाग्रता बढ़ती है। यह मानसिक तनाव को कम कर मन को शांत और स्थिर करता है।
* **बजरंगबली की असीम कृपा:** सबसे महत्वपूर्ण, यह भजन भक्तों को बजरंगबली की असीम कृपा का पात्र बनाता है। उनकी कृपा से जीवन में हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। हनुमान जी की यह कृपा भक्ति के मार्ग को सुगम बनाती है।
यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में ही परमानंद है और जब हम पूर्ण समर्पण के साथ भगवान का स्मरण करते हैं, तो वे स्वयं हमारे जीवन में आकर समस्त कष्टों को हर लेते हैं।
हनुमान जी की उपासना से जुड़े अनुष्ठान और परंपराएँ
वीर हनुमान की भक्ति कई सरल और प्रभावी अनुष्ठानों तथा परंपराओं के माध्यम से की जाती है, जो भक्तों को उनकी कृपा के और करीब लाती हैं:
1. **मंगलवार और शनिवार का महत्व:** मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। इन दिनों व्रत रखना, हनुमान मंदिरों में दर्शन करना और विशेष आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मंगलवार हनुमान जी का विशेष दिन है, और शनिवार को शनिदेव से संबंधित होने के कारण हनुमान जी की पूजा से शनि दोष भी शांत होते हैं।
2. **हनुमान चालीसा का पाठ:** हनुमान चालीसा का नित्य पाठ हनुमान भक्ति का एक अभिन्न अंग है। इसे नियमित रूप से करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। ‘संकट मोचन हनुमानाष्टक’ का पाठ भी बहुत लाभकारी होता है।
3. **सुंदरकांड का पाठ:** सुंदरकांड का पाठ करना हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शक्तिशाली मार्ग है। यह विशेष रूप से तब किया जाता है जब किसी बड़े संकट का निवारण करना हो या कोई बड़ी मनोकामना पूर्ण करनी हो। इसे घर में या सामूहिक रूप से करना अत्यंत फलदायी होता है।
4. **सिंदूर लेपन और चोला चढ़ाना:** हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। उन्हें तेल और सिंदूर का चोला चढ़ाना, उनकी कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इससे आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
5. **नैवेद्य और भोग:** हनुमान जी को बेसन के लड्डू, गुड़-चना, चूरमा और बूंदी का भोग लगाना चाहिए। यह उन्हें प्रसन्न करने का एक सरल तरीका है।
6. **दीप प्रज्वलन:** देसी घी या चमेली के तेल का दीपक हनुमान जी के समक्ष जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
7. **भजन-कीर्तन:** ‘छम छम नाचे वीर हनुमान’ जैसे भक्तिमय भजनों का गायन और श्रवण करना, विशेषकर हनुमान जयंती जैसे पर्वों पर, हनुमान जी को प्रसन्न करता है और वातावरण को शुद्ध बनाता है।
8. **हनुमान जयंती उत्सव:** हनुमान जयंती का पर्व पूरे देश में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना, शोभायात्राएँ और भंडारे आयोजित किए जाते हैं।
इन सभी अनुष्ठानों को श्रद्धा और सच्चे मन से करने पर हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी इच्छाएँ पूर्ण करते हैं।
निष्कर्ष: भक्ति के ‘छम छम’ में लीन होकर पाएं बजरंगबली की कृपा
‘छम छम नाचे वीर हनुमान’ भजन हमें केवल एक मधुर धुन से नहीं जोड़ता, बल्कि यह हमें उस परमानंद और उत्साह से परिचित कराता है जो हनुमान जी की भक्ति का सार है। यह हमें स्मरण कराता है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन के हर पल में उत्साह, शक्ति और आनंद का अनुभव करने का नाम है। जिस प्रकार वीर हनुमान ने अपने हर कार्य को श्रीराम की सेवा समझकर पूर्ण निष्ठा और आनंद से किया, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन के हर चुनौती को प्रभु की इच्छा मानकर स्वीकार करना चाहिए।
बजरंगबली की कृपा असीम है और वे अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते। जब आप सच्चे हृदय से ‘छम छम नाचे वीर हनुमान’ का गायन करते हैं, तो आप स्वयं को उनकी दिव्य ऊर्जा से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। यह भजन आपको भय, निराशा और आलस्य से मुक्ति दिलाकर एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। आइए, सनातन स्वर के साथ हम सभी वीर हनुमान के इस आनंदमयी नृत्य में लीन हो जाएँ और उनकी असीम शक्ति, भक्ति और कृपा को अपने जीवन में अनुभव करें। उनके चरण कमलों में अर्पित यह भक्ति हमें जीवन के हर मार्ग पर सफलता और शांति प्रदान करेगी। जय श्रीराम! जय हनुमान!

