# शिव शंकर प्रार्थना सम्पूर्ण पाठ: महामृत्युंजय मंत्र से संकट निवारण और कल्याण का मार्ग
त्रिलोकीनाथ भगवान शिव, जो सृष्टि के संहारक और पालक दोनों हैं, अपनी करुणा और औघड़दानी स्वभाव के लिए पूजे जाते हैं। उनकी महिमा अपरंपार है और उनकी एक सरल प्रार्थना भी भक्तों के जीवन से समस्त कष्टों को हर लेती है। सनातन संस्कृति में भगवान शिव की आराधना का एक ऐसा ही अद्वितीय और परम शक्तिशाली रूप है ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप। यह मंत्र मात्र शब्दों का समूह नहीं, अपितु स्वयं शिव तत्व का स्पंदन है, जो जीवन, मृत्यु और मोक्ष के रहस्यों को समेटे हुए है। आज इस ‘शिव शंकर प्रार्थना सम्पूर्ण पाठ’ में हम इस महामंत्र के गूढ़ रहस्यों, जप विधि, चमत्कारी लाभों और कैसे यह हमारे जीवन से सभी संकटों का निवारण करता है, इसकी विस्तृत चर्चा करेंगे। यह केवल एक लेख नहीं, अपितु शिव भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो उन्हें महादेव के समीप ले जाएगी।
## भगवान शिव की महिमा और प्रार्थना का महत्व
देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, नीलकंठ – अनेकों नामों से पूजे जाने वाले भगवान शिव अनादि और अनंत हैं। उनकी लीलाएं अगम्य हैं और उनका स्वरूप कल्याणकारी। शिवरात्रि हो या सावन मास, हर शुभ अवसर पर भक्तगण ‘शिव शंकर प्रार्थना’ के माध्यम से उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। यह प्रार्थना सिर्फ किसी इच्छा की पूर्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा की परमात्मा से एकाकार होने की व्याकुलता है। जब भक्त सच्चे मन से महादेव का स्मरण करता है, तो शिव उसकी हर पुकार सुनते हैं और उसे असीम शांति, शक्ति तथा भयमुक्त जीवन का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उनकी कृपा से ही जीवन में स्थिरता, आरोग्य और आध्यात्मिक उन्नति संभव हो पाती है। शिव कथाएँ, शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ, सब इसी शिव आराधना के विभिन्न आयाम हैं, जिनमें महामृत्युंजय मंत्र का स्थान सर्वोच्च है।
## महामृत्युंजय मंत्र: अमरता और आरोग्य का महागुह्य
‘महामृत्युंजय मंत्र’ को ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद में वर्णित एक अत्यंत प्राचीन और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इसे मृत्यु को जीतने वाला और जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने वाला ‘मोक्ष मंत्र’ भी कहा जाता है। यह मंत्र केवल शारीरिक रोगों या अकाल मृत्यु के भय से ही नहीं बचाता, बल्कि मानसिक शांति, आध्यात्मिक विकास और समस्त प्रकार के संकटों से भी मुक्ति दिलाता है।
**मंत्र है:**
**ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।**
**उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥**
**अर्थ:** हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो हमें पोषित करते हैं। वे हमें मृत्यु के बंधनों से उसी प्रकार मुक्त करें, जैसे पका हुआ फल डाली से अनायास अलग हो जाता है और हमें अमरता प्रदान करें।
### महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति और कथा
इस दिव्य मंत्र की उत्पत्ति के संबंध में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, मार्कण्डेय ऋषि को अल्पायु का वरदान प्राप्त था। जब उनकी मृत्यु का समय निकट आया, तो उन्होंने भगवान शिव की घोर तपस्या की और महामृत्युंजय मंत्र का अविष्कार किया। इस मंत्र के प्रभाव से यमराज भी उन्हें लेने में असमर्थ रहे और भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर मार्कण्डेय को चिरंजीवी होने का वरदान दिया। यह कथा हमें मंत्र की अकाल मृत्यु निवारण और दीर्घायु प्रदान करने की शक्ति का दर्शन कराती है। एक अन्य प्रसंग में, शुक्राचार्य ने देवताओं को दैत्यों के संहार से बचाने और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए भगवान शिव से इस मंत्र का ज्ञान प्राप्त किया था, जिससे यह मंत्र ‘संजीवनी मंत्र’ के नाम से भी विख्यात हुआ। यह ‘शिव कथा’ हमें बताती है कि यह मंत्र न केवल व्यक्तिगत कल्याण के लिए है, बल्कि व्यापक रूप से भी जीवन को सुरक्षित और समृद्ध बनाने में सहायक है।
## महामृत्युंजय मंत्र जप विधि: शुद्धता और श्रद्धा से करें आराधना
किसी भी मंत्र का पूर्ण लाभ तभी मिलता है, जब उसका जप सही विधि और पूर्ण श्रद्धा के साथ किया जाए। महामृत्युंजय मंत्र का जप भी विशेष नियमों का पालन करते हुए किया जाना चाहिए।
1. **शुभ समय:** इस मंत्र के जप के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व), प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) और शिवरात्रि, सावन मास, रुद्राभिषेक जैसे पवित्र अवसर विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। आप प्रतिदिन भी इसका जप कर सकते हैं।
2. **स्थान और आसन:** जप हमेशा स्वच्छ और शांत स्थान पर करें। कुश का आसन बिछाकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। मंदिर या शिव लिंग के सामने जप करना अति उत्तम फलदायी होता है।
3. **शुद्धता:** जप से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मन को शांत और शुद्ध रखें। एकाग्रता के लिए दीपक या धूप जला सकते हैं।
4. **माला:** रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। रुद्राक्ष स्वयं शिव का स्वरूप है।
5. **जप संख्या:** न्यूनतम 108 बार (एक माला) जप करें। अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार आप 1008 बार, 54000 (सवा लाख) या 1.25 करोड़ बार भी जप कर सकते हैं। अधिक संख्या में जप करने के लिए संकल्प लेकर करना चाहिए।
6. **उच्चारण:** मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। यदि आप अर्थ समझकर जप करते हैं, तो उसका प्रभाव और भी बढ़ जाता है।
7. **एकाग्रता और ध्यान:** मंत्र जप करते समय भगवान शिव के शांत और कल्याणकारी स्वरूप का ध्यान करें। उनके मस्तक पर चंद्रमा, गले में सर्प, त्रिशूल और डमरू का चिंतन करें। पूरे ब्रह्मांड में शिव शक्ति के फैलाव की कल्पना करें।
## महामृत्युंजय मंत्र जप के फायदे (लाभ): संकट निवारण और कल्याण का सूत्र
यह दिव्य मंत्र असंख्य लाभ प्रदान करता है, जो भक्त के जीवन को रूपांतरित कर देते हैं:
* **अकाल मृत्यु का निवारण:** यह मंत्र मृत्यु के भय को दूर करता है और अकाल मृत्यु की आशंका को टालता है। दीर्घायु और स्वस्थ जीवन प्रदान करता है।
* **रोग मुक्ति और आरोग्य:** गंभीर से गंभीर बीमारियों से मुक्ति दिलाने में यह मंत्र अत्यंत प्रभावी है। यह शरीर में प्राण ऊर्जा का संचार कर रोगों से लड़ने की शक्ति देता है।
* **मानसिक शांति और भयमुक्ति:** तनाव, चिंता, अवसाद और अज्ञात भय से मुक्ति दिलाकर मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
* **ग्रह दोष निवारण:** कुंडली में मौजूद विभिन्न ग्रह दोषों, जैसे मंगल दोष, शनि की साढ़ेसाती या अन्य अशुभ प्रभावों को शांत करने में सहायक है।
* **सकारात्मक ऊर्जा का संचार:** नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर और व्यक्ति के चारों ओर सकारात्मकता का एक सुरक्षा कवच बनाता है।
* **सुख-समृद्धि और धन लाभ:** जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सुख, समृद्धि और धन प्राप्ति के मार्ग खोलता है।
* **मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति:** यह मंत्र न केवल भौतिक लाभ देता है, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने में सहायक होकर मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है। यह आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है।
* **अखंड सौभाग्य और संतान सुख:** विवाहित महिलाओं के लिए यह मंत्र अखंड सौभाग्य प्रदान करता है और संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए भी शुभ फलदायी है।
## महामृत्युंजय मंत्र का महत्व (Significance): एक दैवीय सुरक्षा कवच
‘महामृत्युंजय मंत्र’ का महत्व केवल इसके भौतिक लाभों तक सीमित नहीं है। यह एक दैवीय सुरक्षा कवच है, जो हर विपत्ति में भक्त की रक्षा करता है। यह हमें सिखाता है कि जीवन अनमोल है और इसे पूरी जागरूकता के साथ जीना चाहिए। यह मंत्र हमें मृत्यु के स्वाभाविक सत्य को स्वीकार करते हुए भी उससे परे जाने की शक्ति प्रदान करता है। ‘महादेव पूजा’ में इस मंत्र का स्थान अतुलनीय है, क्योंकि यह सीधे शिव के उस स्वरूप से जुड़ता है जो तीनों लोकों में जीवन और मृत्यु के स्वामी हैं। ‘रुद्राभिषेक’ के दौरान भी इस मंत्र का जप विशेष रूप से किया जाता है, जिससे अभिषेक का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह मंत्र जीवन के हर पहलू में संतुलन और शांति लाता है, जिससे व्यक्ति भयमुक्त होकर अपने कर्तव्यों का पालन कर सके। यह सिर्फ एक ‘शिव स्तुति’ नहीं, अपितु जीवन का एक संपूर्ण दर्शन है।
## निष्कर्ष: शिव शंकर प्रार्थना से पाएं संकट निवारण और परम कल्याण
‘शिव शंकर प्रार्थना’ का यह सम्पूर्ण पाठ, विशेष रूप से ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जप, भक्तों के लिए एक अनमोल उपहार है। यह हमें सिखाता है कि कैसे भगवान शिव की असीम कृपा से हम जीवन की हर चुनौती का सामना कर सकते हैं और ‘संकट निवारण’ के साथ-साथ परम कल्याण भी प्राप्त कर सकते हैं। चाहे वह शारीरिक कष्ट हो, मानसिक अशांति हो, या जीवन की कोई बड़ी बाधा – महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप हमें इन सभी से मुक्ति दिला सकता है।
तो, आइए हम सब मिलकर इस दिव्य महामृत्युंजय मंत्र को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। प्रतिदिन महादेव का स्मरण करें, उनकी महिमा का गुणगान करें और इस मंत्र की शक्ति से अपने और अपनों के जीवन को आरोग्य, शांति और समृद्धि से भर दें। शिव कृपा से आपका जीवन सदैव मंगलमय हो! ॐ नमः शिवाय!

