श्री राम चंद्र कृपालु भज मन सम्पूर्ण भजन लिरिक्स: राम नवमी 2024 पर श्रीराम की असीम कृपा पाएं
राम नवमी 2024 की आप सभी सनातन स्वर के पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएँ! चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि वह पावन वेला है, जब मर्यादा पुरुषोत्तम, भगवान श्री राम ने अयोध्या नगरी में जन्म लिया था। यह दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों के हृदय में आस्था, प्रेम और भक्ति का संचार करने वाला महापर्व है। इस दिन वातावरण में एक अद्भुत दिव्यता घुल जाती है, प्रत्येक कण में राम नाम की मधुर ध्वनि गूँजती महसूस होती है। ऐसे में, ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ यह केवल एक भजन नहीं, बल्कि प्रभु श्री राम के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक और उनकी असीम कृपा को प्राप्त करने का एक सरल व शक्तिशाली माध्यम है।
क्या आप भी राम नवमी पर कौन सा भजन गाएं, इसकी तलाश में हैं? क्या आप जानना चाहते हैं कि ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ का महत्व क्या है और कैसे राम कृपा पाएं? तो यह लेख आपके लिए ही है। यहाँ हम इस पवित्र भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, इसके भक्तिमय अर्थ, और राम नवमी पर इसके विशेष अनुष्ठान के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि आप भी इस पावन अवसर पर भगवान राम की अनन्त कृपा का अनुभव कर सकें। यह भजन राम नवमी स्पेशल भजन के रूप में हर घर में गूंजता है और मन को शांति प्रदान करता है।
राम कथा: लीलाधारी प्रभु का अवतार और भजन का उद्भव
त्रेता युग में जब धरती पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गए थे, तब धर्म की स्थापना और राक्षसों के संहार के लिए भगवान विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के रूप में अवतार लिया। अयोध्या के राजा दशरथ और महारानी कौशल्या के पुत्र के रूप में जन्में श्रीराम का जीवन त्याग, धर्म, प्रेम और सत्य का ऐसा आदर्श प्रस्तुत करता है, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है। उनका जन्म मध्य दोपहर के अभिजित मुहूर्त में हुआ था, जब ग्रह नक्षत्र अपनी सर्वोत्तम स्थिति में थे, मानो स्वयं प्रकृति भी इस दिव्य अवतार का स्वागत कर रही हो।
भगवान राम का संपूर्ण जीवन ही एक प्रेरणा है, जिसमें उन्होंने एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श राजा का चरित्र निभाया। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म का पालन किया और सभी को प्रेम और न्याय का मार्ग दिखाया। उनके इन्हीं अनुपम गुणों और कृपालु स्वभाव का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने अमर ग्रंथ ‘रामचरितमानस’ में किया है। ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ यह भजन भी उन्हीं गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित है, जिन्होंने अपनी अटूट भक्ति और प्रभु प्रेम में लीन होकर इस स्तुति की रचना की। यह भजन भगवान राम के रूप, गुण, शील और उनके कृपालु स्वभाव का सजीव चित्रण करता है, जो भक्तों के मन को शांति और आत्मा को दिव्यता से भर देता है। यह भजन सदियों से भक्तों को राम नाम की महिमा से जोड़ता आ रहा है और राम कथा का सार अपने भीतर समेटे हुए है।
भक्ति का अमृत: ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ का महत्व
मानव जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति और प्रभु की कृपा का अनुभव करना है। कलयुग में नाम संकीर्तन (कीर्तन) को सबसे सुलभ और प्रभावी मार्ग बताया गया है। ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ भजन इसी नाम संकीर्तन की शक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस भजन की प्रत्येक पंक्ति प्रभु राम के दिव्य गुणों का बखान करती है, जो मन को एकाग्र करती है, नकारात्मक विचारों को दूर करती है और हृदय में प्रभु राम की पावन छवि को स्थापित करती है।
चलिए, इस भजन की कुछ पंक्तियों के भक्तिमय अर्थ को समझते हैं और ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन महत्व’ को जानते हैं:
* **“श्री राम चंद्र कृपालु भज मन, हरण भव भय दारुणम्”**
* हे मन! कृपालु श्रीराम का भजन कर, जो संसार के भयानक भय को हरने वाले हैं। यह पंक्ति हमें सीधे प्रभु की शरण में जाने का आह्वान करती है, जहाँ सभी प्रकार के भय समाप्त हो जाते हैं।
* **“नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर-कंज, पद-कंजारुणम्”**
* प्रभु राम के नेत्र नए कमल के समान हैं, मुख कमल के समान है, हाथ कमल के समान हैं और चरण भी लाल कमल के समान सुंदर हैं। यह पंक्ति प्रभु के अलौकिक सौंदर्य का वर्णन करती है, जिससे मन उनकी छवि में लीन हो जाता है।
* **“कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुंदरम्। पट पीत मानहुं तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्”**
* उनकी छवि करोड़ों कामदेवों से भी अधिक सुंदर है, वे नए नीले बादल के समान श्याम वर्ण वाले हैं। उनके पीताम्बर (पीले वस्त्र) ऐसे लगते हैं, मानो बिजली चमक रही हो। मैं उन पवित्र जनकसुता (सीता जी) के पति को प्रणाम करता हूँ। यह वर्णन प्रभु के दिव्य रूप को हमारे समक्ष साकार कर देता है।
* **“भज दीनबंधु दिनेश दानव दैत्यवंश-निकंदनं। रघुनंद आनंदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनं”**
* हे मन! उन दीनबंधु, सूर्यवंशी (दिनेश), दानव और दैत्यवंश का नाश करने वाले का भजन कर। वे रघुकुलनंदन हैं, आनंद के पुंज (आनंदकंद) हैं, कोशल के चंद्रमा और दशरथ के नंदन हैं। यह पंक्तियाँ प्रभु के पराक्रम और उनके भक्तवत्सल स्वभाव को दर्शाती हैं।
* **“सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणं। आजानुभुज सर चाप-धर, संग्राम-जित खरदूषणं”**
* उनके सिर पर मुकुट है, कानों में कुंडल हैं, ललाट पर सुंदर तिलक है और अंगों पर उदार आभूषण सुशोभित हैं। उनकी भुजाएँ घुटनों तक लंबी हैं, वे धनुष-बाण धारण किए हुए हैं और उन्होंने खर-दूषण जैसे भयंकर राक्षसों को युद्ध में पराजित किया था। यह वर्णन प्रभु के राजसी और वीर स्वरूप को उजागर करता है।
* **“इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि-मन-रंजनं। मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनम्”**
* तुलसीदास कहते हैं कि वे भगवान शिव (शंकर), शेषनाग और सभी मुनियों के मन को आनंदित करने वाले हैं। हे प्रभु! आप मेरे हृदय कमल में निवास करें और काम, क्रोध आदि दुष्ट शत्रु दल का नाश करें। यह अंतिम पंक्ति भक्त की परम प्रार्थना और समर्पण को व्यक्त करती है।
यह भजन ‘राम कृपा कैसे पाएं’ का सीधा और सरल उत्तर है। शुद्ध हृदय, अटूट विश्वास और निरंतर जाप के माध्यम से हम प्रभु राम की असीम कृपा के पात्र बन सकते हैं। यह भजन राम नाम की महिमा का गुणगान करता है, जो सभी पापों का नाश करता है और जीवन को सार्थक बनाता है। यह आत्म-शुद्धि का मार्ग है और दिव्य प्रेम की अनुभूति कराता है।
राम नवमी पर ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ का विशेष अनुष्ठान
राम नवमी का दिन भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, और यह दिन उनकी कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ होता है। ‘राम नवमी पर कौन सा भजन गाएं’ का उत्तर ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ भजन से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। यहाँ कुछ विशेष अनुष्ठान दिए गए हैं, जिनके द्वारा आप इस भजन को अपनी राम नवमी पूजा का अभिन्न अंग बना सकते हैं और ‘राम नवमी स्पेशल भजन’ का आनंद ले सकते हैं:
1. **प्रातः काल स्नान और संकल्प:** राम नवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान राम के बाल रूप की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। प्रभु राम की कृपा प्राप्त करने का संकल्प लें।
2. **पूजा और अर्चन:** भगवान राम का विधिवत पूजन करें। धूप, दीप, नैवेद्य (खीर, फल, मिठाई), पुष्प (मुख्यतः लाल कमल या गुड़हल), तुलसी दल और चंदन अर्पित करें। चंदन का तिलक लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. **भजन और कीर्तन:** पूजा के दौरान ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ भजन का कम से कम 108 बार जाप करें। यदि संभव हो, तो परिवार और मित्रों के साथ बैठकर समूह में इसका गायन करें। समूह में कीर्तन करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और भक्ति का वातावरण बनता है। यह भजन राम आरती के पहले या बाद में विशेष रूप से गाया जाता है।
4. **राम कथा श्रवण और पाठ:** इस पावन दिन रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण के किसी भी अंश का पाठ करना या सुनना बहुत शुभ माना जाता है। यह राम कथा आपके मन को पवित्र करती है और प्रभु के जीवन के आदर्शों से प्रेरणा देती है।
5. **अखंड रामायण पाठ:** कई भक्त और समुदाय इस दिन अखंड रामायण पाठ का आयोजन करते हैं, जिसमें 24 घंटे लगातार रामचरितमानस का पाठ किया जाता है। यदि आप पूर्ण पाठ नहीं कर सकते, तो राम चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
6. **दान-पुण्य:** अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गरीबों, जरूरतमंदों को भोजन कराएं या वस्त्र, अन्न आदि का दान करें। दान-पुण्य से प्रभु राम अत्यंत प्रसन्न होते हैं और आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
7. **संध्या आरती:** सायंकाल में पुनः भगवान राम की आरती करें और ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ भजन का गायन करें। इससे दिन भर की पूजा का फल मिलता है।
ये सभी क्रियाएं ‘राम कृपा’ प्राप्त करने के मार्ग को प्रशस्त करती हैं और आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स: श्री राम चंद्र कृपालु भज मन
श्री रामचन्द्र कृपालु भज मन हरण भव भय दारुणम् ।
नवकंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम् ॥1॥
कंदर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम् ।
पट पीत मानहुं तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम् ॥2॥
भज दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम् ।
रघुनंद आनंद कंद कोशलचंद दशरथ नन्दनम् ॥3॥
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम् ।
आजानुभुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणम् ॥4॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम् ।
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनम् ॥5॥
निष्कर्ष: राम कृपा का अनमोल आधार
राम नवमी 2024 का यह पावन पर्व हमें भगवान श्री राम के आदर्शों और उनकी कृपालुता को स्मरण करने का अवसर देता है। ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि प्रभु राम के दिव्य प्रेम और उनकी असीम शक्ति का स्रोत है। यह हमें यह सिखाता है कि किस प्रकार भक्ति और समर्पण के मार्ग पर चलकर ‘राम कृपा’ प्राप्त की जा सकती है।
इस भजन का नियमित जाप, विशेषकर राम नवमी के अवसर पर, हमारे मन को शुद्ध करता है, आत्मा को बल प्रदान करता है और हमें जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति देता है। यह हमें धर्म, धैर्य, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
तो, इस राम नवमी पर अपने हृदय के द्वार खोलिए और भगवान श्री राम को उसमें निवास करने दीजिए। ‘श्री राम चंद्र कृपालु भज मन’ का श्रद्धापूर्वक गायन कर अपने जीवन को धन्य करें और प्रभु राम की असीम कृपा के पात्र बनें।
जय श्री राम! जय हनुमान!

