महाशिवरात्रि व्रत कथा और इसका आध्यात्मिक महत्व: भगवान शिव की असीम कृपा पाएं

महाशिवरात्रि व्रत कथा और इसका आध्यात्मिक महत्व: भगवान शिव की असीम कृपा पाएं


**महाशिवरात्रि व्रत कथा और इसका आध्यात्मिक महत्व: भगवान शिव की असीम कृपा पाएं**

**परिचय**

ॐ नमः शिवाय! हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का महापर्व, महाशिवरात्रि, अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह वह पावन रात्रि है जब भगवान शिव “तांडव” करते हैं – सृष्टि के निर्माण, संरक्षण और विनाश का दिव्य नृत्य। ऐसी मान्यता है कि इस रात्रि को ही भगवान शिव ‘लिंग’ रूप में प्रकट हुए थे, और यह रात्रि अंधकार तथा अज्ञानता पर विजय का प्रतीक है। शिव भक्त इस दिन उपवास रखकर, पूजा-अर्चना कर, और रात्रि जागरण कर महादेव की कृपा प्राप्त करते हैं। आइए, इस विशेष पर्व से जुड़ी एक प्रचलित व्रत कथा और इसके गहरे आध्यात्मिक महत्व को जानें।

**महाशिवरात्रि की पौराणिक व्रत कथा**

महाशिवरात्रि से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं, जिनमें से एक अत्यंत प्रसिद्ध कथा एक शिकारी (लुब्धक) की है, जिसने अनजाने में ही सही, भगवान शिव को प्रसन्न कर दिया था।

प्राचीन काल में एक जंगल में एक निर्दयी शिकारी रहता था, जिसका नाम लुब्धक था। वह अपने परिवार का पालन-पोषण शिकार करके करता था। एक बार महाशिवरात्रि के दिन वह शिकार की तलाश में जंगल में भटक रहा था। दिन भर भटकने के बाद भी उसे कोई शिकार नहीं मिला और उसे भूख-प्यास भी सताने लगी। रात हो चली थी, और वह एक बेलपत्र के पेड़ पर चढ़ गया ताकि रात सुरक्षित गुजारी जा सके और सुबह शिकार मिल सके।

शिकारी को ज्ञात नहीं था कि वह जिस पेड़ पर चढ़ा है, वह बेलपत्र का वृक्ष है। पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थापित था, जो पत्तों और झाड़ियों से ढका हुआ था। शिकारी जब पेड़ पर चढ़ा, तो टहनियाँ साफ करने के लिए वह पत्तियाँ तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता रहा। संयोगवश, वे पत्तियाँ सीधे शिवलिंग पर गिरती रहीं। अनजाने में ही सही, शिकारी ने शिव पूजा की पहली शर्त पूरी कर ली थी – बेलपत्र अर्पित करना।

भूख और प्यास से व्याकुल शिकारी ने रात भर जागकर बिताई। इस प्रकार, अनजाने में ही उसका रात्रि जागरण भी हो गया और उसे लगा कि उसने उपवास भी कर लिया है। बेलपत्र तोड़ते समय उसकी कुछ बूँदें पानी की टपककर शिवलिंग पर गिरीं, जो शिव अभिषेक के समान थी। इस प्रकार, अनजाने में ही उस शिकारी ने महाशिवरात्रि के दिन उपवास, रात्रि जागरण और बेलपत्र व जल से भगवान शिव का अभिषेक कर लिया।

रात्रि के अंतिम प्रहर में एक गर्भवती हिरणी तालाब से पानी पीने आई। शिकारी ने जैसे ही धनुष उठाया, हिरणी ने उससे विनती की, “हे शिकारी! मैं गर्भवती हूँ। मेरे बच्चे को जन्म देने के बाद मैं स्वयं तुम्हारे पास आ जाऊँगी। कृपया मुझे जाने दो।” शिकारी को उस पर दया आ गई और उसने उसे जाने दिया।

कुछ समय बाद एक और हिरणी उधर से गुजरी। शिकारी ने उसे मारने का विचार किया, लेकिन उस हिरणी ने भी अपने बच्चों को उनके पिता को सौंपकर वापस आने का वादा किया। शिकारी ने उसे भी छोड़ दिया।

फिर एक और हिरणी अपने बच्चों के साथ वहाँ आई। उसने भी शिकारी से यही याचना की। शिकारी ने उसे भी जाने दिया।

जब पौ फटने वाली थी, तब पहली हिरणी अपने बच्चों सहित वापस आई। उसके साथ बाकी दोनों हिरणियाँ भी थीं, जो अपने वचन को पूरा करने आई थीं। शिकारी उनकी सत्यनिष्ठा से अत्यंत प्रभावित हुआ। तभी भगवान शिव, उस बेलपत्र के वृक्ष के नीचे से प्रकट हुए और उन्होंने शिकारी को उसके अनजाने में किए गए व्रत, जागरण और पूजा के कारण सभी पापों से मुक्त कर दिया। भगवान शिव ने उसे आशीर्वाद दिया कि आज से वह मोक्ष प्राप्त करेगा और उसका नाम “गुह” (निषादराज गुह) के रूप में प्रसिद्ध होगा, जो भगवान राम के परम भक्त बनेंगे।

इस प्रकार, अनजाने में किए गए शिवरात्रि के व्रत ने भी शिकारी को मोक्ष दिला दिया। यह कथा इस बात का प्रमाण है कि भगवान शिव केवल श्रद्धा और भक्ति के भूखे हैं, और वे अपने भक्तों पर सहज ही कृपा बरसाते हैं।

**महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व**

महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और आत्म-शुद्धि का एक शक्तिशाली अवसर है।

1. **शिव-पार्वती मिलन:** यह दिन शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है, जो सृष्टि में पुरुष और प्रकृति के संतुलन को दर्शाता है। यह आत्मा और परमात्मा के एकीकरण की ओर भी संकेत करता है।
2. **अंधकार पर प्रकाश की विजय:** महाशिवरात्रि को ‘अंधकार की महान रात्रि’ भी कहा जाता है, जहाँ भक्त अपने भीतर के अंधकार (अज्ञान, अहंकार, क्रोध) पर विजय पाने का प्रयास करते हैं और आध्यात्मिक प्रकाश की ओर बढ़ते हैं।
3. **पापों का नाश और मोक्ष:** सच्चे मन से व्रत, पूजा और जागरण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को उनके पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
4. **मनोकामना पूर्ति:** अविवाहित कन्याएं उत्तम वर की प्राप्ति के लिए, और विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत को करती हैं।
5. **स्वास्थ्य और समृद्धि:** माना जाता है कि शिवरात्रि का व्रत रखने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, और घर में सुख-समृद्धि आती है।

**निष्कर्ष**

महाशिवरात्रि का पावन पर्व हमें भगवान शिव की अपार महिमा और उनकी करुणा का स्मरण कराता है। यह हमें यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से किया गया कोई भी कार्य, भले ही वह अनजाने में ही क्यों न हो, भगवान की कृपा का पात्र बनता है। तो आइए, इस महाशिवरात्रि पर हम सभी अपने मन को शुद्ध कर, महादेव का स्मरण करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य करें।

ॐ नमः शिवाय!

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