दीपावली: अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला महापर्व
दीपावली, जिसे दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक त्योहारों में से एक है। यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की, और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पाँच दिवसीय पर्व न केवल हमारे घरों को जगमगाता है, बल्कि हमारे हृदयों में भी नई आशा, उत्साह और समृद्धि का संचार करता है।
दीपावली का आध्यात्मिक महत्व और पौराणिक कथाएँ
दीपावली कई पौराणिक कथाओं और गहन आध्यात्मिक संदेशों से जुड़ी है। इसके हर दिन का अपना एक विशेष महत्व और कहानी है:
- भगवान राम की अयोध्या वापसी: दीपावली का सबसे प्रमुख कारण भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जी के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी है। अयोध्या वासियों ने घी के दीपक जलाकर उनका भव्य स्वागत किया था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। यह धर्म की स्थापना और न्याय की विजय का प्रतीक है।
- माँ लक्ष्मी का प्राकट्य: मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के दिन ही धन और ऐश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुई थीं। यही कारण है कि इस दिन माँ लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है ताकि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।
- भगवान कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध: नरक चतुर्दशी (दिवाली से एक दिन पहले) के दिन भगवान कृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध कर सोलह हज़ार कन्याओं को उसकी कैद से मुक्त कराया था। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- वामन अवतार और राजा बलि: कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इसी दिन वामन अवतार लेकर राजा बलि को पाताल लोक का राजा बनाया था और उनके दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया था।
पंच दिवसीय दीपावली का उत्सव
दीपावली का पर्व एक दिन का नहीं, बल्कि पाँच दिनों का महापर्व है, जिसमें हर दिन का अपना एक अनूठा महत्व है:
- धनतेरस: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाने वाला यह दिन धन के देवता कुबेर, माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। इस दिन सोना, चाँदी या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह दिन रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन यमराज की पूजा और दीपक जलाकर अकाल मृत्यु से बचने की प्रार्थना की जाती है।
- दीपावली (लक्ष्मी पूजा): कार्तिक अमावस्या को मुख्य दीपावली मनाई जाती है। इस दिन माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा अर्चना की जाती है, ताकि घर में धन, वैभव और सुख-शांति का वास हो।
- गोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की याद में यह पूजा की जाती है। इस दिन अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।
- भाई दूज: कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का यह त्योहार मनाया जाता है, जिसमें बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और कल्याण की कामना करती हैं।
कैसे मनाएँ शुभ दीपावली: विधि और परंपराएँ
दीपावली की तैयारी घरों की साफ़-सफ़ाई और सजावट से शुरू होती है। यह माना जाता है कि माँ लक्ष्मी केवल स्वच्छ और सुसज्जित घरों में ही निवास करती हैं।
- घरों की सजावट: रंगोली, तोरण, दीये, मोमबत्तियाँ और बिजली की लड़ियों से घरों को रोशन किया जाता है।
- लक्ष्मी-गणेश पूजा: शाम के समय शुभ मुहूर्त में माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। उन्हें नए वस्त्र, फूल, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं।
- दीप प्रज्वलन: घर के हर कोने में तेल के दीये जलाए जाते हैं, जो अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाने का संदेश देते हैं।
- प्रसाद वितरण: पूजा के बाद परिवार और मित्रों के बीच मिठाई और उपहार बांटे जाते हैं।
- आतिशबाजी: हालांकि आजकल पर्यावरण के प्रति जागरूकता के कारण सीमित आतिशबाजी का चलन बढ़ रहा है, फिर भी यह उत्सव का एक अभिन्न अंग रहा है।
दीपावली का संदेश: आंतरिक प्रकाश और शुद्धता
दीपावली सिर्फ बाहरी चमक-दमक का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमें अपने भीतर के अंधकार को दूर करने और आत्मिक प्रकाश को प्रज्वलित करने का संदेश भी देता है। यह हमें सिखाता है कि हमें बुराइयों का त्याग कर सद्गुणों को अपनाना चाहिए, दूसरों के प्रति प्रेम और करुणा का भाव रखना चाहिए, और हमेशा सत्य तथा धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। दीपावली हमें यह याद दिलाती है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियाँ क्यों न हों, आशा और विश्वास की एक छोटी सी लौ भी बड़े से बड़े अंधकार को दूर कर सकती है।
शुभ दीपावली!
यह महापर्व आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और अनंत खुशियाँ लाए। आइए, इस दीपावली पर हम सभी मिलकर न केवल अपने घरों को रोशन करें, बल्कि अपने दिलों में भी प्रेम, दया और ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ।

