नमस्ते आध्यात्मिक मित्रों और पाठकों!
आज हम उस दिव्य ध्वनि की बात करेंगे जो केवल भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में अपनी पहचान बनाए हुए है – ‘ॐ’। यह मात्र एक शब्द नहीं, बल्कि सृष्टि के जन्म से जुड़ा एक अनादि और सर्वव्यापी कंपन है। हिंदू धर्म में इसे सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है, जो ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसकी सततता का प्रतीक है। आइए, इस शक्तिशाली ध्वनि के गहरे अर्थ, इसके आध्यात्मिक महत्व और हमारे जीवन पर इसके सकारात्मक प्रभावों को विस्तार से समझते हैं।
**ॐ क्या है? ब्रह्मांड का आदि स्वर**
सनातन धर्म में ‘ॐ’ को प्रणव मंत्र के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है ‘वह जो जीवन को पार कराता है’। यह ध्वनि तीनों गुणों – सत, रज, तम – और तीनों देवताओं – ब्रह्मा (सृष्टि), विष्णु (स्थिति), महेश (संहार) – का प्रतिनिधित्व करती है। ‘ॐ’ तीन अक्षरों से मिलकर बना है: ‘अ’, ‘उ’, और ‘म’।
* **’अ’ (A):** यह जागृत अवस्था (जागरूकता), सृष्टि की शुरुआत और ब्रह्मा का प्रतीक है। यह ध्वनि पेट के निचले हिस्से से उत्पन्न होती है।
* **’उ’ (U):** यह स्वप्न अवस्था, स्थिति (रखरखाव) और विष्णु का प्रतीक है। यह ध्वनि गले और छाती में गूंजती है।
* **’म’ (M):** यह सुषुप्ति अवस्था (गहरी नींद), संहार (विघटन) और शिव का प्रतीक है। यह ध्वनि होंठों के बंद होने से उत्पन्न होती है और सिर के ऊपरी हिस्से तक पहुँचती है।
इन तीनों के बाद एक चौथा पहलू भी है, जिसे ‘अनाहत नाद’ या ‘तुरीय अवस्था’ कहा जाता है – यह वह मौन है जो ॐ जाप के बाद महसूस होता है। यह परम चेतना की स्थिति है, जो तीनों अवस्थाओं से परे है।
**ॐ का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व**
ॐ का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है। जब हम ॐ का उच्चारण करते हैं, तो शरीर में एक विशेष कंपन उत्पन्न होता है, जो मन और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालता है।
1. **ध्यान और योग में आधार:** ॐ का जाप ध्यान और योग का एक अभिन्न अंग है। यह मन को शांत करने, एकाग्रता बढ़ाने और आंतरिक शांति प्राप्त करने में मदद करता है। योगियों का मानना है कि ॐ के नियमित जाप से शरीर के चक्रों (ऊर्जा केंद्रों) को सक्रिय किया जा सकता है।
2. **मानसिक स्पष्टता और शांति:** ॐ का कंपन दिमाग को शांत करता है, तनाव और चिंता को कम करता है। यह मस्तिष्क की तरंगों को अल्फा और थीटा अवस्था में लाने में सहायक है, जो गहन विश्राम और अंतर्दृष्टि से जुड़ी हैं।
3. **सकारात्मक ऊर्जा:** ॐ का जाप आसपास के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर देता है। यह नकारात्मक विचारों और भावनाओं को दूर कर एक शुद्ध और शांतिपूर्ण माहौल बनाता है।
**नियमित ॐ जाप के अद्भुत लाभ**
ॐ का नियमित जाप हमें अनगिनत लाभ प्रदान कर सकता है, जो हमारे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं:
* **तनाव और चिंता मुक्ति:** ॐ का धीमा और लयबद्ध उच्चारण मन को शांत करता है और तनाव हार्मोन को कम करने में मदद करता है।
* **बेहतर एकाग्रता:** नियमित जाप से मन अधिक स्थिर और केंद्रित होता है, जिससे एकाग्रता शक्ति बढ़ती है।
* **स्वस्थ श्वसन:** ॐ का जाप गहरी सांस लेने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और श्वसन संबंधी समस्याएं कम होती हैं।
* **रक्तचाप नियंत्रण:** इसके शांत प्रभाव के कारण यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।
* **आत्म-जागरूकता और आत्म-बोध:** ॐ की ध्वनि के साथ जुड़ने से हम अपनी आंतरिक आत्मा से जुड़ते हैं, जिससे आत्म-जागरूकता और आत्म-बोध की दिशा में प्रगति होती है।
* **सकारात्मक दृष्टिकोण:** यह हमारे अंदर सकारात्मकता और आशावाद की भावना को बढ़ावा देता है।
**ॐ का सही उच्चारण और अभ्यास**
ॐ का जाप किसी भी समय, कहीं भी किया जा सकता है, लेकिन सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है।
1. **शांत स्थान:** एक शांत और आरामदायक जगह चुनें जहाँ आपको कोई परेशान न करे।
2. **आसन:** पद्मासन या सुखासन में आरामदायक स्थिति में बैठें, रीढ़ सीधी रखें।
3. **गहरी सांस:** गहरी सांस अंदर लें और सांस छोड़ते हुए ‘अ’, ‘उ’, ‘म’ का उच्चारण करें। ‘अ’ की ध्वनि पेट से, ‘उ’ की गले से और ‘म’ की होंठ बंद कर नासिका से आनी चाहिए। ‘म’ की ध्वनि को लंबा खींचें और कंपन को महसूस करें।
4. **मौन अनुभव:** जाप के बाद कुछ क्षणों के लिए मौन रहें और ॐ के कंपन को अपने अंदर महसूस करें। यह तुरीय अवस्था का अनुभव है।
**निष्कर्ष**
ॐ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है। यह हमें सृष्टि के साथ अपने जुड़ाव को समझने, आंतरिक शांति प्राप्त करने और आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है। अपने दैनिक जीवन में ॐ के जाप को शामिल करके आप न केवल तनाव और चिंता से मुक्ति पा सकते हैं, बल्कि एक गहरे आध्यात्मिक अनुभव और असीम शांति की ओर भी बढ़ सकते हैं। तो, आइए आज से ही इस अनादि ध्वनि के साथ जुड़कर अपने जीवन को और अधिक सार्थक बनाएं।
ॐ शांति शांति शांतिः!

