ॐ (ओम्): ब्रह्मांड की आदि ध्वनि और उसके अद्भुत आध्यात्मिक व वैज्ञानिक लाभ
सनातन धर्म में ‘ॐ’ केवल एक अक्षर नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का आदिनाद है – वह पवित्र ध्वनि जिससे ब्रह्मांड का उद्भव हुआ। इसे ‘प्रणव’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘जो जीवन शक्ति से भरा हो’ या ‘जो शाश्वत हो’। ‘ॐ’ तीनों देवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) का प्रतीक है। यह सिर्फ एक ध्वनि नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक पुंज है जो हमारे भीतर और बाहर शांति, संतुलन और आध्यात्मिक जागृति ला सकता है। आइए, इस महामंत्र के गहरे अर्थ और उसके अद्भुत लाभों को जानें।
‘ॐ’ का सनातन धर्म में महत्व
उपनिषदों और वेदों में ‘ॐ’ को सर्वोच्च सत्य, ब्रह्म और आत्मा का प्रतीक बताया गया है। मांडूक्य उपनिषद विशेष रूप से ‘ॐ’ की व्याख्या करता है, इसे चार अवस्थाओं (जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय) से जोड़ता है, जो चेतना के विभिन्न स्तरों का प्रतिनिधित्व करती हैं। ‘ॐ’ की तीनों ध्वनियाँ – ‘अ’, ‘उ’, ‘म’ – सृष्टि के तीन पहलुओं को दर्शाती हैं:
- अ (अकार): यह जाग्रत अवस्था और सृष्टि के देवता ब्रह्मा का प्रतीक है। यह शुरुआत और उत्पत्ति का द्योतक है।
- उ (उकार): यह स्वप्न अवस्था और पालनहार विष्णु का प्रतीक है। यह निरंतरता और विकास को दर्शाता है।
- म (मकार): यह सुषुप्ति अवस्था और संहारक शिव का प्रतीक है। यह समाप्ति और विलय का सूचक है।
- शांत विराम (अमात्रा): तीनों ध्वनियों के बाद की मौन अवस्था तुरीय या चेतन अवस्था है, जो सभी अवस्थाओं से परे सर्वोच्च चेतना का प्रतीक है। यह उस परम शक्ति का अनुभव कराती है जो सब कुछ समाहित किए हुए है।
इस प्रकार, ‘ॐ’ न केवल सृष्टि के चक्र को दर्शाता है, बल्कि मनुष्य की चेतना के सभी पहलुओं को भी समेटे हुए है।
‘ॐ’ जाप के अद्भुत लाभ
‘ॐ’ का नियमित जाप, जिसे ‘ओम् चांटिंग’ भी कहते हैं, शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर अनेक लाभ प्रदान करता है:
1. मानसिक शांति और तनाव मुक्ति
‘ॐ’ का जाप करते समय निकलने वाली कंपन ध्वनियाँ मन को शांत करती हैं और मस्तिष्क की कोशिकाओं को आराम देती हैं। यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक है, जिससे मन में सकारात्मकता और शांति का अनुभव होता है।
2. एकाग्रता और स्मृति में वृद्धि
नियमित जाप से मन भटकना कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यह विद्यार्थियों और उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है जिन्हें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। इससे निर्णय लेने की क्षमता में भी सुधार आता है।
3. बेहतर स्वास्थ्य
- श्वसन प्रणाली: ‘ॐ’ का जाप गहरी साँस लेने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और श्वसन संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है।
- रक्त संचार: यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है और रक्तचाप को सामान्य रखने में मदद करता है।
- पेट और पाचन: ‘ॐ’ के कंपन से पेट के अंदरूनी अंगों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे पाचन क्रिया सुधर सकती है।
- रीढ़ की हड्डी: जाप के दौरान उत्पन्न कंपन रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
4. आध्यात्मिक जागृति
‘ॐ’ का जाप हमें अपनी आंतरिक आत्मा से जोड़ता है। यह आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाता है, ध्यान की गहराई में ले जाता है और परम सत्य के अनुभव का मार्ग प्रशस्त करता है। यह हमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने और स्वयं को जानने में मदद करता है।
‘ॐ’ का जाप कैसे करें?
‘ॐ’ का जाप करना बहुत सरल है, लेकिन सही तरीके से करने पर इसके लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं:
- एक शांत और स्वच्छ स्थान चुनें।
- सुखासन या किसी भी आरामदायक ध्यान मुद्रा में बैठें। अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
- अपनी आँखें धीरे से बंद करें और कुछ गहरी साँसें लें।
- साँस अंदर लेते समय ‘ओ’ ध्वनि पर ध्यान केंद्रित करें और साँस छोड़ते समय ‘म्’ ध्वनि का उच्चारण करें।
- ‘ओ’ ध्वनि लंबी और गहरी होनी चाहिए, जो नाभि से निकलकर कंठ तक आए। ‘म्’ ध्वनि होठों को धीरे से बंद करके गुंजन के रूप में होनी चाहिए, जो सिर के ऊपरी हिस्से में कंपन महसूस कराए।
- यह जाप 5 से 10 मिनट तक या अपनी इच्छानुसार कर सकते हैं।
निष्कर्ष
‘ॐ’ सिर्फ एक ध्वनि नहीं, बल्कि जीवन का सार है। यह हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है, शांति प्रदान करता है और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायता करता है। अपने दैनिक जीवन में ‘ॐ’ को अपनाकर आप न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार ला सकते हैं, बल्कि अपने जीवन को एक नई सकारात्मक दिशा भी दे सकते हैं। तो, आइए आज से ही इस पवित्र ध्वनि की शक्ति का अनुभव करें और अपने जीवन को दिव्य ऊर्जा से भर दें।

