हनुमान जयंती: भक्ति, शक्ति और सेवा का महापर्व

हनुमान जयंती: भक्ति, शक्ति और सेवा का महापर्व

परिचय: भक्ति, शक्ति और समर्पण का प्रतीक

हिंदू धर्म में मनाए जाने वाले असंख्य पर्वों में से एक ‘हनुमान जयंती’ का विशेष स्थान है। यह पावन पर्व चैत्र मास की पूर्णिमा को भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में पूरे भारतवर्ष और विश्वभर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। भगवान हनुमान, जिन्हें बजरंगबली, पवनपुत्र, अंजनीपुत्र और संकटमोचन जैसे अनेक नामों से जाना जाता है, वे भगवान राम के परम भक्त, बल, बुद्धि और विद्या के दाता हैं। उनका जीवन हमें अदम्य साहस, निस्वार्थ सेवा और अटूट भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है। हनुमान जयंती का दिन हमें उनके दिव्य गुणों को स्मरण करने और अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।

हनुमान जी की अलौकिक जन्म कथा

हनुमान जी के जन्म की कथा बड़ी ही रोचक और प्रेरक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने भगवान राम की सेवा करने के लिए वानर रूप में जन्म लेने का संकल्प लिया था। माता अंजना और पिता केसरी की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, पवनदेव ने स्वयं शिव के अंश को अंजना के गर्भ में स्थापित किया, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ। इसी कारण उन्हें ‘पवनपुत्र’ के नाम से भी जाना जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, जब राजा दशरथ यज्ञ कर रहे थे और उन्हें खीर प्राप्त हुई, तो एक कौवा उस खीर का एक अंश लेकर उड़ गया। यह अंश माता अंजना के हाथ में गिरा, जिसे ग्रहण करने से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। इस प्रकार, हनुमान जी को भगवान शिव का एकादश रुद्रावतार माना जाता है, जो भगवान राम की सहायता और धर्म की स्थापना के लिए इस धरा पर अवतरित हुए। उनके जन्म का उद्देश्य ही भगवान विष्णु के सातवें अवतार, प्रभु श्री राम की सेवा करना था।

अद्भुत गुण: बल, बुद्धि और भक्ति का संगम

भगवान हनुमान के व्यक्तित्व में कई अद्भुत गुण समाहित हैं, जो उन्हें अद्वितीय बनाते हैं:

  1. अतुल्य बल और पराक्रम: हनुमान जी अपने अपार बल के लिए जाने जाते हैं। लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना, लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था से बचाना और समुद्र लांघना – ये सभी उनके पराक्रम के प्रमाण हैं।
  2. तीक्ष्ण बुद्धि और ज्ञान: वे केवल बलशाली ही नहीं, बल्कि अत्यंत बुद्धिमान और ज्ञानी भी हैं। वे व्याकरण, ज्योतिष और विभिन्न शास्त्रों के ज्ञाता थे। उनकी वाक्पटुता और विवेक ने कई बार भगवान राम के कार्यों को सफल बनाया।
  3. परम भक्ति और सेवा: हनुमान जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी भगवान राम के प्रति अटूट और निस्वार्थ भक्ति है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान राम की सेवा में समर्पित कर दिया। उनकी भक्ति को ‘दास्य भक्ति’ का सर्वोत्तम उदाहरण माना जाता है।
  4. संकटमोचक: जो कोई भी सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करता है, वे उसके सभी संकट हर लेते हैं। यही कारण है कि उन्हें ‘संकटमोचन’ कहा जाता है। हनुमान चालीसा का पाठ भक्तों को भय और बाधाओं से मुक्ति दिलाता है।

हनुमान जयंती का महत्व और पूजा विधि

हनुमान जयंती के दिन भक्तगण विधि-विधान से भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन व्रत रखने का भी विधान है। पूजा में सिंदूर, लाल वस्त्र, गेंदे के फूल, चमेली का तेल और बूंदी के लड्डू या गुड़-चना का भोग विशेष रूप से अर्पित किया जाता है।

  • हनुमान चालीसा का पाठ: इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मन को शांति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
  • सुंदरकांड का पाठ: रामचरितमानस के सुंदरकांड का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • राम नाम का जाप: हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल तरीका भगवान राम के नाम का जाप करना है, क्योंकि वे राम नाम के परम भक्त हैं।
  • दान-पुण्य: इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

निष्कर्ष: प्रेरणा का स्रोत भगवान हनुमान

हनुमान जयंती केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि अपने आप में एक प्रेरणास्रोत है। यह हमें सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा, अटूट भक्ति और अदम्य साहस से जीवन की हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। भगवान हनुमान हमें अपनी शक्ति और क्षमता पर विश्वास रखने, अहंकार से दूर रहने और सदैव धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश देते हैं। आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी बजरंगबली के गुणों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें और एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ें। जय श्री राम, जय हनुमान!

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