108 नामावली क्यों महत्वपूर्ण है – भक्ति में लाभ
**प्रस्तावना**
सनातन धर्म में नाम जप का विशेष महत्व बताया गया है। ईश्वर के अनगिनत रूप हैं और प्रत्येक रूप से जुड़े अनेक नाम भी हैं। इन नामों में ही उनकी संपूर्ण शक्ति और कृपा समाहित होती है। जब हम किसी देवी या देवता के 108 नामों की माला पिरोकर उनका जाप करते हैं, जिसे नामावली कहते हैं, तो यह केवल शब्दों का उच्चारण नहीं होता, बल्कि यह अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली माध्यम बन जाता है। यह 108 नाम केवल संख्या नहीं हैं, अपितु ये ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं और आध्यात्मिक स्पंदनों का प्रतीक हैं। यह अंक ज्योतिष में भी पूर्णता और दिव्यता का प्रतीक माना जाता है। 108 नामावली का जाप हमें अपने आराध्य से एकाकार होने का अवसर प्रदान करता है, जिससे मन में शांति, चित्त में स्थिरता और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। विशेषकर, पवनपुत्र हनुमान जी की 108 नामावली का जाप भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान है, जो उनकी हर मनोकामना को पूर्ण करने में सहायक होता है और समस्त दुखों तथा बाधाओं का नाश करता है। यह जाप भक्तों को हनुमान जी की असीम शक्ति और आशीर्वाद से जोड़ता है, जिससे जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है।
**पावन कथा**
प्राचीन काल की बात है। एक छोटे से गाँव में रामदास नामक एक अत्यंत सीधा-साधा और भक्त हृदय का व्यक्ति रहता था। रामदास का जीवन भगवान राम और उनके परम भक्त हनुमान जी की सेवा में समर्पित था। वह नित्य हनुमान जी के मंदिर में जाता, आरती करता और चौपाइयों का पाठ करता था। उसका जीवन सादगीपूर्ण था, लेकिन उसके मन में भक्ति की अखंड ज्योति जलती रहती थी।
एक बार गाँव पर भीषण संकट आ गया। कई वर्षों से वर्षा नहीं हुई थी, जिसके कारण खेत सूख गए, फसलें नष्ट हो गईं और गाँव में अन्न का एक दाना भी नहीं बचा। लोग भूख और प्यास से व्याकुल होने लगे। चारों ओर हाहाकार मच गया। गाँव के मुखिया ने कई प्रकार के यज्ञ और अनुष्ठान करवाए, पर कोई लाभ नहीं हुआ। निराशा का घना अंधेरा पूरे गाँव पर छा गया।
रामदास यह सब देखकर बहुत दुखी था। उसे लगा कि अब केवल हनुमान जी ही इस संकट से उबार सकते हैं। एक रात, हनुमान मंदिर में बैठकर वह गहन चिंतन में लीन था। तभी उसे अपने गुरुदेव द्वारा बताई गई 108 नामावली की महिमा याद आई। गुरुदेव ने कहा था कि जो भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से हनुमान जी के 108 नामों का जाप करता है, उस पर संकटमोचन हनुमान जी की विशेष कृपा होती है और वे सभी बाधाओं को हर लेते हैं।
रामदास ने अगले दिन से ही संकल्प लिया कि जब तक वर्षा नहीं होगी, वह नित्य हनुमान जी के 108 नामों का जाप करेगा। उसने एक छोटी सी कुटिया बनाई, जिसमें हनुमान जी की एक छोटी प्रतिमा स्थापित की और वहीं बैठकर जाप प्रारंभ कर दिया। गाँव के लोग उसे देखकर हँसते थे, कुछ लोग उसे पागल भी कहने लगे, क्योंकि गाँव में खाने को अन्न नहीं था और रामदास केवल जाप कर रहा था। उसके परिवार वाले भी चिंतित थे, पर रामदास अपने संकल्प पर अटल था।
वह प्रातःकाल उठकर स्नान करता, शुद्ध वस्त्र धारण करता और मंदिर आकर धूप-दीप प्रज्वलित कर जाप में लीन हो जाता। पहले दिन तो जाप करना आसान लगा, पर दूसरे दिन से भूख और प्यास उसे सताने लगी। शरीर शिथिल पड़ने लगा, पर मन में हनुमान जी के प्रति अगाध श्रद्धा ने उसे टूटने नहीं दिया। वह हर नाम का उच्चारण अत्यंत प्रेम और भक्ति भाव से करता। “ॐ हनुमते नमः”, “ॐ अंजनेयाय नमः”, “ॐ वायुपुत्राय नमः” जैसे प्रत्येक नाम का जाप करते हुए वह हनुमान जी के उस विशिष्ट गुण का ध्यान करता। उसकी आँखों से अश्रुधारा बहने लगी, जैसे वह हर नाम के साथ अपने प्रभु को हृदय से पुकार रहा हो।
कई दिन बीत गए। रामदास का शरीर अत्यंत दुर्बल हो गया था, पर उसके चेहरे पर एक अलौकिक तेज था। गाँव के लोग अब उसे गंभीरता से देखने लगे थे। नौवें दिन, जब वह लगातार जाप कर रहा था, तो अचानक आकाश में काले बादल घिर आए। पहले तो लोगों को विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि इतने दिनों से सूरज आग उगल रहा था। पर धीरे-धीरे बादलों की गड़गड़ाहट तेज हुई और देखते ही देखते मूसलाधार वर्षा होने लगी। सूखी धरती प्यासी थी, उसने खूब पानी पिया। खेतों को जीवन मिला और लोगों के चेहरों पर खुशी लौट आई।
गाँव के सभी लोग दौड़कर रामदास की कुटिया पर आए। उन्होंने देखा कि रामदास अभी भी आँखें बंद किए, पूरी तरह से हनुमान जी की भक्ति में लीन होकर जाप कर रहा था। उसके चेहरे पर एक दिव्य मुस्कान थी। जब उसने आँखें खोलीं, तो गाँव वालों ने उसे प्रणाम किया। सभी को समझ आ गया कि रामदास की सच्ची भक्ति और हनुमान जी के 108 नामों के जाप की शक्ति से ही यह चमत्कार संभव हुआ है। उस दिन से रामदास की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई और गाँव के सभी लोग हनुमान जी के 108 नामों की महिमा को समझकर उनका जाप करने लगे। यह नामावली उनके लिए जीवनदायिनी सिद्ध हुई।
**दोहा**
श्री हनुमत के एक सौ आठ नाम हैं अति पावन।
जो श्रद्धा से सुमिरै, मिटै सकल मन रावन॥
**चौपाई**
राम नाम रस में जो रंगे, हनुमत नाम जपे अनवरंगे।
अष्टोत्तर शत नाम की माला, दूर करे हर भय की ज्वाला॥
आदि अनादि प्रभु बलवान, जिनके नाम में सकल कल्याण।
हरि भक्ति का यह आधार, जीवन हो जाता भव पार॥
**पाठ करने की विधि**
108 नामावली का पाठ करने की विधि अत्यंत सरल और हृदय से जुड़ी हुई है। सर्वप्रथम, प्रातःकाल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र धारण करें। इसके बाद, एक शांत और स्वच्छ स्थान का चयन करें जहाँ आप एकाग्रचित्त होकर बैठ सकें। हनुमान जी की एक प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। धूप, दीप और पुष्प अर्पित करके हनुमान जी का ध्यान करें।
जाप प्रारंभ करने से पहले, मन में हनुमान जी के प्रति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास रखें। आप एक रुद्राक्ष या तुलसी की माला का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें 108 मनके होते हैं। यदि माला उपलब्ध न हो, तो भी आप मन ही मन या मुख से नामों का उच्चारण कर सकते हैं।
प्रत्येक नाम का स्पष्ट और प्रेमपूर्वक उच्चारण करें। जैसे “ॐ हनुमते नमः”, “ॐ अंजनेयाय नमः” इत्यादि। प्रत्येक नाम के साथ, आप हनुमान जी के उस विशिष्ट रूप या गुण का स्मरण कर सकते हैं, जो उस नाम से जुड़ा है। उदाहरण के लिए, “वायुपुत्राय नमः” कहते समय आप उनके वायुपुत्र होने का, उनकी गति और शक्ति का स्मरण कर सकते हैं।
जाप करते समय मन को शांत रखें और सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। किसी भी बाहरी विचार या विकर्षण को मन में आने न दें। यह जाप किसी विशेष समय तक या निश्चित संख्या में किया जा सकता है, पर सबसे महत्वपूर्ण है आपकी भक्ति और एकाग्रता। जाप के अंत में, हनुमान जी से अपनी प्रार्थना करें और उनकी कृपा के लिए धन्यवाद ज्ञापित करें।
**पाठ के लाभ**
108 नामावली का पाठ करने से साधक को अनेक प्रकार के आध्यात्मिक, मानसिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं:
1. **मानसिक शांति और स्थिरता**: नामों का जाप करने से मन शांत होता है, चिंताएँ दूर होती हैं और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह मन को एकाग्र करने में सहायता करता है।
2. **नकारात्मक ऊर्जा का नाश**: हनुमान जी की नामावली का जाप करने से घर और आस-पास की नकारात्मक ऊर्जाएँ समाप्त होती हैं। बुरी शक्तियों और भूत-प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
3. **रोगों से मुक्ति**: यह जाप शारीरिक और मानसिक रोगों से राहत दिलाने में सहायक होता है। स्वास्थ्य में सुधार होता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
4. **भय और चिंता से राहत**: हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनके नामों का जाप करने से सभी प्रकार के भय, अनिश्चितता और असुरक्षा की भावना समाप्त होती है। आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
5. **आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि**: हनुमान जी स्वयं बल, बुद्धि और विद्या के दाता हैं। उनके नामों का जाप करने से व्यक्ति में साहस, पराक्रम और आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे वह किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम होता है।
6. **बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति**: यह जाप बुद्धि को तीक्ष्ण करता है, ज्ञान में वृद्धि करता है और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है। छात्रों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी है।
7. **आध्यात्मिक उन्नति**: नामावली का नियमित जाप व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाता है। यह मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है और परमात्मा से गहरा संबंध स्थापित करने में मदद करता है।
8. **हनुमान जी की विशेष कृपा**: जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी के 108 नामों का जाप करता है, उस पर हनुमान जी की असीम कृपा बरसती है। वे अपने भक्तों के सभी कार्यों को सिद्ध करते हैं।
9. **बाधाओं का निवारण**: जीवन में आने वाली हर छोटी-बड़ी बाधा, कष्ट और संकट हनुमान जी के नाम जाप से दूर हो जाते हैं। यह सुरक्षा कवच का कार्य करता है।
10. **सकारात्मकता का संचार**: जाप करने से पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर जाती है, जिससे जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है।
**नियम और सावधानियाँ**
108 नामावली का पाठ करते समय कुछ नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है ताकि जाप का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:
1. **पवित्रता**: जाप करने से पहले स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। शारीरिक स्वच्छता के साथ-साथ मानसिक पवित्रता भी बनाए रखें। मन में किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या ईर्ष्या न रखें।
2. **सात्विक आहार**: जाप के दिनों में सात्विक भोजन का ही सेवन करें। मांसाहार, मदिरा, लहसुन, प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का त्याग करें।
3. **ब्रह्मचर्य**: यदि संभव हो, तो जाप काल में ब्रह्मचर्य का पालन करें। यह मन को और अधिक एकाग्र करने में सहायक होता है।
4. **स्थान की पवित्रता**: जिस स्थान पर जाप कर रहे हों, वह स्थान स्वच्छ, शांत और पवित्र होना चाहिए।
5. **नियमितता और निरंतरता**: जाप को एक नियम बनाकर प्रतिदिन एक निश्चित समय पर करें। नियमितता से अधिक फल प्राप्त होता है।
6. **श्रद्धा और विश्वास**: सबसे महत्वपूर्ण है सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास। बिना श्रद्धा के कोई भी अनुष्ठान फलदायी नहीं होता।
7. **अनादर से बचें**: किसी भी नाम का उच्चारण जल्दबाजी में या अनादर भाव से न करें। प्रत्येक नाम के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव रखें।
8. **मौन और एकांत**: जाप करते समय अनावश्यक बातों से बचें और पूर्ण एकांत में जाप करें। मोबाइल फोन या अन्य विकर्षणों से दूर रहें।
9. **गुरु का मार्गदर्शन**: यदि संभव हो, तो किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में जाप प्रारंभ करें। गुरु के निर्देशानुसार किया गया जाप अधिक प्रभावी होता है।
10. **दिखावा न करें**: जाप को अपनी भक्ति का प्रदर्शन न बनाएं। यह एक व्यक्तिगत आध्यात्मिक अभ्यास है, जिसे शांत मन से गुप्त रूप से करना चाहिए।
**निष्कर्ष**
108 नामावली का जाप केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह स्वयं को अपने आराध्य देव की दिव्य ऊर्जा से जोड़ने का एक गहन और परिवर्तनकारी आध्यात्मिक मार्ग है। यह हमें सिखाता है कि किस प्रकार श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए छोटे-से-छोटे प्रयास भी जीवन में बड़े से बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। हनुमान जी की 108 नामावली का प्रत्येक नाम एक मंत्र के समान है, जिसमें असीम शक्ति छिपी है। यह हमें भय, निराशा और अंधकार से निकालकर प्रकाश, साहस और आशा की ओर ले जाता है।
इस पवित्र जाप को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर हम न केवल व्यक्तिगत शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने आस-पास के वातावरण को भी सकारात्मक ऊर्जा से भर सकते हैं। तो आइए, आज से ही इस दिव्य नामावली को अपने हृदय में धारण करें और हनुमान जी की असीम कृपा का अनुभव करें। यह आपकी आत्मा को शुद्ध करेगा, मन को स्थिर करेगा और आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और आनंद की ओर अग्रसर करेगा। हनुमान जी की जय हो!

