लक्ष्मी पूजा करने का सही तरीका: क्या करें, क्या न करें
प्रस्तावना
हिंदू धर्म के पावन पर्वों में लक्ष्मी पूजा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह उत्सव विशेषकर दीपावली के शुभ अवसर पर बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। देवी लक्ष्मी को धन, समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। भक्तों का ऐसा दृढ़ विश्वास है कि यदि लक्ष्मी पूजा सही विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ की जाए, तो देवी प्रसन्न होकर अपनी कृपा दृष्टि बरसाती हैं और अपने भक्तों के जीवन को सुख-समृद्धि से परिपूर्ण कर देती हैं। यह केवल धन की पूजा नहीं, अपितु आंतरिक शांति, सद्भाव और सकारात्मकता को आकर्षित करने का एक माध्यम भी है। इस पवित्र अनुष्ठान को संपन्न करने के लिए कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके और देवी का अखंड आशीर्वाद सदा बना रहे। आइए, हम लक्ष्मी पूजा की उस विधि को जानें, जो हमें देवी की अनंत कृपा का पात्र बनाती है।
पावन कथा
प्राचीन काल में, एक छोटे से गाँव में धर्मपरायण वैश्य दंपति रहते थे, जिनका नाम मोहन और राधा था। वे अत्यंत मेहनती और सत्यनिष्ठ थे, परंतु भाग्यवश दरिद्रता ने उनके घर में डेरा डाल रखा था। मोहन दिन-रात परिश्रम करते, पर उन्हें कभी अपेक्षित सफलता नहीं मिलती थी। राधा अपनी गृहस्थी को स्वच्छ और सुव्यवस्थित रखतीं, पर उनके मन में सदा एक टीस रहती थी कि वे कभी भी धन की देवी लक्ष्मी का उचित सत्कार नहीं कर पातीं। एक बार दीपावली का पावन पर्व निकट आया। राधा ने देखा कि गाँव के सभी लोग अपने घरों की साफ-सफाई कर रहे थे और लक्ष्मी पूजा की तैयारी में जुटे थे। राधा के मन में भी प्रबल इच्छा जागी कि इस बार वे भी देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करेंगी, चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं।
उन्होंने अपने पति मोहन से कहा, “स्वामी, इस वर्ष मैं भी पूर्ण विधि-विधान से लक्ष्मी पूजा करना चाहती हूँ। मुझे विश्वास है कि यदि हम सच्चे मन से देवी का आह्वान करेंगे, तो वे अवश्य हमारी पुकार सुनेंगी।” मोहन ने अपनी पत्नी की श्रद्धा देखकर कहा, “राधे, हम तो पहले से ही दरिद्र हैं, पूजा सामग्री का प्रबंध कैसे होगा?” राधा ने उत्तर दिया, “चिंता मत कीजिए, हम अपनी सामर्थ्य अनुसार ही सब कुछ एकत्र करेंगे। महत्वपूर्ण सामग्री नहीं, बल्कि हमारी सच्ची भक्ति है।”
राधा ने अथक प्रयास से घर के कोने-कोने को चमकाया। उन्होंने गंगाजल का छिड़काव कर पूरे घर को पवित्र किया। स्वयं भी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान किया और स्वच्छ वस्त्र धारण किए। उन्होंने टूटे-फूटे सामान को घर से बाहर किया और जहाँ पूजा करनी थी, उस स्थान को विशेष रूप से सजाया। एक छोटी सी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर, गणेश जी और लक्ष्मी जी की पुरानी मूर्तियों को स्थापित किया। उनके पास न कमल का फूल था और न ही कोई महंगी मिठाई। उन्होंने पास के तालाब से साधारण फूल तोड़े और घर में उपलब्ध आटे से थोड़े मीठे पुए बनाए। पूजा के लिए शुद्ध घी का एक छोटा सा दीपक जलाया।
पूजा के दिन राधा और मोहन ने पूरी श्रद्धा और एकाग्रता से गणेश जी का पूजन किया, फिर देवी लक्ष्मी का ध्यान करते हुए आवाहन किया। उन्होंने देवी को वही साधारण फूल और पुए अर्पित किए। मोहन ने अपने पुराने बही-खाते और तिजोरी को भी पूजा स्थल पर रखा। दोनों ने मिलकर लक्ष्मी मंत्र का जाप किया और हृदय से अपनी दरिद्रता दूर करने तथा सुख-समृद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने किसी से कोई उधार नहीं लिया था और न ही किसी से झगड़ा किया था। उनका मन पूर्णतः पवित्र और शांत था।
रात्रि के समय, जब दीपक की मंद लौ टिमटिमा रही थी, राधा ने देखा कि उनके घर में एक दिव्य प्रकाश फैल गया है। एक क्षण के लिए उन्हें लगा कि उन्होंने कुछ देखा है, जैसे कोई अदृश्य शक्ति उनके घर में प्रवेश कर रही हो। उन्हें नींद नहीं आई। अगली सुबह जब वे उठीं, तो उन्हें अपने पूजा स्थल के पास एक चमकती हुई स्वर्ण मुद्रा और कुछ बहुमूल्य रत्न मिले। वे चकित रह गईं। मोहन भी यह देखकर अवाक रह गए। उस दिन के बाद से उनके जीवन में धीरे-धीरे परिवर्तन आना शुरू हो गया। मोहन को उनके व्यापार में सफलता मिलने लगी और उनका घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया। राधा और मोहन ने यह रहस्य समझा कि देवी लक्ष्मी केवल स्वच्छ मन, पवित्र वातावरण और सच्ची निष्ठा से की गई पूजा से ही प्रसन्न होती हैं। उन्होंने जीवन भर इस सीख को याद रखा और अपनी संपत्ति का उपयोग दूसरों की भलाई में भी किया। इस प्रकार, राधा और मोहन की सच्ची भक्ति और विधि-विधान से की गई लक्ष्मी पूजा ने उनके जीवन को आलोकित कर दिया।
दोहा
स्वच्छ मन निर्मल देह हो, शुभ मुहूर्त धरि ध्यान।
लक्ष्मी पूजन जो करे, पावे सुख धन मान।।
चौपाई
देवी लक्ष्मी कृपा की खान, करें सदा भक्तन कल्यान।
कमल विराजे हाथ सुहावन, धन बरसावे मन भावन।।
जो नर नारि हृदय से पूजैं, सकल मनोरथ उनके पूरे।
घर आंगन में वास करे मां, रिद्धि सिद्धि सब पूर्ण करे मां।।
पाठ करने की विधि
लक्ष्मी पूजा को सफल बनाने के लिए विस्तृत विधि का पालन अत्यंत आवश्यक है। सर्वप्रथम पूजा की पूर्व तैयारी करें। घर की सफाई और शुद्धिकरण सबसे महत्वपूर्ण है। पूजा से पहले पूरे घर को भली-भांति साफ करें क्योंकि ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी केवल स्वच्छ और पवित्र स्थानों पर ही निवास करती हैं। सफाई के उपरांत पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करके उसे पवित्र करें। पूजा करने वाले सभी सदस्य सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, धुले हुए पवित्र वस्त्र ही धारण करें। महिलाएं साड़ी या सूट और पुरुष धोती-कुर्ता पहन सकते हैं। इसके पश्चात, पूजा स्थल की तैयारी करें। एक स्वच्छ चौकी यानी लकड़ी का पाटा लें और उसे भी गंगाजल से पवित्र करें। चौकी पर लाल या पीला रंग का एक स्वच्छ कपड़ा बिछाएं। इस कपड़े के ऊपर थोड़े चावल रखें। मध्य में सर्वप्रथम गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, क्योंकि किसी भी पूजा में गणेश जी की पूजा पहले की जाती है। गणेश जी के दाहिनी ओर यानी आपके बाएं हाथ की तरफ लक्ष्मी जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कुछ भक्त लक्ष्मी जी के साथ ज्ञान की देवी सरस्वती और धन के देवता कुबेर जी की भी पूजा करते हैं; उन्हें भी उचित स्थान पर रखें। पूजा स्थल के दाहिनी ओर एक छोटा कलश (तांबे या पीतल का) स्थापित करें। कलश में शुद्ध जल भरें, थोड़े चावल, एक सिक्का, एक सुपारी और एक फूल डालें। उसके मुख पर पांच या सात आम के पत्ते रखें और उनके ऊपर एक नारियल स्थापित करें, जिसका मुख ऊपर की ओर हो।
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री भी पहले से एकत्र कर लें। इसमें लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्तियां/चित्र, चौकी, लाल/पीला कपड़ा, चावल, कलश, जल, आम के पत्ते, नारियल, सिक्का, सुपारी, फल (केला, सेब, अनार, गन्ना), मिठाई (लड्डू, बर्फी, खीर), पान के पत्ते, लौंग, इलायची, बताशे, खील, मखाने, लक्ष्मी जी के लिए लाल चुनरी, जेवर (यदि हों), कलावा, जनेऊ, कुमकुम, हल्दी, सिंदूर, चंदन, इत्र, कमल का फूल (अनिवार्य), गेंदे के फूल, घी या तेल का दीपक, धूपबत्ती, अगरबत्ती, कपूर, गंगाजल, पंचामृत, चांदी के सिक्के, धनिया के बीज, कमल गट्टे, पीली कौड़ी और एक छोटी झाड़ू आदि शामिल होने चाहिए।
अब पूजा की प्रक्रिया प्रारंभ करें। सर्वप्रथम आत्म-शुद्धिकरण करें। अपने दाएं हाथ में जल लेकर “ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचिः॥” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें। इसके बाद तीन बार दाएं हाथ में जल लेकर आचमन करें और चौथी बार हाथ धो लें। अब संकल्प लें। अपने दाएं हाथ में थोड़े चावल, फूल और जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान और पूजा का उद्देश्य बताते हुए संकल्प करें कि आप यह पूजा किस कामना से कर रहे हैं। फिर जल भूमि पर छोड़ दें।
सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा करें। उन्हें तिलक लगाएं, चावल, जनेऊ, फूल और दूर्वा चढ़ाएं। दीप जलाएं, धूप दिखाएं और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। उन्हें लड्डू या कोई मिठाई अर्पित करें। इसके पश्चात कलश की पूजा करें, उस पर तिलक लगाएं, फूल चढ़ाएं और धूप-दीप दिखाएं। कलश को देवी-देवताओं का आह्वान माना जाता है।
अब देवी लक्ष्मी की मुख्य पूजा करें। हाथ में फूल लेकर लक्ष्मी जी का ध्यान करें और “ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥” मंत्र बोलते हुए उन्हें आसन ग्रहण करने के लिए आमंत्रित करें। उन्हें फूल अर्पित करें, जल अर्पित कर पाद्य और अर्घ्य दें। यदि मूर्ति छोटी हो तो पंचामृत से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से स्नान कराकर स्वच्छ वस्त्र से पोंछें। उन्हें लाल चुनरी या वस्त्र, यदि हों तो जेवर अर्पित करें। कुमकुम, हल्दी, चंदन का तिलक लगाएं। कमल का फूल और अन्य फूल माला सहित अर्पित करें। धूपबत्ती, अगरबत्ती जलाएं और घी या तेल का दीपक प्रज्वलित कर देवी को दिखाएं। फल, मिठाई, खीर, खील, बताशे, पान, सुपारी, लौंग, इलायची आदि का नैवेद्य अर्पित करें। चांदी के सिक्के, रुपए, सोने के आभूषण, कमल गट्टे, पीली कौड़ी, धनिया के बीज और हल्दी की गांठें पूजा स्थल पर रखें। यदि श्री यंत्र हो तो उसकी पूजा करें और कुबेर जी से धन-संपत्ति की रक्षा का निवेदन करें। अपने बही-खाते, कलम और तिजोरी की भी पूजा करें। “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।” या “ॐ महालक्ष्म्यै नमः।” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। लक्ष्मी चालीसा या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें। अंत में कपूर या दीपक से लक्ष्मी जी की आरती करें और सभी भक्त हाथ जोड़कर आरती लें। अपनी जगह पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें। हाथ जोड़कर अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें और अपनी मनोकामनाएं दोहराएं। अंत में प्रसाद सभी लोगों में बांटें।
पाठ के लाभ
लक्ष्मी पूजा में बताए गए ‘क्या करें’ नियमों का पालन करने से व्यक्ति को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जो केवल भौतिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी होते हैं। घर और मन दोनों को स्वच्छ रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवी लक्ष्मी ऐसे ही पवित्र स्थानों पर निवास करती हैं। सात्विक भोजन करने से शरीर और मन शुद्ध रहता है, जिससे पूजा में एकाग्रता बढ़ती है। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से ग्रह-नक्षत्रों का अनुकूल प्रभाव मिलता है, जिससे पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। किसी भी पूजा से पहले गणेश जी की पूजा करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और पूजा निर्विघ्न संपन्न होती है। लक्ष्मी जी को कमल का फूल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होती हैं, क्योंकि कमल उनका अत्यंत प्रिय पुष्प है और यह शुद्धता तथा सौंदर्य का प्रतीक है। पूजा में घी का दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है और अंधकार दूर होता है। अपने धन, तिजोरी और व्यापारिक दस्तावेजों का सम्मान करके उनकी पूजा करने से व्यक्ति के व्यवसाय में वृद्धि होती है और धन का सदुपयोग होता है। अपनी क्षमता अनुसार गरीब और जरूरतमंदों को दान करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, क्योंकि दान पुण्य का कार्य है और यह समृद्धि को बढ़ाता है। घर में सकारात्मक और शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने से गृह क्लेश दूर होता है और सुख-शांति का वास होता है। पूजा के बाद रात भर कम से कम एक दीपक जलता रहने देने से घर में प्रकाश और सकारात्मकता बनी रहती है, जो देवी लक्ष्मी को आकर्षित करती है। लक्ष्मी मंत्रों का निरंतर जाप करने से मन शांत होता है, इच्छा शक्ति बढ़ती है और देवी का आशीर्वाद सदैव बना रहता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
नियम और सावधानियाँ
लक्ष्मी पूजा के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जिनका पालन न करने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और देवी लक्ष्मी अप्रसन्न हो सकती हैं। घर को गंदा या बिखरा हुआ बिल्कुल न छोड़ें, क्योंकि देवी लक्ष्मी ऐसे स्थान पर कभी निवास नहीं करतीं। पूजा के दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, अंडे, शराब या किसी भी प्रकार का नशीला पदार्थ सेवन न करें, क्योंकि यह पूजा की पवित्रता को भंग करता है। घर में किसी भी प्रकार का झगड़ा, वाद-विवाद या कलह न करें, क्योंकि ऐसे नकारात्मक वातावरण में देवी लक्ष्मी का वास नहीं होता। क्रोध करने या अपशब्द बोलने से बचें, क्योंकि ये नकारात्मक भावनाएं शांति भंग करती हैं। पूजा के समय आलस्य या नींद में न रहें, बल्कि पूर्ण एकाग्रता और श्रद्धा के साथ पूजा करें। पूजा को बीच में अधूरा न छोड़ें, बल्कि पूरी विधि-विधान से संपन्न करें। पूजा के समय घर में अंधेरा न रखें, बल्कि पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था करें। किसी भी व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों का अपमान न करें, क्योंकि सभी में ईश्वर का अंश होता है। पूजा के दिन किसी को पैसा उधार न दें और न ही किसी से उधार लें, क्योंकि ऐसा करना आर्थिक अस्थिरता को दर्शाता है। झूठ बोलने या छल-कपट करने से बचें, क्योंकि सत्य और ईमानदारी देवी लक्ष्मी को प्रिय हैं। पूजा स्थल के आसपास चप्पल-जूते न पहनें, क्योंकि यह स्थान पवित्र माना जाता है। इन सावधानियों का पालन करने से व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होता है और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए पात्र बनता है।
निष्कर्ष
इस प्रकार, श्रद्धा, भक्ति और पूर्ण निष्ठा के साथ की गई लक्ष्मी पूजा आपके जीवन में न केवल धन-धान्य लाती है, बल्कि सुख, शांति और समृद्धि का भी संचार करती है। देवी लक्ष्मी केवल भौतिक संपत्ति की नहीं, अपितु आध्यात्मिक संपदा की भी प्रतीक हैं। जब हम स्वच्छ मन और शुद्ध हृदय से उनकी आराधना करते हैं, तो वे हमारे जीवन के हर अंधकार को दूर कर देती हैं और हमें ज्ञान, विवेक तथा परोपकार की भावना से भर देती हैं। यह पूजा हमें सिखाती है कि धन का सही उपयोग कैसे करें और जीवन में सात्विकता तथा सकारात्मकता का महत्व क्या है। आइए, हम सभी इस पावन अवसर पर देवी लक्ष्मी का आह्वान करें और उनके दिव्य आशीर्वाद से अपने जीवन को आलोकित करें। उनकी कृपा से हमारे घर में सदा सुख-समृद्धि का वास हो और हमारा जीवन आनंद से परिपूर्ण रहे। जय माँ लक्ष्मी!

