माता रानी के भजन संग्रह
**प्रस्तावना**
सनातन धर्म में आदिशक्ति माँ दुर्गा की महिमा अपरंपार है। वे संपूर्ण सृष्टि की जननी, पालनहार और संहारक हैं। उनकी कृपा से ही यह संसार गतिशील है और उनके बिना जीवन की कल्पना भी असंभव है। माँ जगदम्बा की आराधना के अनेक सरल और सुगम मार्ग हैं, जिनमें से एक अत्यंत प्रभावी और हृदय को शांति प्रदान करने वाला मार्ग है उनके पावन भजनों का गायन और श्रवण। माता रानी के भजन केवल गीत नहीं हैं, वे साक्षात माँ की उपस्थिति का अनुभव कराते हैं। ये भजन साधक को सीधे माँ के चरणों से जोड़ते हैं, मन की अशांति को दूर करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। नवरात्रि के पावन पर्व पर तो इन भजनों का महत्व और भी बढ़ जाता है। इन दिनों माता रानी के चमत्कारी भजन घर-घर गूँजते हैं, हर ओर भक्ति का एक अद्भुत वातावरण बन जाता है। इन भजनों में इतनी शक्ति है कि वे भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं और उन्हें हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं। जब हृदय से निकली पुकार भजनों के रूप में माँ तक पहुँचती है, तो माँ अपने भक्तों की करुण पुकार सुनकर उनकी सहायता के लिए तुरंत प्रकट होती हैं। ये भजन केवल मानसिक शांति ही नहीं देते, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त करते हैं। माता के भजन हमें जीवन की कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति देते हैं और यह विश्वास दिलाते हैं कि माँ सदैव हमारे साथ हैं, हमारी रक्षा कर रही हैं। यह भजन संग्रह आपको माता रानी के उन्हीं दिव्य भजनों की महिमा और उनके प्रभाव से अवगत कराएगा, जो आपके जीवन को भक्ति और आनंद से भर देंगे।
**पावन कथा**
प्राचीन काल में, भारतवर्ष के मध्य में एक छोटा सा राज्य था, जिसका नाम था कमलापुर। यह राज्य अपनी हरियाली, उपजाऊ भूमि और खुशहाल प्रजा के लिए जाना जाता था। यहाँ के लोग अत्यंत धार्मिक और माता रानी के परम भक्त थे। वे प्रत्येक शुभ अवसर पर, विशेषकर नवरात्रि में, माता रानी के भजनों का गायन करते और उनके मंदिर में जाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते थे। इस राज्य का राजा धर्मपाल अत्यंत धर्मात्मा और प्रजावत्सल था। उसकी रानी, महारानी सुशीला, भी उतनी ही धार्मिक थी। उनके राज्य में सब कुछ सुखमय था, परंतु दुर्भाग्यवश, कई वर्षों से उनके आंगन में कोई संतान नहीं थी। राजा और रानी ने अनेक तीर्थ किए, व्रत रखे, दान-पुण्य किया, परंतु उनकी मनोकामना पूर्ण नहीं हुई। वे दोनों इस बात से अत्यंत दुखी रहते थे। रानी सुशीला दिन-रात माता रानी से प्रार्थना करती रहती थीं, उनके भजनों को गुनगुनाती रहती थीं, लेकिन पुत्र प्राप्ति की आस धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।
एक दिन, राजा धर्मपाल के दरबार में एक सिद्ध महात्मा पधारे। महात्मा अत्यंत ज्ञानी और तेजस्वी थे। राजा और रानी ने उनका यथोचित सत्कार किया और अपनी व्यथा उनके समक्ष रखी। महात्मा ने धैर्यपूर्वक उनकी बातें सुनीं और मुस्कुराते हुए कहा, “हे राजन और रानी! आपकी भक्ति और श्रद्धा में कोई कमी नहीं है, परंतु आपकी मनोकामना की पूर्ति के लिए एक विशेष अनुष्ठान की आवश्यकता है। आपको नव दिनों तक लगातार माता रानी के ऐसे भजनों का गायन करना होगा, जिनमें आपकी आत्मा का हर कण समर्पित हो जाए। इन भजनों के माध्यम से माँ जगदम्बा स्वयं आपके अंतर्मन में अवतरित होंगी और आपकी इच्छा पूर्ण करेंगी। यह केवल गायन नहीं होगा, यह एक गहन तपस्या होगी।”
राजा और रानी ने महात्मा की बात मान ली। उन्होंने राज्य भर में घोषणा करवाई कि सभी प्रजाजन मिलकर नौ दिनों तक माता रानी के भजनों का अखंड कीर्तन करें। पूरे राज्य में भक्ति का वातावरण निर्मित हो गया। राजा और रानी स्वयं मंदिर में आसन ग्रहण कर प्रतिदिन प्रातः से संध्या तक भजनों का गायन करते। उनकी आँखें श्रद्धा से नम रहतीं, उनका हृदय माँ के प्रेम से ओत-प्रोत था। पहले दिन से ही, एक अद्भुत ऊर्जा का संचार पूरे राज्य में महसूस होने लगा। जिन लोगों के मन में निराशा थी, उनके चेहरों पर आशा की किरणें जगमगाने लगीं। बच्चों से लेकर वृद्धों तक, सभी अपनी-अपनी क्षमतानुसार इस महाभक्ति यज्ञ में शामिल हुए।
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, भजनों की ध्वनि और तीव्र होती गई। सातवें दिन तक, रानी सुशीला को एक अद्भुत स्वप्न आया, जिसमें माता रानी ने उन्हें दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। रानी की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने राजा को यह बात बताई और उनका विश्वास और भी दृढ़ हो गया। आठवें दिन, जब भजनों का कीर्तन अपनी चरम सीमा पर था, तब मंदिर के गर्भगृह से एक दिव्य प्रकाश निकला और पूरे वातावरण में सुगंध फैल गई। ऐसा लगा मानो स्वयं माँ अपने भक्तों के बीच उपस्थित हों।
नौवें दिन, नवरात्रि की महानवमी पर, जब अंतिम आहुति दी जा रही थी और भजनों की ध्वनि आसमान चीर रही थी, तब मंदिर में एक अत्यंत सुंदर बालक प्रकट हुआ, जिसके चेहरे पर दिव्य तेज था। यह देख राजा, रानी और समस्त प्रजाजन आश्चर्यचकित रह गए। यह माता रानी का ही चमत्कार था, उनके भजनों की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण था। राजा और रानी ने उस बालक को अपनी संतान के रूप में स्वीकार किया और उसका नाम ‘भजनरत्न’ रखा। आगे चलकर भजनरत्न एक महान योद्धा और धर्मात्मा राजा बना, जिसने कमलापुर राज्य को और भी ऊँचाइयों पर पहुँचाया। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और भजनों की शक्ति से असंभव भी संभव हो जाता है और माता रानी अपने भक्तों की हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करती हैं।
**दोहा**
माता रानी का भजन, जो गावे मन चित लाय।
दूर होवें सब संकट, सुख संपत्ति घर आय॥
**चौपाई**
जय जय जय जगजननी भवानी, तेरी कृपा सब जग जानी।
नव रूपों में तू ही विराजे, भक्तन के मन में तू साजे॥
शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी रूपा, चंद्रघंटा कूष्मांडा अनूपा।
स्कंदमाता कात्यायनी माई, कालरात्रि महागौरी सुखदाई॥
सिद्धिदात्री तू मोक्ष प्रदाती, तेरे भजनों से मिटे विघाती।
ज्ञान दे तू, शक्ति दे माँ, हर ले सारे कष्ट दया माँ॥
तेरे भजन जो नित नित गाते, भवसागर से पार हो जाते।
कृपा तेरी बरसती सदा ही, भक्तन को आनंद देती माई॥
**पाठ करने की विधि**
माता रानी के भजनों का पाठ या श्रवण करने की विधि अत्यंत सरल है, परंतु इसमें सच्ची श्रद्धा और एकाग्रता का होना अनिवार्य है। सर्वप्रथम, सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर या संध्याकाल में, जब मन शांत हो, स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अपने घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करें। एक चौकी पर माता रानी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। उनके समक्ष एक शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और सुगंधित धूपबत्ती जलाएँ। पुष्प, फल, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
अब, शांत मन से आसन पर बैठें। यदि संभव हो, तो ध्यान मुद्रा में बैठें। अपनी आँखें बंद करके या माता रानी की छवि पर एकाग्रचित्त होकर भजनों का गायन प्रारंभ करें। आप स्वयं गा सकते हैं या किसी अच्छे भजन संग्रह का श्रवण कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आप शब्दों पर ध्यान दें और उनके अर्थ को आत्मसात करें। भजनों के प्रत्येक शब्द में माँ की महिमा और शक्ति निहित होती है। गाते या सुनते समय यह भावना रखें कि आप सीधे माँ से संवाद कर रहे हैं, अपनी भावनाओं को माँ के चरणों में अर्पित कर रहे हैं। भजनों का पाठ करते समय मन में किसी भी प्रकार का नकारात्मक विचार न लाएँ। शुद्ध भावना और पूर्ण विश्वास के साथ ही इनका पाठ करें। नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से इन भजनों का नित्य पाठ करना चाहिए। अपनी सुविधा और समय के अनुसार, आप अपनी पसंद के भजनों का चयन कर सकते हैं, परंतु यह सुनिश्चित करें कि आप उन्हें पूरे हृदय से गाएँ या सुनें।
**पाठ के लाभ**
माता रानी के भजनों का नियमित पाठ या श्रवण अनगिनत लाभ प्रदान करता है, जो भक्त के लौकिक और पारलौकिक जीवन को समृद्ध करते हैं। इन चमत्कारी भजनों से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन भी आते हैं।
1. **मानसिक शांति और तनाव मुक्ति**: भजनों की मधुर ध्वनि और भक्तिमय वातावरण मन को शांत करता है, चिंता और तनाव से मुक्ति दिलाता है।
2. **सकारात्मक ऊर्जा का संचार**: भजनों के माध्यम से दैवीय ऊर्जा का अनुभव होता है, जिससे नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
3. **रोगों से मुक्ति**: सच्ची श्रद्धा से गाए गए भजन शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने में सहायक होते हैं। इन्हें चमत्कारी भजन इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि कई बार असाध्य रोगों में भी इनके प्रभाव देखे गए हैं।
4. **मनोकामना पूर्ति**: माता रानी अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। यदि भक्त सच्चे मन से और पूरे विश्वास के साथ भजन गाकर अपनी इच्छा व्यक्त करता है, तो माँ अवश्य उसे पूर्ण करती हैं।
5. **कष्टों और बाधाओं का निवारण**: जीवन में आने वाली हर प्रकार की बाधाएँ, संकट और परेशानियाँ भजनों की शक्ति से दूर होती हैं। माँ अपने भक्तों की ढाल बनकर उनकी रक्षा करती हैं।
6. **भय और असुरक्षा से मुक्ति**: माता रानी के भजनों का पाठ करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और हर प्रकार के भय, अनिश्चितता और असुरक्षा की भावना समाप्त होती है।
7. **ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति**: माँ सरस्वती के स्वरूप में माँ दुर्गा ज्ञान और बुद्धि प्रदान करती हैं। भजनों के माध्यम से उनकी कृपा प्राप्त होती है, जिससे विवेक और सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
8. **मोक्ष की प्राप्ति**: जो भक्त पूर्ण समर्पण के साथ माता रानी के भजनों में लीन रहता है, उसे अंततः भवसागर से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
9. **पारिवारिक सुख-शांति**: इन भजनों के प्रभाव से घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है, परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
**नियम और सावधानियाँ**
माता रानी के भजनों का पाठ करते समय कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है, ताकि आप उनके पूर्ण लाभ प्राप्त कर सकें और अपनी भक्ति को शुद्ध रख सकें।
1. **पवित्रता और स्वच्छता**: भजन पाठ करने से पूर्व शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें।
2. **सात्विक आहार**: जहाँ तक संभव हो, भजन पाठ के दिनों में सात्विक भोजन करें। प्याज, लहसुन, मांसाहार और तामसिक भोजन से परहेज करें। यह मन को शांत और शुद्ध रखने में मदद करता है।
3. **नकारात्मक विचारों से बचें**: भजन पाठ के समय मन में क्रोध, ईर्ष्या, लोभ, मोह या किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार न लाएँ। पूर्ण सकारात्मकता और प्रेम भाव से माँ का स्मरण करें।
4. **एकाग्रता और समर्पण**: भजन गाते या सुनते समय पूरी तरह से एकाग्र रहें। आपका ध्यान भटकना नहीं चाहिए। यह केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि माँ के प्रति आपका सच्चा समर्पण होना चाहिए।
5. **अखंड विश्वास**: माँ पर पूर्ण और अटूट विश्वास रखें। किसी भी प्रकार का संदेह आपकी भक्ति को कमजोर कर सकता है। यह विश्वास रखें कि माँ आपकी पुकार अवश्य सुनेंगी।
6. **शोरगुल से दूर**: भजन पाठ के लिए शांत और एकांत स्थान का चयन करें, जहाँ किसी प्रकार का व्यवधान न हो। यह आपको ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा।
7. **अहंकार का त्याग**: अपनी भक्ति या पाठ का कभी अहंकार न करें। माँ के समक्ष सभी समान हैं। विनम्रता और सेवा भाव से ही उनकी आराधना करें।
8. **नियमितता**: यदि आपने भजन पाठ का संकल्प लिया है, तो उसे नियमित रूप से पूरा करें। अनियमितता आपकी साधना को कमजोर कर सकती है।
9. **दूसरों का सम्मान**: भजन पाठ के दौरान या उसके बाद किसी की निंदा न करें और सभी के प्रति सम्मान का भाव रखें।
इन नियमों का पालन करते हुए आप माता रानी के भजनों की दिव्य शक्ति का अनुभव कर सकते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य कर सकते हैं।
**निष्कर्ष**
माता रानी के भजन केवल शब्द नहीं, बल्कि साक्षात ब्रह्म नाद हैं, जो अनंत ऊर्जा और कृपा से ओत-प्रोत हैं। ये भजन हमें माँ के दिव्य स्वरूप से जोड़ते हैं, हमें उनकी असीम करुणा और प्रेम का अनुभव कराते हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में या जीवन के किसी भी क्षण में, जब भी हम माता रानी के भजनों में स्वयं को लीन करते हैं, तो एक अलौकिक शांति और शक्ति हमें घेर लेती है। ये चमत्कारी भजन हर भक्त की मनोकामना पूर्ति का साधन बनते हैं और उन्हें जीवन के हर अंधकार से बाहर निकालकर प्रकाश की ओर ले जाते हैं।
आइए, हम सभी मिलकर इस भक्तिधारा में गोता लगाएँ और माता रानी के पावन भजनों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएँ। माँ जगदम्बा की असीम कृपा हम सभी पर सदैव बनी रहे। उनके भजन हमारे हृदयों में प्रेम, शांति और विश्वास का दीप प्रज्वलित करते रहें। जय माता दी!

