सनातन धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, जिनकी आराधना से विशेष फल प्राप्त होते हैं। मंगलवार का दिन इन्हीं में से एक विशेष दिन है, जो भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार, संकटमोचन श्री हनुमान जी को समर्पित है। राम भक्त हनुमान जी को बल, बुद्धि और विद्या का प्रतीक माना जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा-अर्चना और व्रत रखने से वे अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
यह व्रत न केवल शारीरिक और मानसिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं को भी दूर करता है। अगर आप भी जीवन में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं या किसी विशेष इच्छा की पूर्ति चाहते हैं, तो मंगलवार व्रत आपके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। आइए, इस लेख में मंगलवार व्रत की महिमा, इसके लाभ और इसे सही विधि से करने का तरीका जानते हैं।
मंगलवार व्रत की महिमा और लाभ
मंगलवार का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी माना जाता है, जो साहस, बल और बुद्धि प्राप्त करना चाहते हैं। भगवान हनुमान को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है, और सच्चे मन से किया गया यह व्रत हर प्रकार के संकट का नाश करता है।
- शारीरिक और मानसिक शक्ति: यह व्रत करने से व्यक्ति में आत्मविश्वास बढ़ता है और शारीरिक दुर्बलता दूर होती है।
- मंगल ग्रह की शांति: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह व्रत मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने में भी सहायक होता है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल कमजोर या पीड़ित होता है, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए। यह मंगल दोष के प्रभावों को शांत कर जीवन में स्थिरता लाता है।
- भय और रोगों से मुक्ति: इस व्रत के प्रभाव से भूत-प्रेत बाधा, भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। हनुमान जी स्वयं अष्ट सिद्धियों और नव निधियों के दाता हैं।
- मनोकामना पूर्ति: संतान प्राप्ति, नौकरी में सफलता, आर्थिक समृद्धि और विवाह संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए भी यह व्रत अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
- पापों का नाश: सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से किए गए इस व्रत से व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है।
मंगलवार व्रत की पूजन विधि
मंगलवार व्रत का पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए इसे सही विधि और नियमों का पालन करते हुए करना अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- प्रातः काल स्नान: मंगलवार व्रत रखने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- संकल्प: अपने पूजा घर में भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि घर में पूजा कर रहे हैं, तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें: ‘हे हनुमान जी, मैं आज आपका व्रत करने का संकल्प लेता/लेती हूँ। कृपया मुझे शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करें ताकि मैं इसे सफलतापूर्वक पूरा कर सकूं।’
- पूजा सामग्री: हनुमान जी को लाल वस्त्र, सिंदूर, चमेली का तेल (तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं), लाल फूल (जैसे गुड़हल), अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य (बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, गुड़-चना या केला) अर्पित करें। तुलसी दल हनुमान जी को प्रिय है, अतः उसे भी अर्पित करें।
- पाठ करें: इसके बाद ‘हनुमान चालीसा’ का कम से कम 7 या 11 बार पाठ करें। संभव हो तो ‘सुंदरकांड’ का पाठ भी कर सकते हैं, यह अत्यंत शुभ माना जाता है। ‘बजरंग बाण’ का पाठ भी कष्टों को दूर करने में सहायक है।
- आरती और प्रार्थना: पूजा के अंत में हनुमान जी की आरती करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करें। अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।
- व्रत का नियम: इस दिन एक समय ही भोजन करना चाहिए, जिसमें नमक का प्रयोग वर्जित होता है। आप दूध, फल, मीठे पकवान जैसे बूंदी के लड्डू, हलवा या सात्विक भोजन (बिना प्याज-लहसुन और नमक) ग्रहण कर सकते हैं।
- शाम की पूजा: शाम को सूर्यास्त के बाद एक बार फिर हनुमान चालीसा का पाठ करें और आरती करें। भोजन करने से पहले भगवान को भोग लगाएं और फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें।
- व्रत की अवधि और उद्यापन: मंगलवार व्रत 21 या 45 मंगलवार तक रखने का विधान है, लेकिन आप अपनी श्रद्धा अनुसार इसे जारी रख सकते हैं। व्रत का उद्यापन करना भी शुभ माना जाता है, जिसमें विधि-विधान से पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराया जाता है।
निष्कर्ष
मंगलवार व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह भगवान हनुमान के प्रति आपकी अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। यह हमें जीवन में धैर्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सच्चे मन और पूर्ण निष्ठा के साथ किया गया यह व्रत निश्चित रूप से आपको हनुमान जी की असीम कृपा और आशीर्वाद का पात्र बनाएगा। आपके जीवन से सभी संकट दूर होंगे और सुख-शांति का वास होगा। ‘जय श्री राम, जय हनुमान!’

