बृहस्पति ग्रह को शांत करने के उपाय
**प्रस्तावना**
सनातन धर्म में ग्रहों का प्रभाव हमारे जीवन पर अत्यंत गहरा माना गया है। नवग्रहों में देवगुरु बृहस्पति का स्थान सर्वोपरि है। इन्हें ज्ञान, बुद्धि, विवेक, धन, संतान और सौभाग्य का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में बृहस्पति की स्थिति शुभ हो, तो व्यक्ति जीवन में अपार सफलता, सम्मान और समृद्धि प्राप्त करता है। इसके विपरीत, यदि बृहस्पति अशुभ स्थिति में हों, तो जातक को विद्या में बाधा, धन हानि, विवाह में विलंब, संतान संबंधी समस्याएँ और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बृहस्पति ग्रह को शांत करना और उनके शुभ प्रभावों को बढ़ाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। आगामी दिवाली जैसे पावन पर्व पर, जब माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है, बृहस्पति के उपायों का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह लेख आपको देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के ऐसे सरल और प्रभावी उपायों से अवगत कराएगा, जो आपके जीवन में ज्ञान, धन और सौभाग्य की वृद्धि करेंगे और आपको एक समृद्ध जीवन की ओर अग्रसर करेंगे।
**पावन कथा**
प्राचीन काल की बात है, एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले माधव नामक एक युवक को ज्ञान और विद्या की बड़ी लालसा थी। वह शास्त्रों का अध्ययन करने में अपना सारा समय व्यतीत करता था। परंतु दुर्भाग्यवश, उसकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर अवस्था में थे। इस कारण अथक परिश्रम के बावजूद माधव को ज्ञान प्राप्ति में अनेक बाधाएँ आती थीं। वह जो भी पढ़ता, उसे स्मरण नहीं रख पाता था। उसकी वाणी में ओज नहीं था और तर्कशक्ति भी क्षीण थी। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास डगमगाने लगा। धन के अभाव ने भी उसे घेर लिया था। उसके पिता एक छोटे से गाँव में पुरोहिती कर अपना जीवन यापन करते थे, परंतु माधव की शिक्षा दीक्षा के लिए पर्याप्त धन नहीं था। परिवार में लगातार आर्थिक तंगी बनी रहती थी, जिससे घर में सुख-शांति का अभाव था। माधव ने कई विद्वानों और ज्योतिषियों से सलाह ली, जिन्होंने एक ही बात कही कि उसके बृहस्पति कमजोर हैं, जिसके कारण उसे जीवन में लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
एक दिन, जब माधव अत्यंत निराश होकर एक वटवृक्ष के नीचे बैठा था, अपने भाग्य को कोस रहा था, तभी वहाँ से एक सिद्ध महात्मा गुजर रहे थे। महात्मा ने माधव के उदास मुख को देखकर उससे उसकी व्यथा पूछी। माधव ने अपनी सारी समस्याएँ महात्मा को बताईं, अपनी विद्या में बाधा, धन की कमी और सौभाग्य के अभाव का वृत्तांत सुनाया। महात्मा ने ध्यानपूर्वक उसकी बात सुनी, उसकी कुंडली देखी और मुस्कुराते हुए कहा, “वत्स, तुम्हारे बृहस्पति अवश्य कमजोर हैं, किंतु श्रद्धा और भक्ति से बड़ा कोई उपाय नहीं। तुम देवगुरु बृहस्पति की आराधना करो। उनकी कृपा से तुम्हारे सभी कष्ट दूर हो जाएँगे और तुम्हें ज्ञान, धन तथा सौभाग्य की प्राप्ति होगी।”
महात्मा ने माधव को बृहस्पति देव की पूजा विधि और गुरुवार व्रत का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पीली वस्तुओं का दान, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और गुरु मंत्र का जाप बृहस्पति देव को प्रसन्न करता है। महात्मा ने माधव से यह भी कहा कि विशेष रूप से दिवाली के पावन अवसर पर यदि बृहस्पति के उपाय किए जाएँ, तो माँ लक्ष्मी की कृपा से धन संबंधी बाधाएँ भी दूर होती हैं और ज्ञान व सौभाग्य में कई गुना वृद्धि होती है। उन्होंने माधव को विश्वास दिलाया कि यदि वह पूर्ण निष्ठा से इन उपायों का पालन करेगा, तो शीघ्र ही उसे शुभ फलों की प्राप्ति होगी और उसका जीवन सुखमय हो जाएगा।
महात्मा की बातों से माधव के मन में आशा का संचार हुआ। उसके हृदय में एक नई ऊर्जा का अनुभव हुआ। उसने उसी दिन से बृहस्पति देव की आराधना प्रारंभ कर दी। हर गुरुवार को वह नियमपूर्वक व्रत रखता, सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करता, पीले वस्त्र धारण करता, भगवान विष्णु की पूजा करता और बृहस्पति देव के मंत्रों का जाप करता था। वह चने की दाल, हल्दी, पीली मिठाई, केले और पीले फूलों का दान करता था। उसने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीब विद्यार्थियों की मदद में लगाना शुरू किया, उन्हें पुस्तकें खरीद कर देता और अपने सामर्थ्य अनुसार भोजन कराता। उसकी इस निस्वार्थ सेवा से उसका अंतःकरण शुद्ध होने लगा। धीरे-धीरे माधव के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे। उसकी स्मरण शक्ति बढ़ने लगी, वाणी में मधुरता और ओज आने लगा। उसे शास्त्रों का गहन ज्ञान प्राप्त होने लगा और लोग उसकी विद्वत्ता की प्रशंसा करने लगे।
अगली दिवाली का पर्व आया। माधव ने महात्मा के बताए अनुसार, दिवाली के दिन विशेष रूप से बृहस्पति देव का स्मरण करते हुए माँ लक्ष्मी की पूजा की। उसने पीली कौड़ियाँ और हल्दी की साबुत गांठें लक्ष्मी पूजन में रखीं और संकल्प लिया कि वह अपने ज्ञान का उपयोग केवल दूसरों के कल्याण के लिए करेगा। उसकी इस निस्वार्थ सेवा, अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प से बृहस्पति देव अत्यंत प्रसन्न हुए और उस पर अपनी असीम कृपा बरसाई।
कुछ ही समय बाद, दूर देश से एक राजा ने अपने राज्य में एक प्रकांड विद्वान की खोज में दूत भेजे। माधव की ख्याति तब तक चारों दिशाओं में फैल चुकी थी। उसके ज्ञान की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी थी। राजा के दूत माधव के पास पहुँचे और उन्हें राजदरबार में आने का निमंत्रण दिया। माधव ने राजा के निमंत्रण को स्वीकार किया। राजदरबार में उसने अपने गहन ज्ञान और अद्भुत तर्कशक्ति से सभी विद्वानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजा ने प्रसन्न होकर उसे अपने मुख्य सलाहकार और राजपुरोहित का पद प्रदान किया। माधव को अपार धन, सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। उसका घर धन-धान्य से परिपूर्ण हो गया और उसे विद्वान, गुणवान पुत्रों की भी प्राप्ति हुई, जिससे उसका वंश भी आगे बढ़ा। उसने अपने ज्ञान और धन का सदुपयोग लोक कल्याण में किया, अनेक गुरुकुलों का निर्माण कराया और निर्धन विद्यार्थियों की सहायता की।
इस प्रकार, माधव ने अपनी अटूट श्रद्धा और महात्मा के दिखाए मार्ग पर चलकर अपने कमजोर बृहस्पति को शांत किया और ज्ञान, धन तथा सौभाग्य की प्राप्ति की। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची लगन, विश्वास और सही उपायों से हम अपने ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम कर सकते हैं और जीवन में सफलता, समृद्धि तथा शांति प्राप्त कर सकते हैं। देवगुरु बृहस्पति की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं।
**दोहा**
गुरु बृहस्पति देव तुम, विद्या बुद्धि के दाता।
शांत करो मम ग्रह दोष, हर लो सकल विपदा ॥
पीत वसन अति शोभा पाएँ, ज्ञान प्रकाश फैलाएँ।
जो नर तुम्हरी शरणहि आवे, सकल मनोरथ निश्चय पावे ॥
**चौपाई**
जय गुरु ज्ञान के सागर, जय बृहस्पति सुखकारी।
देवों के तुम गुरुवर, हो जगत के पालनहारी॥
नमो नमो तुम दीन बंधु, त्रिभुवन यश विस्तारी।
अतिमंद गति ग्रह तुम हो, विद्या धन के अधिकारी॥
कनक देह कांति अति प्यारी, पीत वसन धारी।
हाथ में पुस्तक शुभकर, कमंडलु अति सुखकारी॥
जो जन पाठ तुम्हारा गावे, सुख समृद्धि पावे।
रोग दोष सब दूर भगावे, भव सागर तर जावे॥
**पाठ करने की विधि**
बृहस्पति ग्रह को शांत करने और उनके शुभ प्रभावों को बढ़ाने के लिए कुछ विशिष्ट पाठ और उपाय किए जाते हैं। गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित है, अतः इन उपायों को गुरुवार के दिन करना विशेष फलदायी होता है।
1. **गुरुवार व्रत:** गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें। शुद्ध मन से व्रत का संकल्प लें। इस दिन केले के वृक्ष की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। केले के वृक्ष पर शुद्ध जल चढ़ाएँ, हल्दी और चने की दाल अर्पित करें, और दीपक जलाएँ। कथा सुनें या पढ़ें।
2. **बृहस्पति मंत्र का जाप:** बृहस्पति देव के बीज मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें। इसके अतिरिक्त, “ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः” मंत्र का जाप भी बहुत प्रभावशाली माना जाता है। गुरु गायत्री मंत्र “ॐ वृषभध्वजाय विद्महे, कृपा हस्ते धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्” का जाप करने से भी विशेष लाभ होता है। इन मंत्रों का जाप रुद्राक्ष या हल्दी की माला से करना अधिक फलदायी होता है।
3. **विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ:** भगवान विष्णु बृहस्पति के अधिदेवता हैं। अतः गुरुवार को श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बृहस्पति देव को प्रसन्न करता है और सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करता है। यह पाठ मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
4. **बृहस्पति कवच का पाठ:** बृहस्पति कवच का पाठ करने से बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभावों से रक्षा होती है, व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बनता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पाठ आध्यात्मिक उन्नति में भी सहायक है।
5. **पीली वस्तुओं का दान:** गुरुवार के दिन पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल, बेसन, हल्दी, पीले वस्त्र, केला, गुड़, पीले फूल, पीली मिठाई का दान करना चाहिए। अपनी सामर्थ्य अनुसार सोना (यदि संभव हो) या पीतल का दान भी कर सकते हैं। किसी गरीब ब्राह्मण, जरूरतमंद व्यक्ति या कन्या को दान करने से विशेष पुण्य मिलता है।
6. **केसर का तिलक:** स्नान के पश्चात् माथे पर केसर का तिलक लगाना भी बृहस्पति को मजबूत करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। यह मानसिक शांति और सकारात्मकता लाता है।
7. **दीवाली पर विशेष उपाय:** दिवाली के शुभ अवसर पर माँ लक्ष्मी के पूजन के साथ ही बृहस्पति देव का भी स्मरण करें। पूजा में पीली कौड़ियाँ, हल्दी की साबुत गांठें, और केले के पत्ते का प्रयोग करें। केसर युक्त खीर या बेसन के लड्डू का भोग लगाएँ और उसे प्रसाद के रूप में वितरित करें। इससे धन और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
**पाठ के लाभ**
बृहस्पति ग्रह को शांत करने और उनकी आराधना करने से व्यक्ति को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जो उसके जीवन को सुखमय और समृद्ध बनाते हैं। इन उपायों का नियमित पालन करने से जीवन की दिशा सकारात्मक रूप से बदल जाती है:
1. **ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि:** बृहस्पति देव को ज्ञान और बुद्धि का कारक माना जाता है। इनकी कृपा से व्यक्ति की स्मरण शक्ति तेज होती है, शिक्षा में उत्कृष्ट सफलता मिलती है, गहन विषयों को समझने की क्षमता बढ़ती है और सही निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त होती है। विद्यार्थियों के लिए यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी हैं, जो उन्हें उच्च शिक्षा में सफलता दिलाते हैं।
2. **धन और समृद्धि की प्राप्ति:** कमजोर बृहस्पति धन हानि, आर्थिक संकट और कर्ज का कारण बन सकते हैं। इन उपायों को करने से आर्थिक स्थिति सुधरती है, व्यापार में उन्नति होती है और नौकरी में पदोन्नति मिलती है। धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलते हैं और संचित धन में वृद्धि होती है। दिवाली के समय किए गए उपाय माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा दिलाते हैं और घर में धन का स्थायी वास होता है।
3. **सौभाग्य और सम्मान:** बृहस्पति की शुभता से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान मिलता है, उसकी प्रतिष्ठा बढ़ती है और उसे हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है, जिससे उसके सौभाग्य में कई गुना वृद्धि होती है। यह व्यक्ति को सामाजिक और पारिवारिक रूप से संपन्न बनाता है।
4. **विवाह और संतान सुख:** जिन जातकों के विवाह में विलंब हो रहा हो, मनचाहा जीवनसाथी न मिल रहा हो, या संतान प्राप्ति में बाधाएँ आ रही हों, उन्हें बृहस्पति के उपाय करने से इन समस्याओं से मुक्ति मिलती है। शीघ्र विवाह के योग बनते हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है, जिससे पारिवारिक जीवन सुखमय होता है।
5. **स्वास्थ्य लाभ:** बृहस्पति कुछ रोगों जैसे लीवर संबंधी समस्याएँ, मोटापा, मधुमेह और पाचन संबंधी विकारों के कारक भी होते हैं। इनकी शांति से स्वास्थ्य में सुधार होता है, रोगों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति निरोगी काया प्राप्त करता है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक है।
6. **सकारात्मक ऊर्जा और शांति:** बृहस्पति के उपाय व्यक्ति के मन को शांत करते हैं, नकारात्मक विचारों को दूर करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। इससे जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति और संतोष का अनुभव होता है। यह जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है।
7. **समस्त बाधाओं से मुक्ति:** जीवन में आने वाली अनेक प्रकार की बाधाएँ, चाहे वह करियर से संबंधित हों, व्यापार से संबंधित हों या पारिवारिक, बृहस्पति की कृपा से दूर होती हैं। यह उपाय जीवन पथ को सुगम बनाते हैं और व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाते हैं।
**नियम और सावधानियाँ**
बृहस्पति ग्रह को शांत करने के उपायों का पालन करते समय कुछ नियमों और सावधानियों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि उनका पूर्ण फल प्राप्त हो सके और कोई भी त्रुटि पूजा के प्रभाव को कम न करे:
1. **पवित्रता और स्वच्छता:** पूजा और व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखना अनिवार्य है। स्नान करके स्वच्छ, धुले हुए वस्त्र पहनें और पवित्र मन से पूजा करें। घर और पूजा स्थल को सदैव स्वच्छ रखें, विशेषकर गुरुवार के दिन।
2. **पीले वस्त्र धारण करें:** गुरुवार के दिन पूजा करते समय पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह बृहस्पति देव को प्रिय है और उनकी सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
3. **नियमों का पालन:** व्रत और पूजा के नियमों का पूर्ण निष्ठा से पालन करें। व्रत के दिन सत्य बोलें, किसी की निंदा न करें, और किसी का अहित न सोचें। मन में किसी के प्रति द्वेष भाव न रखें।
4. **भोजन संबंधी नियम:** गुरुवार के व्रत में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। केले का सेवन न करें (केले का दान करें)। पीले फल, पीली मिठाई, बेसन से बनी वस्तुएँ और दही का सेवन कर सकते हैं। सात्विक भोजन ग्रहण करें।
5. **बाल और नाखून:** गुरुवार के दिन बाल कटवाना, नाखून काटना या शेविंग करना वर्जित माना जाता है, विशेषकर पुरुषों के लिए। महिलाओं को भी इस दिन बाल धोने से बचना चाहिए, क्योंकि यह धन हानि का कारण बन सकता है।
6. **दान का महत्व:** दान हमेशा श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से करना चाहिए। दान की गई वस्तुओं का स्वयं सेवन नहीं करना चाहिए। दान करते समय मन में किसी प्रकार का अहंकार या दिखावा न लाएँ।
7. **किसी का अनादर न करें:** गुरुजनों, बड़ों, ब्राह्मणों और शिक्षकों का कभी अनादर नहीं करना चाहिए। उनकी सेवा और सम्मान से बृहस्पति देव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं।
8. **मांसाहार और मदिरापान:** व्रत के दिन मांसाहार और मदिरापान का पूर्णतः त्याग करें। सात्विक भोजन ही ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
9. **नियमितता:** इन उपायों को नियमित रूप से करने से ही स्थाई और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। केवल एक या दो बार करने से पूर्ण लाभ नहीं मिलेगा। दीर्घकाल तक श्रद्धापूर्वक पालन करें।
10. **दिवाली पर विशेष ध्यान:** दिवाली पर किए जाने वाले उपायों में माँ लक्ष्मी और गणेश जी के साथ बृहस्पति देव का भी ध्यान अवश्य करें। यह आपके धन और ज्ञान दोनों को कई गुना बढ़ाएगा।
**निष्कर्ष**
देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, धन, संतान और सौभाग्य के अधिष्ठाता हैं। उनकी कृपा के बिना जीवन में पूर्णता असंभव है। जब हमारे जीवन में विद्या संबंधी बाधाएँ, आर्थिक संकट, वैवाहिक समस्याएँ या दुर्भाग्य का आगमन होता है, तो यह अक्सर बृहस्पति के कमजोर होने का संकेत होता है। किंतु हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि सनातन धर्म में प्रत्येक समस्या का समाधान निहित है। श्रद्धा, भक्ति और सही उपायों के माध्यम से हम देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न कर उनके शुभ आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। उनकी कृपा से हमारे जीवन के सभी अंधकार दूर हो जाते हैं और प्रकाश का संचार होता है।
महात्मा माधव की कथा हमें यही सिखाती है कि चाहे जीवन में कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियाँ क्यों न हों, यदि हम पूर्ण विश्वास और निष्ठा के साथ ईश्वर की शरण लेते हैं और शास्त्रों में बताए गए उपायों का पालन करते हैं, तो निश्चित रूप से हमें ज्ञान, धन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हमारी सच्ची लगन और भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती। विशेष रूप से आगामी दिवाली जैसे पावन पर्व, जब माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा के द्वार खुले होते हैं, बृहस्पति के उपाय करने से उनके प्रभावों में कई गुना वृद्धि होती है। तो आइए, हम सभी अपने जीवन में देवगुरु बृहस्पति के प्रकाश को आमंत्रित करें, उनके बताए मार्ग पर चलें और ज्ञान, समृद्धि तथा शांतिपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर हों। बृहस्पति देव की जय हो! आपका जीवन सदा शुभ और कल्याणकारी रहे।

