बुधवार के दिन भगवान गणेश की कृपा कैसे पाये
प्रस्तावना
सनातन धर्म में देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाने वाले भगवान श्री गणेश रिद्धि-सिद्धि के दाता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजनीय हैं। उनकी कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मार्ग की बाधाएं समाप्त होती हैं। सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित है, और बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश को समर्पित माना गया है। इस पावन दिन उनकी आराधना करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर अपनी अनुपम कृपा बरसाते हैं। यह दिन बुद्धि, ज्ञान और विवेक का प्रतीक भी है, और गणेश जी इन्हीं गुणों के अधिष्ठाता हैं। अतः जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और निर्मल भाव से इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। आइए जानते हैं कि बुधवार के दिन किस प्रकार हम अपने प्रिय गजानन को प्रसन्न कर उनकी असीम कृपा को प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। उनकी महिमा अनंत है और उनकी भक्ति से सभी संकटों का निवारण होता है।
पावन कथा
प्राचीन काल की बात है, एक नगर में एक अत्यंत धर्मात्मा और कर्मठ व्यापारी रहता था, जिसका नाम धनराज था। धनराज अपने नाम के अनुरूप ही धनवान था, किंतु उसके जीवन में शांति का अभाव था। व्यापार में हमेशा कोई न कोई विघ्न आता रहता था, बनते-बनते कार्य बिगड़ जाते थे, और परिवार में भी छोटी-छोटी बातों पर कलह हो जाती थी। धनराज इन सब बातों से बहुत दुखी रहता था। उसने अनेक देवी-देवताओं की पूजा की, दान-पुण्य किए, पर कोई स्थायी समाधान नहीं मिल रहा था। उसके मन में सदैव एक अज्ञात भय और निराशा बनी रहती थी, जिससे उसका जीवन नीरस होता जा रहा था।
एक दिन, धनराज अपने नगर के एक सिद्ध संत के पास अपनी व्यथा लेकर गया। संत ने उसकी सारी बात धैर्यपूर्वक सुनी और मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोले, “पुत्र, तुम्हारे जीवन में विघ्नों का कारण कुछ और नहीं, बल्कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विशेष कृपा का अभाव है। तुम बुधवार के दिन विशेष रूप से उनकी आराधना करो, तुम्हारे सभी कष्ट अवश्य दूर होंगे और तुम्हें मनचाही शांति प्राप्त होगी।” संत की वाणी में अद्भुत शांति थी, जिसने धनराज के मन को एक नई आशा से भर दिया।
संत ने धनराज को बुधवार के दिन गणेश पूजा की विधि विस्तार से समझाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण कर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें, उन्हें दूर्वा, मोदक, सिन्दूर, और लाल पुष्प अर्पित करें। साथ ही, गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ और ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करने का भी विधान समझाया। संत ने यह भी कहा कि इस पूजा को निरंतर श्रद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिए, तभी पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।
धनराज ने संत के वचनों को हृदय से ग्रहण किया और अगले बुधवार से ही पूरी श्रद्धा और निष्ठा से गणेश पूजा प्रारंभ कर दी। वह प्रत्येक बुधवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करता, स्वच्छ वस्त्र पहनता, और अपने पूजा स्थान में गणेश जी की मूर्ति के समक्ष बैठ जाता। विधि-विधान से दूर्वा अर्पित करता, गुड़ और मोदक का भोग लगाता, और सच्चे मन से मंत्र जाप करता। पहले कुछ हफ्तों तक उसे कोई विशेष परिवर्तन अनुभव नहीं हुआ, किंतु उसने अपनी श्रद्धा नहीं छोड़ी। संत के वचनों पर उसका पूरा विश्वास था और वह जानता था कि भगवान की कृपा देर-सबेर अवश्य होगी।
धीरे-धीरे, कुछ ही महीनों में धनराज के जीवन में अद्भुत परिवर्तन आने लगे। उसके व्यापार में आने वाली बाधाएं स्वतः ही दूर होने लगीं। जो सौदे पहले बिगड़ जाते थे, वे अब सफलतापूर्वक पूरे होने लगे। उसके कर्मचारियों में भी आपसी तालमेल बढ़ने लगा और कार्य कुशलता में वृद्धि हुई। घर का वातावरण भी शांत और सौहार्दपूर्ण हो गया। उसकी पत्नी और बच्चों के बीच प्रेम और समझदारी बढ़ने लगी। परिवार में जो छोटे-मोटे कलह होते थे, वे अब समाप्त हो गए। हर तरफ सकारात्मकता का संचार होने लगा, मानो किसी अदृश्य शक्ति ने उसके जीवन की बागडोर संभाल ली हो।
धनराज यह देखकर आश्चर्यचकित था। उसे लगा कि मानो कोई अदृश्य शक्ति उसके जीवन को संभाल रही है। वह समझ गया कि यह सब भगवान गणेश की कृपा का ही फल है। उसकी धन-संपदा में भी वृद्धि हुई, पर अब वह केवल धन का संग्रह नहीं करता था, बल्कि उसका सदुपयोग भी करता था। उसने गरीबों की सहायता की, धर्मार्थ कार्यों में योगदान दिया, और मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया। उसके मन में परोपकार की भावना जागृत हुई और उसने समाज के कल्याण के लिए भी कार्य करना शुरू कर दिया।
धनराज ने अपनी यह कहानी अपने नगर के अन्य लोगों को भी बताई, और धीरे-धीरे पूरे नगर में बुधवार के दिन गणेश पूजा का महत्व फैल गया। लोग बुधवार को गणेश जी की पूजा करने लगे और उन्होंने भी अपने जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का अनुभव किया। धनराज अब केवल एक व्यापारी नहीं रहा, बल्कि वह एक पूजनीय व्यक्ति बन गया, जिसने अपने उदाहरण से अनेकों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उसकी यह कहानी आज भी यही सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और नियमबद्ध पूजा से भगवान गणेश अवश्य प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी विघ्नों को हर कर उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं। उनकी कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है और जीवन में हर प्रकार की उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। धनराज ने संत को धन्यवाद दिया और अपना शेष जीवन गणेश जी की सेवा और लोगों की भलाई में व्यतीत किया।
दोहा
बुधवार गणपति सुमिरो, विघ्न हरो तत्काल।
ज्ञान, बुद्धि अरु रिद्धि-सिद्धि, पाओ जीवन खुशहाल।।
चौपाई
जय गणेश जय मंगलकारी, सिद्धिविनायक शुभ हितकारी।
मूषक वाहन, मोदक सोहे, भक्तन मन के संशय खोहे।।
एकदंत शुभ्र भाल विराजे, गजमुख सुंदर शीश साजे।
अष्टभुजा धरि शस्त्र सुहाए, विघ्नहर्ता जग जस गाए।।
प्रथम पूज्य तुम देव सुजाना, नाम तिहारो जग कल्याना।
बुधवार को जो तुम्हें ध्यावे, रिद्धि-सिद्धि सब सुख पावे।।
बुद्धि प्रदायक, भाग्य विधाता, भवसागर से पार कराता।
शरण तिहारी जो जन आवे, मनवांछित फल सो नर पावे।।
पाठ करने की विधि
बुधवार के दिन भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें। यह विधि अत्यंत सरल और प्रभावी है, जिसका पालन कोई भी भक्त कर सकता है:
1. **ब्रह्म मुहूर्त में जागरण और स्नान:** बुधवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर अपने नित्य कर्मों से निवृत होकर स्नान करें। स्नान करने के लिए जल में थोड़ी गंगाजल या पवित्र नदियों का जल मिलाना शुभ माना जाता है। स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र धारण करें। संभव हो तो हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि हरा रंग बुध ग्रह और भगवान गणेश दोनों से संबंधित है।
2. **पूजा स्थल की शुद्धि:** अपने पूजा घर को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। एक साफ चौकी या पाटे पर लाल या हरे रंग का नया या धुला हुआ वस्त्र बिछाएं।
3. **गणेश जी की स्थापना:** उस चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि आपके पास बुध यंत्र हो तो उसे भी स्थापित कर सकते हैं। गणेश जी को स्थापित करते समय “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें।
4. **संकल्प:** हाथ में जल, फूल और अक्षत (चावल) लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें। अपनी मनोकामना मन ही मन दोहराते हुए संकल्प लें कि आप पूरी श्रद्धा और निष्ठा से यह पूजा कर रहे हैं। संकल्प लेने से पूजा का फल निश्चित होता है।
5. **पंचोपचार/षोडशोपचार पूजा:** अपनी सामर्थ्य अनुसार पंचोपचार (पांच सामग्री से) या षोडशोपचार (सोलह सामग्री से) पूजा करें:
* **आचमन:** तीन बार शुद्ध जल से आचमन करें।
* **तिलक:** गणेश जी को लाल चंदन या सिन्दूर का तिलक लगाएं। अपने माथे पर भी तिलक लगाएं।
* **पुष्प:** उन्हें लाल या पीले रंग के ताजे पुष्प अर्पित करें। गुड़हल का फूल भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय है, इसे अवश्य चढ़ाएं।
* **दूर्वा:** भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठें (जोड़ी) अर्पित करें। दूर्वा को साफ पानी से धोकर ही चढ़ाएं। यह उन्हें अत्यंत प्रिय है और इससे वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
* **वस्त्र:** उन्हें नए वस्त्र या मौली (पवित्र धागा) अर्पित करें।
* **धूप-दीप:** शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें और सुगंधित धूप-अगरबत्ती जलाएं।
* **नैवेद्य:** मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। यदि मोदक उपलब्ध न हों तो शुद्ध गुड़ और घी का भोग भी लगा सकते हैं। केला, नारियल, बूंदी या अन्य कोई भी शुद्ध मिठाई भी अर्पित की जा सकती है।
6. **मंत्र जाप:** निम्नलिखित मंत्रों में से किसी एक का या अपनी सुविधा अनुसार कई मंत्रों का 108 बार (एक माला) जाप करें। मंत्र जाप रुद्राक्ष या चंदन की माला से करें:
* “ॐ गं गणपतये नमः”
* “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।”
* “श्री गणेशाय नमः”
7. **गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ:** यदि संभव हो तो गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें। यह पाठ अत्यंत फलदायी और विघ्ननाशक माना जाता है। इसका पाठ करने से बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है।
8. **आरती:** पूजा के अंत में कपूर या घी के दीपक से भगवान गणेश की आरती उतारें। आरती के उपरांत शंखनाद करना शुभ होता है।
9. **क्षमा याचना और प्रसाद वितरण:** अपनी किसी भी त्रुटि के लिए भगवान गणेश से क्षमा याचना करें। इसके बाद, प्रसाद सभी घर के सदस्यों में वितरित करें और स्वयं भी ग्रहण करें।
10. **गाय को चारा:** यदि संभव हो तो इस दिन गाय को हरा चारा या पालक खिलाएं। इससे बुध ग्रह भी मजबूत होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस विधि का पालन सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ करने से भगवान गणेश की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी विघ्न दूर होकर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
पाठ के लाभ
बुधवार के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने से भक्त को अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जिनका अनुभव वह अपने जीवन में प्रत्यक्ष रूप से कर सकता है। इन लाभों को प्राप्त करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं:
1. **विघ्न बाधाओं से मुक्ति:** भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। उनकी आराधना से जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं, चुनौतियाँ और रुकावटें दूर होती हैं। कार्यक्षेत्र में, व्यक्तिगत जीवन में, या किसी भी नए कार्य की शुरुआत में आने वाले विघ्न समाप्त हो जाते हैं और कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न होते हैं।
2. **बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति:** गणेश जी बुद्धि के देवता हैं। उनकी पूजा से एकाग्रता बढ़ती है, स्मरण शक्ति तेज होती है, और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार आता है। छात्रों के लिए यह पूजा विशेष रूप से फलदायी है, जिससे वे अपनी पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पाते हैं और परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हैं।
3. **समृद्धि और धन लाभ:** भगवान गणेश रिद्धि-सिद्धि के दाता हैं। बुधवार के दिन उनकी पूजा करने से आर्थिक परेशानियाँ दूर होती हैं, धन आगमन के नए मार्ग खुलते हैं, और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। दरिद्रता का नाश होता है और व्यक्ति ऐश्वर्यशाली बनता है।
4. **सौभाग्य में वृद्धि:** गणेश जी की कृपा से सौभाग्य बढ़ता है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है, चाहे वह करियर हो, व्यापार हो, या निजी संबंध हों। अटके हुए कार्य पूरे होते हैं और व्यक्ति हर कार्य में विजय प्राप्त करता है।
5. **ग्रह दोष निवारण:** बुध ग्रह का संबंध भी भगवान गणेश से है। बुधवार को उनकी पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, जिससे वाणी दोष, संचार संबंधी समस्याएँ, व्यापारिक हानि और मानसिक अस्थिरता जैसे दोष दूर होते हैं।
6. **मानसिक शांति और सकारात्मकता:** गणेश जी की भक्ति से मन को शांति मिलती है। नकारात्मक विचार दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। व्यक्ति तनावमुक्त होकर जीवन का आनंद ले पाता है और उसका चित्त शांत रहता है।
7. **पारिवारिक सुख:** घर में क्लेश और अशांति दूर होकर प्रेम और सद्भाव का वातावरण बनता है। परिवार के सदस्यों के बीच संबंध मजबूत होते हैं और आपसी समझ बढ़ती है, जिससे घर स्वर्ग के समान लगता है।
8. **स्वास्थ्य लाभ:** कुछ मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की पूजा से रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य बेहतर होता है। शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के स्वास्थ्य में सुधार आता है।
इन सभी अलौकिक लाभों को प्राप्त करने के लिए सच्ची निष्ठा और अटूट श्रद्धा के साथ बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पूजा जीवन को सफल और सार्थक बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
नियम और सावधानियाँ
भगवान गणेश की बुधवार की पूजा में कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके और कोई अनिष्ट न हो। इन बातों का ध्यान रखने से पूजा की पवित्रता बनी रहती है:
1. **पवित्रता और स्वच्छता:** पूजा से पूर्व शरीर और मन की पवित्रता अनिवार्य है। स्नान करके स्वच्छ और धुले हुए वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल भी स्वच्छ होना चाहिए। पूजा के दौरान किसी भी प्रकार के अपवित्र विचार मन में न लाएं।
2. **दूर्वा का महत्व:** गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। दूर्वा हमेशा 21 गांठों (जोड़ियों) में अर्पित करें। दूर्वा स्वच्छ और ताज़ी होनी चाहिए, मुरझाई हुई दूर्वा का प्रयोग वर्जित है।
3. **तुलसी का त्याग:** भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग वर्जित है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, तुलसी ने गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दिया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था, तब तुलसी ने उन्हें श्राप दिया था। इसलिए गणेश जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। इस नियम का विशेष ध्यान रखें।
4. **सही भोग:** मोदक या लड्डू गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं। यदि ये उपलब्ध न हों, तो शुद्ध गुड़ और घी का भोग भी शुद्ध भाव से लगा सकते हैं। तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांसाहार का सेवन इस दिन करने से बचें। केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें।
5. **ब्रह्मचर्य का पालन:** यदि आप विशेष अनुष्ठान या लंबी पूजा कर रहे हैं, तो बुधवार के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है। इससे मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रहता है।
6. **दान का महत्व:** पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को दान करना या हरी मूंग की दाल का दान करना अत्यंत शुभ होता है। गाय को हरा चारा खिलाने से भी विशेष पुण्य मिलता है और बुध ग्रह मजबूत होता है।
7. **अहिंसा और सत्य:** इस दिन किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं और सत्य का पालन करें। किसी से कटु वचन न बोलें और झगड़े से बचें। मन में शांति और करुणा का भाव रखें।
8. **लोहे की वस्तु का त्याग:** बुधवार के दिन लोहे की नई वस्तु खरीदना या घर लाना अशुभ माना जाता है। इससे बुध ग्रह का दुष्प्रभाव हो सकता है।
9. **पूजा में निरंतरता:** केवल एक या दो बुधवार पूजा करके फल की अपेक्षा न करें। श्रद्धा और धैर्य के साथ निरंतर पूजा करने से ही स्थायी और बड़े लाभ मिलते हैं। नियमितता ही सफलता की कुंजी है।
10. **चन्द्र दर्शन से बचें:** कुछ मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी के चन्द्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए, किंतु सामान्य बुधवार की पूजा में यह नियम उतना कठोर नहीं है। फिर भी, यदि संभव हो तो सावधानी बरतें।
इन नियमों का पालन करते हुए भगवान गणेश की पूजा करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
निष्कर्ष
बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश की कृपा प्राप्त करने का एक अनुपम अवसर है। वे सभी देवताओं में प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता हैं। उनकी सच्ची श्रद्धा और निर्मल मन से की गई आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती। इस दिन विधि-विधान से उनकी पूजा करके, मोदक और दूर्वा अर्पित करके, और उनके मंत्रों का जाप करके हम अपने जीवन के समस्त कष्टों को दूर कर सकते हैं और सफलता के नए द्वार खोल सकते हैं। धनराज की पावन कथा हमें यही सिखाती है कि धैर्य और विश्वास के साथ की गई भक्ति असंभव को भी संभव बना देती है। गणेश जी की कृपा से हमारा मार्ग सदैव प्रशस्त रहता है और हम हर चुनौती को पार कर पाते हैं। तो आइए, हम सभी इस पवित्र दिन को गणेश जी की भक्ति में समर्पित करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सुखमय, समृद्ध और शांतिपूर्ण बनाएं। उनकी कृपा से हमारे मार्ग के सभी विघ्न स्वतः ही मिट जाएंगे और हमें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी। मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश सदैव अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा! उनकी महिमा अपरम्पार है और उनकी भक्ति से जीवन धन्य हो जाता है।

