## नवरात्रि में ‘या देवी सर्वभूतेषु’: अपनी आंतरिक शक्ति जगाने का दिव्य रहस्य!
नवरात्रि का पावन पर्व, शक्ति और भक्ति का प्रतीक, हम सभी के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। यह नौ दिन माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की उपासना और उनके दिव्य गुणों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करते हैं। इस दौरान कई मंत्रों और श्लोकों का जाप किया जाता है, जिनमें से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी श्लोक है – **’या देवी सर्वभूतेषु’**।
यह श्लोक मात्र शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य समेटे हुए है, जो हमें अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और जगाने का मार्ग दिखाता है। आइए, इस नवरात्रि में हम इस शक्तिशाली देवी मंत्र के अर्थ, महत्व और अपनी आंतरिक ऊर्जा से इसके जुड़ाव को समझें।
### ‘या देवी सर्वभूतेषु’ श्लोक: एक गहन परिचय
यह श्लोक ‘दुर्गा सप्तशती’ (जिसे देवी महात्म्य भी कहते हैं) का एक अभिन्न अंग है। दुर्गा सप्तशती में माँ भगवती की महिमा का वर्णन किया गया है, और यह श्लोक बताता है कि देवी केवल किसी एक स्थान या रूप में नहीं, बल्कि हर जीवित प्राणी और हर कण में विद्यमान हैं।
**श्लोक:**
**या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते।**
**नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥**
**या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।**
**नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥**
**(और इसी तरह अन्य रूपों में)**
### श्लोक का अर्थ और उसकी गहरी समझ (Meaning of Ya Devi Sarvabhuteshu)
इस श्लोक का मूल अर्थ यह है कि **जो देवी सभी प्राणियों में चेतना, बुद्धि, निद्रा, स्मृति, शांति, दया, क्षमा, शक्ति, माता और लक्ष्मी आदि विभिन्न रूपों में निवास करती हैं, उन देवी को बार-बार नमस्कार है।**
यह श्लोक हमें सिखाता है कि जिस दिव्य शक्ति की हम बाहर पूजा करते हैं, वह वास्तव में हमारे भीतर और हमारे आसपास के हर जीव में मौजूद है। यह एक अत्यंत समावेशी दृष्टिकोण है जो बताता है कि:
* **चेतना (Consciousness):** हर प्राणी में जागृति और जीवन की जो भावना है, वह देवी ही हैं।
* **बुद्धि (Intelligence):** सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता भी देवी का ही स्वरूप है।
* **शक्ति (Power):** हर प्राणी में कार्य करने, संघर्ष करने और आगे बढ़ने की जो शक्ति है, वह देवी ही हैं।
* **शांति (Peace):** मन की स्थिरता और आंतरिक संतोष भी देवी का ही अंश है।
* **दया (Compassion):** दूसरों के प्रति करुणा और प्रेम की भावना भी देवी की उपस्थिति का प्रमाण है।
इस प्रकार, यह श्लोक हमें सिर्फ माँ दुर्गा के किसी विशेष रूप की पूजा नहीं सिखाता, बल्कि जीवन के हर पहलू में दिव्य स्त्री शक्ति (Devine Feminine Energy) को पहचानने की दृष्टि देता है।
### आंतरिक शक्ति का रहस्य (Inner Power Shloka Navratri)
‘या देवी सर्वभूतेषु’ का जाप हमें यह याद दिलाता है कि जिस शक्ति को हम बाहर खोजते हैं, वह हमारे स्वयं के भीतर निवास करती है। जब हम इस श्लोक का अर्थ समझते हुए जाप करते हैं, तो यह हमारी आंतरिक शक्ति को जगाने का एक शक्तिशाली मंत्र बन जाता है।
1. **आत्म-पहचान:** यह हमें अपनी वास्तविक क्षमता और छिपी हुई शक्तियों को पहचानने में मदद करता है। हमें यह बोध होता है कि हम स्वयं भी उस दिव्य शक्ति का अंश हैं।
2. **आत्म-विश्वास में वृद्धि:** जब हमें यह विश्वास हो जाता है कि देवी हमारे भीतर ही विराजमान हैं, तो भय और संदेह दूर होते हैं। हमारा आत्म-विश्वास बढ़ता है और हम चुनौतियों का सामना अधिक दृढ़ता से कर पाते हैं।
3. **सकारात्मकता का संचार:** इस श्लोक का चिंतन हमें जीवन और जगत के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण देता है। हम हर प्राणी में देवत्व को देखना शुरू करते हैं, जिससे हमारे संबंध बेहतर होते हैं और मन में शांति आती है।
4. **लक्ष्य प्राप्ति में सहायक:** आंतरिक शक्ति के जागृत होने से हमारे संकल्प मजबूत होते हैं और हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अधिक ऊर्जावान और केंद्रित महसूस करते हैं।
### नवरात्रि में शक्ति उपासना का महत्व (Shakti Upasana Navratri)
नवरात्रि शक्ति उपासना का चरम समय है। इन नौ दिनों में ब्रह्मांड में दिव्य ऊर्जा का प्रवाह तीव्र होता है। ‘या देवी सर्वभूतेषु’ जैसे मंत्रों का जाप इस ऊर्जा से जुड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है। यह हमें सिखाता है कि शक्ति केवल बल या पराक्रम में नहीं, बल्कि चेतना, बुद्धि, शांति और प्रेम जैसे सूक्ष्म गुणों में भी निहित है।
नवरात्रि में इस श्लोक का पाठ करने से हम न केवल माँ दुर्गा का आवाहन करते हैं, बल्कि अपने भीतर की देवी शक्ति को भी जागृत करते हैं। यह हमें स्त्री शक्ति के विभिन्न पहलुओं – सृजन, पोषण, सुरक्षा और संहार – को समझने और उनका सम्मान करने की प्रेरणा देता है।
### निष्कर्ष: दिव्य ऊर्जा से भरें अपना जीवन
‘या देवी सर्वभूतेषु’ श्लोक मात्र एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है। यह हमें सिखाता है कि देवत्व को कहीं और खोजने की बजाय, अपने भीतर और अपने आसपास के हर जीव में देखना सीखें। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर, इस शक्तिशाली मंत्र का जाप करें, इसके अर्थ पर मनन करें, और अपनी आंतरिक शक्ति के अनंत स्रोत से जुड़ें।
जब आप हर जीव में देवी को देखना शुरू करेंगे, तो आपका जीवन प्रेम, शांति और अदम्य शक्ति से भर उठेगा। इस नवरात्रि, माँ भगवती की कृपा से आप अपनी सच्ची आंतरिक शक्ति को पहचानें और एक सशक्त, सकारात्मक जीवन की ओर अग्रसर हों।
**जय माता दी!**

