धनतेरस: सुख-समृद्धि और आरोग्य का महापर्व – भगवान धन्वंतरि की कथा और महत्व

धनतेरस: सुख-समृद्धि और आरोग्य का महापर्व – भगवान धन्वंतरि की कथा और महत्व

## धनतेरस: सुख-समृद्धि और आरोग्य का महापर्व – भगवान धन्वंतरि की कथा और महत्व

दीपावली का पांच दिवसीय महापर्व धनतेरस के साथ ही आरंभ हो जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। ‘धन’ का अर्थ है धन-संपत्ति और ‘तेरस’ का अर्थ है तेरहवाँ दिन। यह दिन धन, समृद्धि, आरोग्य और सुख का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। आइए जानते हैं धनतेरस के इस महत्वपूर्ण पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा और इसके महत्व को विस्तार से।

### भगवान धन्वंतरि की प्राकट्य कथा

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को देवताओं के वैद्य के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन ही भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे भगवान विष्णु के ही अंशावतार माने जाते हैं और आयुर्वेद के जनक हैं। उनके प्राकट्य के साथ ही संसार को आरोग्य और जीवन का रहस्य प्राप्त हुआ। यही कारण है कि धनतेरस के दिन विशेष रूप से अच्छे स्वास्थ्य और रोगमुक्त जीवन के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है।

### धनतेरस का आध्यात्मिक और लौकिक महत्व

धनतेरस केवल धन एकत्रित करने का पर्व नहीं, बल्कि यह जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य के संतुलन का प्रतीक है। यह पर्व हमें आध्यात्मिक जागृति के साथ-साथ भौतिक उन्नति का भी संदेश देता है।

1. **आरोग्य और उत्तम स्वास्थ्य:** इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से व्यक्ति को निरोगी काया और दीर्घायु का वरदान मिलता है। यह आयुर्वेद के महत्व को भी दर्शाता है, जो हमें प्रकृति के करीब रहकर स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। लोग इस दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरि की स्तुति करते हैं और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

2. **धन और समृद्धि:** धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की भी विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन सोने, चांदी या नए बर्तनों की खरीदारी करना अत्यंत शुभ होता है। यह घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। लोग इस दिन अपने घरों को साफ-सुथरा कर दीपों से सजाते हैं, ताकि माता लक्ष्मी उनके घर में वास करें। नई वस्तुओं की खरीदारी को भी समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

3. **यम दीपम की परंपरा:** धनतेरस की शाम को यमराज के निमित्त दीपदान करने की भी परंपरा है। इसे ‘यम दीपम’ या ‘यमराज का दीपक’ कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय टल जाता है और परिवार के सदस्यों को यमराज के प्रकोप से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाया जाता है, जिससे परिवार के सदस्यों की रक्षा होती है।

### पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन सायंकाल में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। पूजा के लिए एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर इन देवी-देवताओं की प्रतिमा या चित्र स्थापित किए जाते हैं। इसके बाद धूप, दीप, फूल, फल, नैवेद्य और पंचामृत से पूजा की जाती है। साथ ही धन्वंतरि स्तोत्र और लक्ष्मी चालीसा का पाठ भी किया जाता है। खरीदारी के लिए भी शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि उसका पूर्ण लाभ मिल सके।

### निष्कर्ष

धनतेरस का पर्व हमें यह सिखाता है कि वास्तविक धन केवल भौतिक संपत्ति नहीं, बल्कि उत्तम स्वास्थ्य, आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक जीवन दृष्टि भी है। यह पर्व हमें निरोगी जीवन, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण होने का अवसर प्रदान करता है। आइए, इस धनतेरस पर हम सब मिलकर आरोग्य और ऐश्वर्य के इन देवताओं का स्मरण करें और अपने जीवन को प्रकाशमय बनाएं।

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