दीपावली: अंधकार से प्रकाश की ओर एक दिव्य यात्रा

दीपावली: अंधकार से प्रकाश की ओर एक दिव्य यात्रा

नमस्कार दोस्तों!

जब भी ‘त्योहार’ शब्द मन में आता है, तो एक उत्साह, उमंग और खुशियों का सैलाब उमड़ पड़ता है। और इन्हीं त्योहारों में से एक है दीपावली – जिसे हम ‘प्रकाश पर्व’ के नाम से जानते हैं। यह सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि पाँच दिनों तक चलने वाला एक महापर्व है जो हमारे जीवन में नई रोशनी, समृद्धि और खुशियों का संचार करता है। दीपावली केवल बाहरी अंधकार को मिटाने का पर्व नहीं, बल्कि हमारे भीतर के अज्ञान, नकारात्मकता और बुराई के अंधकार को दूर कर ज्ञान, प्रेम और सकारात्मकता के प्रकाश को प्रज्वलित करने का भी प्रतीक है।

### दीपावली का आध्यात्मिक महत्व और उससे जुड़ी पावन कथाएँ:

दीपावली के हर दिन का अपना एक विशेष महत्व और उससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ हैं जो हमें जीवन के गहरे सत्य से अवगत कराती हैं:

1. **धनतेरस (पहला दिन):**
यह पर्व भगवान धन्वंतरि के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें आयुर्वेद का जनक माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी या नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएँ तेरह गुना बढ़ती हैं। यह दिन स्वास्थ्य और धन दोनों के महत्व को दर्शाता है।

2. **नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली (दूसरा दिन):**
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध कर सोलह हजार कन्याओं को उसके कारावास से मुक्त कराया था। यह दिन बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और यमराज के लिए दीप दान करने की परंपरा है, जिससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

3. **दीपावली / लक्ष्मी पूजा (तीसरा दिन – मुख्य पर्व):**
यह दीपावली का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, जिसकी खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसलिए, इस दिन धन और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी और ज्ञान तथा बुद्धि के देवता भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। घरों को दीयों और रंगोलियों से सजाया जाता है, और चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की हमेशा विजय होती है।

4. **गोवर्धन पूजा (चौथा दिन):**
यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के अहंकार को तोड़ने और गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन गायों और प्रकृति का सम्मान किया जाता है। लोग गोबर से गोवर्धन पर्वत का चित्र बनाकर पूजा करते हैं और अन्नकूट का भोग लगाते हैं। यह हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।

5. **भाई दूज (पाँचवाँ दिन):**
यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट रिश्ते को समर्पित है। पौराणिक कथा के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे और उन्हें वरदान दिया था कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाएगा और उसके हाथ का भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा। बहनें अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं।

### निष्कर्ष:

दीपावली केवल दीयों और पटाखों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर और बाहर के अंधकार को दूर कर प्रेम, सद्भाव, समृद्धि और ज्ञान के प्रकाश को फैलाने का पर्व है। यह हमें एकजुटता, दया और क्षमा जैसे मानवीय मूल्यों की याद दिलाता है। आइए, हम इस दीपावली पर सिर्फ अपने घरों को ही नहीं, बल्कि अपने मन-मस्तिष्क को भी शुद्ध करें और चारों ओर खुशियों और सकारात्मकता की रोशनी फैलाएँ। आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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