जय जय गिरिराज किशोरी भजन: नवरात्रि में मां पार्वती की कृपा, सौभाग्य और गृह शांति का द्वार

जय जय गिरिराज किशोरी भजन: नवरात्रि में मां पार्वती की कृपा, सौभाग्य और गृह शांति का द्वार

जय जय गिरिराज किशोरी भजन: नवरात्रि में मां पार्वती की कृपा, सौभाग्य और गृह शांति का द्वार

सनातन धर्म में देवियों की स्तुति और उपासना का विशेष महत्व है। शक्ति स्वरूपा मां पार्वती, भगवान शिव की अर्धांगिनी और समस्त जगत की आदिशक्ति हैं। उनके अनेक रूप हैं, जिनमें से एक है ‘गिरिराज किशोरी’ – पर्वतों के राजा हिमालय की पुत्री। “जय जय गिरिराज किशोरी” यह मात्र एक भजन नहीं, बल्कि मां पार्वती के प्रति अटूट श्रद्धा और प्रेम का उद्घोष है, जो भक्तों के जीवन में अलौकिक सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है। विशेषकर नवरात्रि के पावन दिनों में, इस भजन का गायन भक्तों को असीम लाभ प्रदान करता है। आइए, इस पावन भजन की गहराइयों में उतरें और जानें कि कैसे यह हमारे जीवन को मां के दिव्य आशीर्वाद से आलोकित कर सकता है, हमें सौभाग्य से परिपूर्ण कर सकता है और हमारे घरों को शांति से भर सकता है।

मां गिरिराज किशोरी की दिव्य कथा: तपस्या, प्रेम और शक्ति का प्रतीक

हमारी धर्म गाथाओं में मां पार्वती का जन्म और उनकी तपस्या की कहानी अत्यंत प्रेरणादायक है। वे पर्वतों के राजा हिमवान (गिरिराज) और रानी मैना की पुत्री थीं, इसीलिए उन्हें ‘गिरिराज किशोरी’ या ‘शैलपुत्री’ कहा जाता है। बचपन से ही उनमें भगवान शिव के प्रति अगाध प्रेम और भक्ति थी। उनकी एकमात्र इच्छा भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करना था। यह कोई सामान्य इच्छा नहीं थी, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन और धर्म की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थी।

भगवान शिव, सती के वियोग में गहरे ध्यान में लीन थे और किसी भी सांसारिक बंधन से दूर थे। उन्हें पुनः गृहस्थ जीवन में लाना अत्यंत कठिन कार्य था। तब मां पार्वती ने कठोर तपस्या का मार्ग चुना। उन्होंने अपने राजसी जीवन का त्याग कर दिया, वनों में निवास किया और अन्न-जल का त्याग कर दिया। उन्होंने केवल वायु पीकर, पत्तों पर रहकर और अंत में निराहार रहकर भी अपनी तपस्या जारी रखी। यह तपस्या इतनी भीषण थी कि देवता भी विस्मित रह गए। उनकी तपस्या की अग्नि से तीनों लोक प्रकंपित हो उठे।

देवताओं ने कामदेव को भगवान शिव के ध्यान को भंग करने के लिए भेजा, ताकि शिव और पार्वती का विवाह हो सके और तारकासुर जैसे राक्षसों का विनाश हो सके, जो शिव-पार्वती के पुत्र से ही संभव था। कामदेव ने अपने बाण चलाए, जिससे भगवान शिव का ध्यान भंग हुआ और क्रोधित शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया।

परंतु मां पार्वती अपनी तपस्या से विचलित नहीं हुईं। उन्होंने अपने संकल्प को और दृढ़ किया। उनकी अडिग भक्ति और त्याग देखकर अंततः भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने स्वयं पार्वती की परीक्षा ली, उनके सामने एक ब्राह्मण के वेश में आकर शिव की निंदा की, पर पार्वती अपने निश्चय पर अडिग रहीं। इस पर प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें दर्शन दिए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह एक ऐसे मिलन का प्रतीक है, जहाँ शक्ति और शिव, प्रकृति और पुरुष, सृजन और संहार एक साथ आते हैं। यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं का मिलन था, जिसने सृष्टि में संतुलन स्थापित किया। मां पार्वती, शिव की शक्ति बनकर, संपूर्ण जगत का कल्याण करती हैं। उनकी यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची लगन, अटूट विश्वास और अथक प्रयास से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। “जय जय गिरिराज किशोरी” भजन इस महान कथा और मां पार्वती के दिव्य स्वरूप का गुणगान करता है, उनकी तपस्या, उनके प्रेम और उनकी शक्ति का स्मरण कराता है। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम इस भजन को गाते हैं, तो हम उस परम शक्ति का आह्वान करते हैं, जो हमें हर बाधा से लड़ने और जीवन में सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा देती है। यह भजन हमें मां के उसी ममतामयी रूप से जोड़ता है, जो भक्तों को हर दुःख से मुक्ति दिलाकर उन्हें सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती है।

“जय जय गिरिराज किशोरी” भजन का आध्यात्मिक और लौकिक महत्व

“जय जय गिरिराज किशोरी” भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली मंत्र है जो मां पार्वती की दिव्य ऊर्जा को आकर्षित करता है। इस भजन का नियमित पाठ या श्रवण हमें कई आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ प्रदान करता है:

  • नवरात्रि लाभ और मां पार्वती का आशीर्वाद: नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है, जिनमें से शैलपुत्री (गिरिराज किशोरी) पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण स्वरूप हैं। इस भजन का गायन नवरात्रि के दौरान मां के आशीर्वाद को सीधे आकर्षित करता है। मां पार्वती अपने भक्तों को शक्ति, साहस और धैर्य प्रदान करती हैं। वे जीवन की कठिनाइयों को दूर कर विजय का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
  • सौभाग्य की प्राप्ति: मां पार्वती को सौभाग्य की देवी माना जाता है। वे सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं और कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर प्रदान करती हैं। इस भजन का नियमित जाप विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करता है, वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ाता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है। यह भजन रिश्तों में मधुरता घोलता है और पारिवारिक जीवन को आनंदमय बनाता है।
  • घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा: जहां मां पार्वती का वास होता है, वहां कलह और अशांति दूर हो जाती है। यह भजन घर के वातावरण को शुद्ध करता है, नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर भगाता है और सकारात्मकता का संचार करता है। घर में शांति, समृद्धि और प्रेम का वातावरण निर्मित होता है। यह भजन परिवार के सदस्यों के बीच सौहार्द को बढ़ाता है और उन्हें एक दूसरे के प्रति अधिक स्नेही बनाता है।
  • आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास: मां पार्वती शक्ति का प्रतीक हैं। उनका स्मरण करने से भक्तों में आंतरिक शक्ति, आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है। वे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होते हैं और किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होते। यह भजन हमें अपनी कमजोरियों से लड़ने और अपने अंदर की शक्ति को पहचानने में मदद करता है।
  • मनोकामना पूर्ति: सच्चे हृदय से मां पार्वती का स्मरण करने से और इस भजन को गाने से उनकी कृपा प्राप्त होती है, जिससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वे अपने इच्छित लक्ष्यों को प्राप्त कर पाते हैं और जीवन में सफलता अर्जित करते हैं। यह भजन हमें अपने आध्यात्मिक और भौतिक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता करता है।
  • रोग मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ: मां पार्वती को आरोग्य और कल्याण की देवी भी माना जाता है। उनके आशीर्वाद से शारीरिक और मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है। इस भजन का नियमित पाठ भक्तों को स्वस्थ और दीर्घायु बनाता है।

“जय जय गिरिराज किशोरी” भजन की उपासना विधि

“जय जय गिरिराज किशोरी” भजन का पाठ या श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, पर कुछ विशेष रीति-रिवाज इसके प्रभाव को और बढ़ा देते हैं:

  • समय: नवरात्रि के नौ दिन, प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार का दिन मां पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह स्नान करने के बाद और शाम को संध्या वंदन के समय इस भजन का जाप करना विशेष फलदायी होता है।
  • स्थान: घर के पूजा स्थल पर, मंदिर में या किसी भी शांत और पवित्र स्थान पर बैठकर इस भजन का पाठ करें।
  • विधि:
    1. सर्वप्रथम स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    2. पूजा स्थल पर मां पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
    3. एक दीपक प्रज्वलित करें (घी या तेल का)।
    4. मां को लाल पुष्प, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, धूप और नैवेद्य (मिठाई या फल) अर्पित करें।
    5. शांत मन से, पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ “जय जय गिरिराज किशोरी” भजन का कम से कम 11, 21, 51 या 108 बार जाप करें। आप भजन को सुन भी सकते हैं।
    6. जाप के पश्चात मां पार्वती की आरती करें और उनसे अपने कष्टों को दूर करने तथा मनोकामनाओं को पूर्ण करने की प्रार्थना करें।
    7. अंत में, परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
  • भाव: सबसे महत्वपूर्ण है सच्चा भाव और अटूट श्रद्धा। मां केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि हृदय की पवित्रता और भक्ति देखती हैं।

निष्कर्ष: मां गिरिराज किशोरी का आशीर्वाद और जीवन में परिवर्तन

“जय जय गिरिराज किशोरी” भजन मां पार्वती के उस दिव्य स्वरूप का आह्वान है, जो शक्ति, प्रेम और तपस्या का प्रतिरूप हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन की हर चुनौती का सामना धैर्य और विश्वास के साथ किया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे मां पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्राप्त किया। नवरात्रि जैसे पावन पर्वों पर या किसी भी सामान्य दिन जब हम इस भजन को गाते हैं, तो हम स्वयं को उस आदि शक्ति से जोड़ते हैं जो हमें सुरक्षा, सौभाग्य, गृह शांति और समस्त लौकिक एवं पारलौकिक लाभ प्रदान करती है। मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने और अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भरने के लिए “जय जय गिरिराज किशोरी” भजन को अपनी दैनिक साधना का अभिन्न अंग बनाएं। मां गिरिराज किशोरी की कृपा आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे। जय माता दी!

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