हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा अनिवार्य मानी जाती है। वे विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और सुख-समृद्धि के प्रतीक हैं। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को उनके जन्मोत्सव के रूप में ‘गणेश चतुर्थी’ का महापर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में दस दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत गणेश स्थापना से होती है और समापन अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ होता है। आइए जानते हैं इस अद्भुत पर्व का महत्व और इसकी पौराणिक कथा।
### गणेश चतुर्थी का पौराणिक महत्व और कथा:
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने अपने शरीर के मैल से एक बालक को बनाया और उसमें प्राण फूँक दिए। उन्होंने उस बालक को अपनी गुफा के द्वार पर पहरा देने का आदेश दिया, जबकि वे स्नान कर रही थीं। उसी समय भगवान शिव अंदर आने लगे, तो बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर क्रोधित होकर शिवजी ने बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया। माता पार्वती जब बाहर आईं और अपने पुत्र का यह हाल देखा, तो वे अत्यंत क्रोधित हुईं और उन्होंने सृष्टि का विनाश करने की धमकी दी।
सभी देवी-देवताओं ने उनसे क्षमा याचना की। तब शिवजी ने देवताओं को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा में जाएं और जो भी पहला प्राणी मिले, उसका सिर लेकर आएं। देवता एक हाथी के बच्चे का सिर लेकर आए, जिसे शिवजी ने बालक के धड़ पर लगा दिया और उसे पुनः जीवित कर दिया। इस प्रकार गजमुख वाले बालक का नाम ‘गणेश’ पड़ा और उन्हें यह वरदान मिला कि किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की जाएगी। तभी से वे ‘प्रथम पूज्य’ कहलाए।
### गणेश चतुर्थी पूजन विधि:
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा विशेष फलदायी होती है। यहाँ एक सरल पूजा विधि दी गई है:
1. **स्थापना:** चतुर्थी के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर, एक स्वच्छ चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान गणेश की मिट्टी या धातु की प्रतिमा स्थापित करें।
2. **संकल्प:** हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर गणेश जी के सामने अपनी मनोकामना पूर्ति का संकल्प लें।
3. **पूजन सामग्री:** गणेश जी को दूर्वा (घास), लाल फूल, सिंदूर, मोदक या लड्डू, फल, पान-सुपारी, वस्त्र, जनेऊ आदि श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
4. **मंत्र जाप:** “ॐ गं गणपतये नमः” या “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।” मंत्र का जाप करें।
5. **आरती:** गणेश चालीसा का पाठ करें और घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें।
6. **भोग:** गणेश जी को मोदक अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उन्हें मोदक या अन्य मीठे पकवानों का भोग लगाएं।
7. **विसर्जन:** दसवें दिन, अनंत चतुर्दशी पर, भगवान गणेश की प्रतिमा का श्रद्धापूर्वक विसर्जन करें, उनसे अगले वर्ष फिर आने का आह्वान करें।
### गणेश चतुर्थी का महत्व:
इस दिन भगवान गणेश की सच्चे मन से पूजा करने से वे भक्तों के सभी विघ्न दूर करते हैं और उन्हें बुद्धि, समृद्धि, यश और शांति प्रदान करते हैं। यह पर्व एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है, जहाँ लोग एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
### निष्कर्ष:
गणेश चतुर्थी का पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में किसी भी बाधा को दूर करने के लिए सर्वप्रथम ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। भगवान गणेश की कृपा से हमारे जीवन में शुभता और सकारात्मकता का संचार होता है। तो आइए, इस गणेश चतुर्थी पर हम सब मिलकर गणपति बप्पा का स्वागत करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को सफल बनाएं।
**गणपति बप्पा मोरया!**

