गणेश चतुर्थी: ज्ञान, समृद्धि और विघ्नहर्ता का महापर्व
सनातन धर्म में अनेक पर्व और उत्सव मनाए जाते हैं, जो जीवन में नई ऊर्जा और आध्यात्मिकता भर देते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और हर्षोल्लास भरा पर्व है – गणेश चतुर्थी। यह पावन अवसर भगवान श्री गणेश के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है सभी बाधाओं को दूर करने वाले। कोई भी शुभ कार्य हो, सर्वप्रथम श्री गणेश की पूजा की जाती है ताकि वह निर्विघ्न संपन्न हो सके।
गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?
गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है और यह अनंत चतुर्दशी तक चलता है, जब भक्तगण भगवान गणेश को विदाई देते हैं। यह पर्व मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, तेलंगाना, गुजरात और उत्तर प्रदेश सहित पूरे भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन अपने घरों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते हैं और दस दिनों तक उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
भगवान गणेश के जन्म की अद्भुत कथा
भगवान गणेश के जन्म की कथा अत्यंत रोचक और दिव्य है, जो हमें भक्ति, त्याग और मातृत्व की शक्ति का संदेश देती है।
माता पार्वती और गणेश का उद्भव
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थीं। उन्होंने नंदी सहित अपने सभी गणों को द्वार पर रखवाली के लिए तैनात कर दिया था, लेकिन वे चाहती थीं कि कोई ऐसा हो जो केवल उन्हीं के आदेशों का पालन करे। तब उन्होंने अपने शरीर के मैल और चंदन से एक बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण फूंक दिए। यह बालक अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली था। माता पार्वती ने उसे द्वार पर खड़े रहने और किसी को भी अंदर न आने देने का आदेश दिया।
शिवजी का क्रोध और गणेश का शीश
कुछ समय बाद, भगवान शिव वहाँ आए और अंदर जाने लगे। बालक गणेश ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, क्योंकि वह अपनी माता के आदेश का पालन कर रहा था। भगवान शिव को लगा कि यह बालक उन्हें क्यों रोक रहा है, और वे क्रोधित हो उठे। कई प्रयासों के बाद भी जब बालक नहीं हटा, तो भगवान शिव ने त्रिशूल से उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया।
गजमुख गणपति की प्रतिष्ठा
जब माता पार्वती को इस बात का पता चला, तो वे अत्यंत क्रोधित और दुःखी हुईं। उन्होंने अपने पुत्र को पुनः जीवित करने का हठ किया। भगवान शिव ने उनकी व्यथा देखकर सभी देवताओं को आदेश दिया कि वे उत्तर दिशा की ओर जाएं और जो भी पहला प्राणी मिले, उसका मस्तक ले आएं। देवता एक हाथी का मस्तक ले आए। भगवान शिव ने उस मस्तक को बालक के धड़ पर स्थापित किया और उसे पुनः जीवित कर दिया। इस प्रकार, गजमुख गणपति का जन्म हुआ। भगवान शिव ने उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया और यह वरदान दिया कि कोई भी शुभ कार्य उनके पूजन के बिना सफल नहीं होगा।
गणेश चतुर्थी का महत्व और संदेश
- ज्ञान और बुद्धि के प्रदाता: भगवान गणेश को ‘बुद्धि के देवता’ के रूप में पूजा जाता है। उनकी पूजा से विद्या, ज्ञान और एकाग्रता में वृद्धि होती है।
- विघ्नहर्ता और मंगलकारी: वे सभी बाधाओं और विघ्नों को दूर करते हैं। उनकी उपस्थिति से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
- नई शुरुआत का प्रतीक: गणेश चतुर्थी नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। भक्त इस दिन नई परियोजनाओं या व्यवसायों का आरंभ करते हैं।
- एकता और भाईचारे का संदेश: यह पर्व समुदायों को एक साथ लाता है, जहां लोग पंडालों में इकट्ठा होकर आरती और भजन करते हैं, जिससे एकता और सौहार्द बढ़ता है।
कैसे मनाएं गणेश चतुर्थी का पावन पर्व? (पूजा विधि)
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की जाती है।
- स्थापना: शुभ मुहूर्त में मिट्टी या धातु की भगवान गणेश की प्रतिमा घर में स्थापित करें।
- पूजा: उन्हें मोदक (जो उन्हें अत्यंत प्रिय हैं), दूर्वा घास, लाल गुड़हल के फूल, सिंदूर, नारियल और फल अर्पित करें।
- आरती और मंत्र: गणेश चालीसा का पाठ करें, गणेश मंत्रों का जाप करें और श्रद्धापूर्वक आरती उतारें।
- भोग: प्रतिदिन भगवान को नए भोग लगाएं, जिसमें मोदक, लड्डू और फल शामिल हों।
- विसर्जन: अनंत चतुर्दशी के दिन, ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारों के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा का जल में विसर्जन किया जाता है। यह विसर्जन इस संदेश के साथ होता है कि भगवान अगले वर्ष पुनः आएंगे और सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लाएंगे।
निष्कर्ष: विघ्नहर्ता का आशीर्वाद
गणेश चतुर्थी का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह हमें जीवन की बाधाओं का सामना करने और उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है। भगवान गणेश का आगमन हमारे जीवन में ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार करता है। इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर भगवान गणेश से प्रार्थना करें कि वे हम सभी के जीवन से विघ्नों को दूर करें और सुख-समृद्धि प्रदान करें।
जय श्री गणेश!

