गजेंद्र मोक्ष: जब गजराज की पुकार पर दौड़े आए भगवान विष्णु – भक्ति की अद्भुत कथा

गजेंद्र मोक्ष: जब गजराज की पुकार पर दौड़े आए भगवान विष्णु – भक्ति की अद्भुत कथा

गजेंद्र मोक्ष: जब गजराज की पुकार पर दौड़े आए भगवान विष्णु – भक्ति की अद्भुत कथा

सनातन धर्म में ऐसी अनेक कथाएं हैं जो हमें परमात्मा की असीम कृपा, करुणा और उनके भक्तों के प्रति उनके प्रेम का बोध कराती हैं। इन्हीं में से एक है ‘गजेंद्र मोक्ष’ की कथा, जो हमें यह सिखाती है कि जब कोई जीव सच्चे हृदय से भगवान को पुकारता है, तो वे तुरंत उसकी सहायता के लिए प्रकट होते हैं। यह कथा हमें पूर्ण शरणागति और अटूट विश्वास की शक्ति का दर्शन कराती है।

गजेंद्र मोक्ष की प्रेरक गाथा

यह अद्भुत कथा श्रीमद्भागवत पुराण के आठवें स्कंध में वर्णित है। त्रिकूट पर्वत पर एक अत्यंत विशाल और सुंदर उपवन था, जिसमें एक विशाल सरोवर भी था। इस सरोवर में गजेंद्र नामक एक गजराज अपने परिवार और झुंड के साथ रहता था। वह अत्यंत बलशाली, ऐश्वर्यशाली और अपने झुंड का स्वामी था।

संकट का आगमन

एक दिन ग्रीष्म ऋतु की तीव्र गर्मी से व्याकुल होकर गजराज अपनी हथिनियों और बच्चों के साथ सरोवर में जलक्रीड़ा करने उतरा। जल का आनंद लेते हुए गजराज अपनी मस्ती में लीन था, तभी अचानक एक विशाल और शक्तिशाली मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। गजराज ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर मगरमच्छ के चंगुल से छूटने का प्रयास किया, लेकिन मगरमच्छ की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वह हिल भी नहीं पा रहा था।

जीवन और मृत्यु का संघर्ष

गजराज और मगरमच्छ के बीच यह भयंकर युद्ध हजारों वर्षों तक चलता रहा। जल में मगरमच्छ का बल बढ़ता जा रहा था, जबकि गजराज का बल धीरे-धीरे क्षीण होता जा रहा था। उसके साथी हाथियों ने भी उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वे भी असफल रहे। अंततः, गजराज ने महसूस किया कि अब उसकी अपनी शक्ति, उसका बल, उसके साथी, कोई भी उसे इस संकट से नहीं बचा सकता। मृत्यु सामने खड़ी थी और चारों ओर निराशा का अंधकार था।

भगवान की शरण में गजराज

जब सब आशाएं टूट गईं, तब गजराज को अपने पूर्व जन्म के पुण्य और सत्कर्म याद आए। उसने अपनी बुद्धि से यह जाना कि इस संसार में एकमात्र परमशक्ति है जो इस संकट से उसे उबार सकती है – वह है भगवान विष्णु! गजराज ने अपनी सूंड में एक कमल का पुष्प उठाया और पीड़ा में भी अपनी दृष्टि ऊपर की ओर उठाकर, अत्यंत हृदय विदारक स्वर में भगवान को पुकारा:

“ओम् नमो भगवते वासुदेवाय!”

उसकी पुकार में पूर्ण समर्पण, भक्ति और विश्वास था। उसने अपनी समस्त चेतना और आत्मा से परमात्मा को याद किया, यह जानते हुए कि वही एकमात्र आश्रय हैं।

भगवान का अवतरण

गजराज की यह मार्मिक पुकार सीधे वैकुंठ में भगवान विष्णु तक पहुँची। भगवान उस क्षण देवी लक्ष्मी के साथ भोजन कर रहे थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपने भक्त की करुण पुकार सुनी, वे सब कुछ छोड़कर तुरंत गरुड़ पर सवार होकर गजेंद्र को बचाने के लिए चल पड़े। उनकी इस तीव्र गति को देखकर देवता भी अचंभित रह गए।

पल भर में भगवान विष्णु त्रिकूट पर्वत पर प्रकट हुए। उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया और एक ही क्षण में मगरमच्छ का सिर धड़ से अलग कर दिया, जिससे गजराज को मुक्ति मिली।

गजेंद्र और मगरमच्छ का उद्धार

इस अद्भुत घटना के बाद, गजराज को भगवान की कृपा से मोक्ष प्राप्त हुआ और वह वैकुंठ धाम को चला गया। गजराज वास्तव में पूर्व जन्म में इंद्रद्युम्न नामक एक पुण्यात्मा राजा था, जिसे अगस्त्य ऋषि के शाप के कारण हाथी का जन्म मिला था। इसी प्रकार, मगरमच्छ भी पूर्व जन्म में ‘हू हू’ नामक एक गंधर्व था, जिसे देवल ऋषि के शाप के कारण मगरमच्छ बनना पड़ा था। भगवान के हाथों मुक्ति पाकर वे दोनों ही अपने पूर्व स्वरूप में लौट आए और उन्हें भी मोक्ष मिला।

गजेंद्र मोक्ष कथा के मुख्य संदेश

यह कथा हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक संदेश देती है:

  • पूर्ण शरणागति: जब सभी सांसारिक सहारे टूट जाते हैं, तब भगवान की शरण में जाना ही एकमात्र मार्ग है। भगवान अपने भक्तों की पुकार अवश्य सुनते हैं।
  • भक्ति की शक्ति: गजराज ने केवल एक कमल अर्पित करके और सच्चे मन से पुकार कर भगवान को प्रकट कर दिया। यह दर्शाता है कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं।
  • भगवान का तात्कालिक प्रतिभाव: भगवान अपने भक्तों के संकट में उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ते। वे तुरंत सहायता के लिए दौड़ पड़ते हैं।
  • जीवन और मृत्यु का सार: यह कथा बताती है कि शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा अमर है और परमात्मा से जुड़कर मोक्ष प्राप्त कर सकती है।
  • किसी भी योनि में मोक्ष संभव: गजराज जैसे पशु को भी अपनी भक्ति और समर्पण के कारण मोक्ष प्राप्त हुआ, जो दर्शाता है कि भगवान की कृपा से कोई भी जीव मुक्ति पा सकता है।

निष्कर्ष

गजेंद्र मोक्ष की कथा हमें यह विश्वास दिलाती है कि चाहे जीवन में कितनी भी विकट परिस्थितियाँ क्यों न आएं, यदि हम पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ परमात्मा का स्मरण करते हैं, तो वे अवश्य हमारी सहायता के लिए आते हैं। यह कथा हमें संकट में धैर्य रखने, अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और अंततः भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण करने की प्रेरणा देती है। आइए, हम भी गजराज की तरह ईश्वर पर अटूट विश्वास रखें और जीवन की हर चुनौती में उनका नाम स्मरण करें।

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