### परिचय: पुण्य सलिला गंगा का आगमन
ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण दिन के रूप में मनाई जाती है। यह पावन अवसर ‘गंगा दशहरा’ के नाम से विख्यात है। इस दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, और तभी से यह दिन उनके पृथ्वी पर आगमन की स्मृति में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता की जीवनधारा हैं, जो युगों-युगों से करोड़ों लोगों को मोक्ष और शुद्धि का मार्ग दिखा रही हैं।
### माँ गंगा की धरती पर अवतरण की दिव्य कथा
गंगा दशहरा का पर्व माँ गंगा के पृथ्वी पर आगमन की एक अलौकिक और प्रेरणादायक कथा से जुड़ा है, जो ‘भागीरथ कथा’ के नाम से प्रसिद्ध है।
* **राजा सगर और कपिल मुनि का श्राप:** प्राचीन काल में अयोध्या के प्रतापी राजा सगर ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। उनके 60,000 पुत्र थे। यज्ञ के अश्व को देवराज इंद्र ने चुराकर पाताल लोक में तपस्या कर रहे महर्षि कपिल के आश्रम में छिपा दिया। सगर के पुत्र अश्व की खोज करते हुए कपिल मुनि के आश्रम पहुंचे और उन्हें ही चोर समझकर अपमानित करने लगे। क्रोधित महर्षि कपिल ने अपनी तपस्या भंग होने पर नेत्र खोले और उनके तेज से राजा सगर के सभी 60,000 पुत्र जलकर भस्म हो गए। उनकी आत्माएं मुक्ति के लिए तरसने लगीं, क्योंकि उन्हें मोक्ष नहीं मिला था।
* **भागीरथ की कठोर तपस्या:** राजा सगर के वंशजों ने कई पीढ़ियों तक अपने पूर्वजों की आत्माओं को मोक्ष दिलाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंततः, उनके वंश में राजा भागीरथ का जन्म हुआ। उन्होंने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए घोर तपस्या करने का निश्चय किया। भागीरथ ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और उनसे माँ गंगा को पृथ्वी पर लाने का वरदान मांगा, ताकि उनके पवित्र जल से सगर पुत्रों की अस्थियां शुद्ध हो सकें और उन्हें मोक्ष मिल सके।
* **शिव का गंगा को धारण करना:** ब्रह्मा जी ने भागीरथ को बताया कि गंगा का वेग इतना प्रचंड है कि पृथ्वी उसे सहन नहीं कर पाएगी। उन्होंने भागीरथ को भगवान शिव की आराधना करने का सुझाव दिया। भागीरथ ने पुनः कठोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया। जब माँ गंगा स्वर्ग से अवतरित होने लगीं, तो भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया, जिससे उनका प्रचंड वेग नियंत्रित हो गया। इसके बाद शिव जी ने अपनी जटाओं से गंगा की एक धारा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया।
* **गंगा का मोक्षदायिनी स्वरूप:** माँ गंगा भागीरथ के पीछे-पीछे चलती हुई सागर पुत्रों के भस्म हुए स्थान पर पहुंचीं। उनके पवित्र जल के स्पर्श से सगर के 60,000 पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ और वे स्वर्गलोक सिधार गए। जिस दिन माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं, वह ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी, और तभी से यह दिन ‘गंगा दशहरा’ के नाम से जाना जाता है।
### गंगा दशहरा का महत्व और दश पापों का नाश
‘दशहरा’ शब्द ‘दश’ (दस) और ‘हरा’ (हरण करना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है दस पापों का हरण करने वाला। माना जाता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान, दान और पूजन से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों (तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक) का नाश होता है। ये पाप हैं:
1. **कायिक पाप (शारीरिक):** बिना अनुमति पर-धन का हरण करना, हिंसा, पर-स्त्री गमन।
2. **वाचिक पाप (वाणी):** कटु वचन, असत्य बोलना, चुगली करना, व्यर्थ की बातें करना।
3. **मानसिक पाप (मन):** दूसरों की संपत्ति हड़पने का विचार, दूसरों का बुरा सोचना, नास्तिकता।
गंगा दशहरा के दिन गंगा में डुबकी लगाने से इन सभी पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। जल, अन्न, वस्त्र, फल आदि का दान करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है।
### पूजा विधि और अनुष्ठान
गंगा दशहरा के दिन श्रद्धालुजन पवित्र गंगा नदी में स्नान करते हैं। जो लोग गंगा तट तक नहीं पहुँच पाते, वे अपने घरों में ही गंगा जल मिलाकर स्नान करते हैं। इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है और माँ गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन गंगा आरती का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें हजारों भक्तगण माँ गंगा की स्तुति करते हैं। जल में खड़े होकर “ॐ नमो भगवति ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं गंगायै नमः” मंत्र का जाप करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
### निष्कर्ष: जीवनदायिनी गंगा का आशीर्वाद
गंगा दशहरा का पर्व हमें न केवल माँ गंगा के अवतरण की अद्भुत कथा से जोड़ता है, बल्कि हमें पवित्रता, त्याग और मोक्ष की अवधारणा से भी परिचित कराता है। यह दिन हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और नदियों के संरक्षण का संदेश भी देता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी माँ गंगा के आशीर्वाद से अपने जीवन को पवित्र करें और उनके निर्मल प्रवाह से अपने मन और आत्मा को शुद्ध करें। माँ गंगा सभी का कल्याण करें!

