कमला सप्तमी २०२५
**प्रस्तावना**
प्रत्येक वर्ष हिन्दू धर्म में अनेक पावन पर्व मनाए जाते हैं, जो जीवन में आध्यात्मिकता और समृद्धि का संचार करते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पुण्यदायी पर्व है कमला सप्तमी। यह दिन विशेष रूप से देवी कमला को समर्पित है, जो दस महाविद्याओं में से दशम महाविद्या और भगवान विष्णु की शक्ति, महालक्ष्मी का ही स्वरूप हैं। कमला सप्तमी का पर्व, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, सप्तमी तिथि को पड़ता है और २०२५ में यह विशेष दिन आने वाला है। यह केवल एक तिथि नहीं, अपितु माँ कमला के दिव्य आशीर्वाद, धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समस्त प्रकार की समृद्धि को प्राप्त करने का एक अनुपम अवसर है। इस दिन भक्तजन पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ देवी कमला का पूजन कर अपने जीवन को भौतिक तथा आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से उन्नत करते हैं। यह पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि वास्तविक धन केवल भौतिक संपदा नहीं, अपितु आंतरिक शांति, संतोष और धर्मपरायणता भी है। सनातन संस्कृति में इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि यह दरिद्रता का नाश कर समस्त शुभ फलों की प्राप्ति कराता है। आइए, हम इस पवित्र पर्व के आगमन की प्रतीक्षा करें और इसके महत्व को गहराई से समझें।
**पावन कथा**
देवी कमला की उत्पत्ति अत्यंत रहस्यमयी और कल्याणकारी है। पुराणों में वर्णित है कि जब देवताओं और असुरों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उसमें से अनेक अमूल्य रत्न और औषधियां प्रकट हुईं। चौदह रत्नों में से एक दिव्य रत्न थीं देवी लक्ष्मी, जो अपने हाथ में कमल धारण किए हुए थीं और कमल पर ही विराजित थीं। वे ही देवी कमला हैं, जो धन, समृद्धि और सौंदर्य की अधिष्ठात्री हैं। उनकी एक अन्य कथा दस महाविद्याओं से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव ने देवी सती के वियोग में तांडव किया और उनके शरीर के खंड विभिन्न स्थानों पर गिरे, तब देवी के विभिन्न स्वरूपों का प्राकट्य हुआ। देवी कमला इन्हीं दस महाविद्याओं में से अंतिम और अत्यंत सौम्य स्वरूप हैं, जो भक्तों को अभय और वरदान प्रदान करती हैं।
एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक समय की बात है, पृथ्वी पर एक अत्यंत धार्मिक किंतु निर्धन ब्राह्मण रहता था। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बहुत कष्टमय जीवन व्यतीत कर रहा था। उसके पास न तो पर्याप्त अन्न था और न ही कोई आश्रय। एक दिन, जब वह अपनी दरिद्रता से अत्यंत दुखी होकर वन में भटक रहा था, तब उसे एक महान ऋषि के दर्शन हुए। ब्राह्मण ने अपनी व्यथा ऋषि को सुनाई। ऋषि ने उसे कमला सप्तमी के महत्व के बारे में बताया और देवी कमला के पूजन का विधान समझाया। उन्होंने कहा, “हे वत्स, तुम निर्धन अवश्य हो, किंतु तुम्हारा हृदय शुद्ध और पवित्र है। कमला सप्तमी के दिन तुम पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ देवी कमला की पूजा करो। वे कमल के आसन पर विराजमान हैं और कमल ही उन्हें सर्वाधिक प्रिय है। उन्हें कमल के पुष्प अर्पित करो और उनके ‘ह्रीं’ बीज मंत्र का जाप करो। तुम्हारी दरिद्रता अवश्य दूर होगी और तुम्हारे जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होगा।”
ब्राह्मण ने ऋषि की आज्ञा शिरोधार्य की। उसने जैसे-तैसे कुछ कमल के पुष्प और पूजा सामग्री एकत्र की। कमला सप्तमी के दिन उसने ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान किया और पवित्र मन से देवी कमला का ध्यान किया। उसने एक स्वच्छ स्थान पर देवी की प्रतिमा स्थापित की, उन्हें कमल पुष्प अर्पित किए और पूरे दिन ‘ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं कमलवासिन्यै नमः’ मंत्र का जाप करता रहा। उसकी भक्ति इतनी प्रबल थी कि संध्या होते-होते देवी कमला स्वयं उसके समक्ष प्रकट हुईं। देवी का दिव्य रूप अत्यंत तेजस्वी और मनमोहक था। उन्होंने ब्राह्मण को दर्शन दिए और कहा, “हे मेरे प्रिय भक्त, मैं तुम्हारी अटूट श्रद्धा से अत्यंत प्रसन्न हूँ। आज से तुम्हारी सारी दरिद्रता दूर हो जाएगी और तुम्हारा घर धन-धान्य से परिपूर्ण रहेगा। तुम मेरे इस वचन को सदैव स्मरण रखना कि जो भी भक्त इस कमला सप्तमी के दिन पूर्ण निष्ठा से मेरा पूजन करेगा, उसे कभी किसी प्रकार के अभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।”
देवी के आशीर्वाद से वह ब्राह्मण अगले ही दिन से समृद्ध होने लगा। उसे कहीं से धन की प्राप्ति हुई और उसने एक भव्य घर बनवाया। उसने अपने जीवन में कभी भी देवी कमला के प्रति अपनी श्रद्धा कम नहीं होने दी और सदैव दीन-दुखियों की सेवा करता रहा। यह कथा हमें यह सिखाती है कि देवी कमला की कृपा प्राप्त करने के लिए केवल धन की आवश्यकता नहीं होती, अपितु पवित्र हृदय और अटूट श्रद्धा ही सर्वोपरि है। कमला सप्तमी का यह दिन हमें इसी शाश्वत सत्य का स्मरण कराता है कि सच्ची भक्ति से ही जीवन में वास्तविक ऐश्वर्य और संतोष प्राप्त होता है।
**दोहा**
कमला माँ पद्मिनी, कमला धन की खान।
कमला सप्तमी पूजन से, मिटे सकल अज्ञान॥
**चौपाई**
जयति जयति कमला माता, त्रिभुवन सुखदाती।
पद्मासना शुभ वरदाती, हरिप्रिया जगख्याति॥
कमल गदा पद्म धारण, शोभा अति भारी।
सेवत सुर नर मुनिजन, भवसागर तारी॥
रत्नजटित सिंहासन सोहै, गजराज कलश लहावें।
ऐश्वर्य दे वरदान दे, दरिद्रता भगावें॥
**पाठ करने की विधि**
कमला सप्तमी के दिन देवी कमला का पूजन अत्यंत विधि-विधान से किया जाना चाहिए ताकि उनके पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त हो सकें। यहाँ पूजन की विस्तृत विधि दी गई है:
1. **शुद्धिकरण:** प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूरे घर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थान को गंगाजल से पवित्र करें।
2. **संकल्प:** पूजा आरंभ करने से पहले दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर देवी कमला का ध्यान करें और मन ही मन अपनी मनोकामना कहते हुए पूजन का संकल्प लें।
3. **स्थापना:** एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर देवी कमला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि संभव हो तो श्रीयंत्र भी स्थापित करें। कलश स्थापना करें: एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर उसमें सिक्का, सुपारी, अक्षत डालें और उसके मुख पर आम के पत्ते लगाकर उस पर नारियल रखें। नारियल पर लाल चुनरी लपेट दें।
4. **पूजन सामग्री:** देवी को कमल के पुष्प (जितने अधिक संभव हों), लाल गुलाल, अक्षत, चंदन, कुमकुम, धूप, दीप, नैवेद्य (खीर, मिठाई, फल), इत्र और पान-सुपारी अर्पित करें।
5. **मंत्र जाप:** देवी कमला के मंत्र ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ या ‘ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौं जगत्प्रसूत्यै नमः’ का कम से कम 108 बार जाप करें। रुद्राक्ष या कमलगट्टे की माला से जाप करना अधिक फलदायी होता है।
6. **कथा श्रवण:** देवी कमला की कथा का श्रवण करें या पाठ करें। यह कथा भक्तों के मन में श्रद्धा और विश्वास को बढ़ाती है।
7. **आरती:** अंत में कपूर या घी के दीपक से देवी कमला की आरती करें। आरती के बाद सभी उपस्थित जनों को प्रसाद वितरित करें।
8. **दान:** इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
9. **क्षमा याचना:** पूजा के अंत में किसी भी ज्ञात-अज्ञात त्रुटि के लिए देवी से क्षमा याचना करें।
यह पूजन विधि पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करने से देवी कमला शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर असीम कृपा बरसाती हैं।
**पाठ के लाभ**
कमला सप्तमी के दिन देवी कमला के पूजन और मंत्रों के पाठ से अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जो व्यक्ति के भौतिक और आध्यात्मिक जीवन को उन्नत करते हैं:
1. **धन और समृद्धि की प्राप्ति:** देवी कमला साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप हैं। उनके पूजन से दरिद्रता का नाश होता है और घर में धन-धान्य का आगमन होता है। व्यापारी वर्ग के लिए यह दिन विशेष रूप से व्यापार में वृद्धि और आर्थिक स्थायित्व प्रदान करने वाला माना जाता है।
2. **सौभाग्य में वृद्धि:** यह पर्व सौभाग्य में वृद्धि लाता है। विवाहित महिलाओं के लिए यह पति की दीर्घायु और संतान के सुख के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अविवाहित कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है।
3. **यश और कीर्ति:** देवी कमला की आराधना से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। उसके कार्यों में सफलता प्राप्त होती है, जिससे उसका यश चारों दिशाओं में फैलता है।
4. **रोग मुक्ति और स्वास्थ्य:** देवी कमला का पूजन रोगों से मुक्ति दिलाता है और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है। उनकी कृपा से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
5. **मनोकामना पूर्ति:** सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना और पूजन से देवी कमला भक्तों की सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं, चाहे वे भौतिक हों या आध्यात्मिक।
6. **गृहस्थ जीवन में शांति:** इस दिन की गई पूजा से घर परिवार में सुख-शांति और सामंजस्य बना रहता है। कलह और अशांति दूर होकर प्रेम और सद्भाव का वातावरण निर्मित होता है।
7. **आध्यात्मिक उन्नति:** यह पर्व केवल भौतिक लाभ ही नहीं देता, अपितु व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त बनाता है। मन में शांति, संतोष और भक्ति का भाव जागृत होता है, जिससे मोक्ष के मार्ग पर प्रगति होती है।
इन सभी लाभों को प्राप्त करने के लिए कमला सप्तमी का पूजन अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी माना जाता है। यह एक ऐसा अवसर है जब भक्तगण अपनी श्रद्धा और विश्वास के माध्यम से देवी के असीम आशीर्वाद को प्राप्त कर सकते हैं।
**नियम और सावधानियाँ**
कमला सप्तमी का पूजन करते समय कुछ विशेष नियमों और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके और किसी प्रकार के दोष से बचा जा सके:
1. **पवित्रता:** पूजा से पहले और पूजा के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। मन में किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या नकारात्मक विचार न रखें।
2. **व्रत और उपवास:** कई भक्त इस दिन निर्जल या फलाहारी व्रत रखते हैं। यदि पूर्ण व्रत संभव न हो, तो केवल एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करें। लहसुन, प्याज और मांसाहारी भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
3. **स्वच्छता:** पूजा स्थल और पूजा सामग्री की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। बासी फूल या खंडित मूर्ति का प्रयोग न करें।
4. **एकाग्रता:** मंत्र जाप और ध्यान करते समय पूर्ण एकाग्रता बनाए रखें। मन को भटकने न दें और पूर्ण श्रद्धा से देवी का स्मरण करें।
5. **दान का महत्व:** इस दिन दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है, किंतु दान करते समय अभिमान का त्याग करें। दान हमेशा गुप्त रूप से और विनम्रता के साथ करना चाहिए।
6. **अभिवादन:** घर में आए किसी भी अतिथि या गरीब व्यक्ति का अनादर न करें। उन्हें भोजन या दान देकर संतुष्ट करें, क्योंकि अतिथि को भगवान का रूप माना जाता है।
7. **झूठ और निंदा से बचें:** इस पवित्र दिन पर किसी से झूठ न बोलें और न ही किसी की निंदा करें। वाणी में मधुरता और सत्यता बनाए रखें।
8. **ब्रह्मचर्य का पालन:** यदि संभव हो, तो व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
9. **भक्ति भाव:** पूजा में दिखावा न करें। जो भी करें, वह सच्चे भक्ति भाव और प्रेम से करें। देवी केवल मन के भाव को देखती हैं, बाहरी आडंबर को नहीं।
इन नियमों का पालन करते हुए कमला सप्तमी का पूजन करने से व्यक्ति को देवी कमला का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है।
**निष्कर्ष**
कमला सप्तमी २०२५ का आगमन हम सभी के लिए एक स्वर्णिम अवसर लेकर आ रहा है। यह दिन न केवल धन-संपत्ति की देवी माँ कमला की आराधना का दिन है, अपितु आंतरिक शुद्धता, सद्भाव और धर्मपरायणता को अपने जीवन में उतारने का भी प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची समृद्धि केवल बाहरी वस्तुओं में नहीं, अपितु हमारे मन की शांति, संतोष और परोपकारिता में निहित है। माँ कमला की कृपा से जीवन के समस्त अभाव दूर होते हैं और चारों दिशाओं से शुभता का आगमन होता है। हम सभी को इस पावन पर्व का पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ स्वागत करना चाहिए। अपने घरों को पवित्र करें, अपने मन को शुद्ध करें और पूर्ण भक्ति भाव से माँ कमला के श्रीचरणों में स्वयं को समर्पित करें। आइए, हम सब मिलकर इस दिन को विशेष बनाएं और माँ भगवती कमला से प्रार्थना करें कि वे हम सभी के जीवन को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण करें। यह विश्वास रखें कि माँ की कृपा दृष्टि से जीवन का हर कोना प्रकाशमय हो उठता है और सभी बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं। कमला सप्तमी का यह पर्व हमारे जीवन में नव ऊर्जा, नव उत्साह और नव संभावनाओं का संचार करे, यही हमारी कामना है।
Format: देवोपासना लेख
Category: देवी उपासना, हिन्दू पर्व, लक्ष्मी पूजा
Slug: kamala-saptami-2025-devi-kamala-puja
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