इतनी शक्ति हमें देना दाता: हर हृदय की पुकार, हर मुश्किल का समाधान

इतनी शक्ति हमें देना दाता: हर हृदय की पुकार, हर मुश्किल का समाधान

इतनी शक्ति हमें देना दाता: हर हृदय की पुकार, हर मुश्किल का समाधान

जीवन की डगर पर चलते हुए, हमें अक्सर ऐसे पड़ावों से गुज़रना पड़ता है जहाँ मन का विश्वास डगमगाने लगता है, उम्मीद की किरणें धुँधली पड़ जाती हैं और चारों ओर निराशा का अँधेरा छा जाता है। ऐसे क्षणों में, हमें एक ऐसी शक्ति की आवश्यकता होती है जो हमें सहारा दे, हमारा मार्गदर्शन करे और हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे। ऐसे ही समय में, ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो ना’ – यह भजन केवल एक गीत बनकर नहीं, बल्कि एक दिव्य पुकार बनकर हमारे अंतरमन में गूँज उठता है। यह भजन सदियों से लाखों लोगों के लिए शक्ति, साहस और विश्वास का प्रतीक रहा है, जिसने उन्हें जीवन की कठिनतम परिस्थितियों से भी पार पाने की शक्ति दी है। सनातन परंपरा में प्रार्थना का यह अनमोल रत्न हमें सिखाता है कि वास्तविक शक्ति बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होती है, जो ईश्वर से जुड़कर प्राप्त की जाती है।

जीवन की कहानी में ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’

मनुष्य का जीवन उतार-चढ़ाव से भरी एक लंबी यात्रा है। इस यात्रा में हर मोड़ पर नई चुनौतियाँ सामने आती हैं। कभी व्यक्तिगत दुःख घेर लेते हैं, कभी अपनों को खोने का दर्द सताता है, तो कभी असफलताएँ हमें तोड़ देती हैं। ऐसे में, यदि हम धैर्य और विश्वास खो दें, तो जीवन की राह और भी कठिन हो जाती है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भले ही जीवन की परिस्थितियाँ कितनी भी विषम क्यों न हों, हमें अपने मन का विश्वास कभी कमज़ोर नहीं होने देना चाहिए।

कल्पना कीजिए एक ऐसी कहानी की, जिसमें एक व्यक्ति अपने जीवन के सबसे बड़े संघर्ष से गुज़र रहा है। उसका व्यवसाय ठप पड़ गया है, स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, और संबंधों में भी कड़वाहट आ गई है। चारों ओर से निराशा ने उसे घेर लिया है। वह हर सुबह उठता है और सोचता है कि इस भार को और कितने दिन ढो पाएगा। एक दिन, जब वह बिल्कुल टूट चुका होता है, उसके कानों में अचानक यही धुन पड़ती है: ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता…’। ये शब्द उसके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार करते हैं। वह सोचने लगता है कि शायद ईश्वर उसे यह शक्ति दे सकता है जिसकी उसे इस क्षण सबसे अधिक आवश्यकता है। वह हर सुबह इस भजन को गुनगुनाने लगता है, और धीरे-धीरे उसे महसूस होता है कि उसके भीतर एक अज्ञात शक्ति जागृत हो रही है। यह शक्ति उसे समस्याओं का सामना करने की हिम्मत देती है, उसे सकारात्मक सोचने पर मजबूर करती है और उसे दूसरों से मदद मांगने व स्वीकार करने का साहस देती है।

यह केवल एक काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति की सच्ची गाथा है जिसने अपने जीवन में इस भजन को अपना संबल बनाया है। प्राचीन भारतीय *कथाओं* में भी हम देखते हैं कि जब-जब ऋषि-मुनियों या वीर योद्धाओं ने किसी बड़ी चुनौती का सामना किया, उन्होंने अपनी आंतरिक शक्ति को जगाने के लिए गहन तपस्या और प्रार्थना का सहारा लिया। यह भजन उसी परंपरा का आधुनिक रूप है, जो हमें याद दिलाता है कि आध्यात्मिक बल ही सबसे बड़ा बल है। जिस प्रकार एक नन्हा पौधा विपरीत परिस्थितियों में भी अंकुरित होने का साहस रखता है, उसी प्रकार यह भजन हमारे मन में आस्था और दृढ़ता का बीज बोता है, जिससे हम हर मुश्किल को पार कर सकें। यह भजन एक दैनिक *कहानी* का सूत्रधार है – हर उस व्यक्ति की कहानी जो जीवन की परीक्षा में सफल होने के लिए ईश्वरीय कृपा का आकांक्षी है।

‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ का आध्यात्मिक महत्व

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक दर्शन का प्रतीक है। इसके हर शब्द में जीवन जीने का सार छिपा है:

1. **’इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो ना’:** यह पंक्ति हमें आंतरिक शक्ति और अटूट विश्वास की महत्ता सिखाती है। जीवन में चाहे जितनी भी बाधाएँ आ जाएँ, मन का विश्वास ही हमें अडिग रखता है। यह ईश्वर में, स्वयं में और सत्य में विश्वास की प्रार्थना है।

2. **’हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोई भूल हो ना’:** यह पंक्ति नैतिक मूल्यों और धार्मिक आचरण पर ज़ोर देती है। सनातन धर्म हमें धर्म के मार्ग पर चलने और सद्कर्म करने की प्रेरणा देता है। यह प्रार्थना है कि हम अनजाने में भी कोई ऐसा कार्य न करें जिससे किसी को हानि पहुँचे या जो धर्म के विरुद्ध हो। यह शुद्ध *कर्म* का आह्वान है।

3. **’दूर अज्ञान के हो अंधेरे, तू हमें ज्ञान की रोशनी दे’:** यह पंक्ति अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश की कामना करती है। ज्ञान ही वह शक्ति है जो हमें सही-गलत का भेद सिखाती है, भ्रम को दूर करती है और हमें आत्मज्ञान की ओर ले जाती है। यह हमें सत्य की खोज के लिए प्रेरित करती है।

4. **’हर बुराई से बचते रहें हम, जितनी भी दे भली ज़िंदगी दे’:** यह हमें नकारात्मकता और बुराई से दूर रहने की प्रेरणा देती है। यह स्वीकारोक्ति है कि जीवन में सुख-दुःख दोनों होते हैं, परंतु हम हर परिस्थिति में सकारात्मकता बनाए रखें और अपने भीतर की अच्छाई को जीवित रखें। यह संतोष और शुद्धता की भावना है।

5. **’बैर हो ना किसी का किसी से, भावना मन में बदले की हो ना’:** यह पंक्ति सार्वभौमिक प्रेम, करुणा और क्षमा का संदेश देती है। यह प्रार्थना है कि हमारे मन में किसी के प्रति घृणा या बदले की भावना न हो, बल्कि सभी के प्रति सद्भाव और प्रेम का भाव हो। यह अहिंसा और विश्व बंधुत्व की भावना को पुष्ट करती है।

6. **’हम न सोचें हमें क्या मिला है, हम ये सोचें किया क्या है अर्पण’:** यह स्वार्थरहित सेवा और त्याग की भावना को जगाती है। यह सिखाती है कि सच्चा सुख पाने में नहीं, बल्कि देने में है। यह निष्काम *कर्मयोग* का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ हम समाज और दूसरों के कल्याण के लिए अपना योगदान देते हैं।

7. **’फूल खुशियों के बाँटें सभी को, सबका जीवन ही बन जाए मधुबन’:** यह पंक्ति परोपकार और आनंद के प्रसार का आह्वान करती है। यह प्रार्थना है कि हम अपने आसपास खुशियाँ फैलाएँ, जिससे हर किसी का जीवन आनंदमय हो जाए। यह एक ऐसे समाज की कल्पना है जहाँ प्रेम, सौहार्द और प्रसन्नता का वास हो।

नित्य प्रार्थना और परंपरा में स्थान

‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ किसी विशेष पूजा या अनुष्ठान से जुड़ा भजन नहीं है, बल्कि यह एक सार्वभौमिक प्रार्थना है जिसे कोई भी, कभी भी और कहीं भी गा सकता है। इसकी सरलता और गहनता इसे हर घर में लोकप्रिय बनाती है। इसे हमारी दैनिक आध्यात्मिक परंपराओं में कई तरह से शामिल किया जा सकता है:

* **नित्य प्रातःकाल की प्रार्थना:** दिन की शुरुआत इस भजन से करना मन को शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। यह हमें दिनभर के कार्यों के लिए मानसिक शक्ति प्रदान करता है और सही मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाता है। जैसे सूर्योदय की पहली किरणें अंधकार को मिटाती हैं, वैसे ही यह भजन हमारे मन से नकारात्मक विचारों को दूर करता है।
* **विद्यालयों और सामाजिक आयोजनों में:** यह भजन अक्सर विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं में गाया जाता है, जिससे बच्चों में नैतिक मूल्य और मानवीय संवेदनाएँ विकसित हों। सामाजिक और सामुदायिक आयोजनों में भी यह एक प्रेरक गीत के रूप में प्रस्तुत होता है, जो एकता और सद्भावना का संदेश देता है।
* **संकट के समय में संबल:** जब कोई व्यक्ति किसी मुश्किल में हो, चाहे वह बीमारी हो, परीक्षा का भय हो, या कोई व्यक्तिगत संकट, इस भजन का पाठ या श्रवण उसे मानसिक शांति और हिम्मत देता है। यह एक प्रकार की मानसिक *आरती* है जो आत्मा को शुद्ध करती है और ईश्वर से सीधे जोड़ती है।
* **त्यौहारों और उत्सवों पर:** भारतीय *त्यौहार* अक्सर हमें एकजुट करते हैं और साझा मूल्यों की याद दिलाते हैं। इन अवसरों पर, यह भजन परिवार और समुदाय को एक साथ आने, प्रेम और सद्भावना फैलाने के लिए प्रेरित करता है। यह उत्सव के माहौल में एक गहरी आध्यात्मिक परत जोड़ता है, जहाँ हम सिर्फ खुशियाँ मनाते नहीं, बल्कि दूसरों के कल्याण की कामना भी करते हैं।
* **ध्यान और आत्म-चिंतन:** इस भजन के शब्दों पर ध्यान केंद्रित करना एक प्रकार का ध्यान बन सकता है। इसके अर्थ पर विचार करने से व्यक्ति अपने भीतर झाँक पाता है, अपनी कमज़ोरियों को पहचानता है और उन्हें दूर करने का संकल्प लेता है। यह आत्म-सुधार और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

निष्कर्ष

‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ केवल एक भजन नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। यह हमें सिखाता है कि हम कैसे चुनौतियों का सामना करें, कैसे नैतिक बनें, कैसे ज्ञान प्राप्त करें, और कैसे दूसरों के प्रति प्रेम और करुणा का भाव रखें। यह प्रार्थना हमें याद दिलाती है कि हम सब एक ही परमात्मा की संतान हैं और हमें एक-दूसरे के प्रति सद्भाव बनाए रखना चाहिए।

यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए एक आशा की किरण है जो जीवन में किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना कर रहा है। इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर, हम न केवल अपने भीतर अदम्य शक्ति का संचार कर सकते हैं, बल्कि अपने आस-पास के वातावरण को भी सकारात्मक और प्रेमपूर्ण बना सकते हैं। तो आइए, इस पावन प्रार्थना को अपने हृदय में धारण करें और हर दिन ईश्वर से इतनी शक्ति माँगें कि हमारा मन का विश्वास कभी कमज़ोर न हो, और हम हमेशा नेक रास्ते पर चलते रहें। यह शाश्वत प्रार्थना हमें सदैव सत्कर्मों की ओर प्रेरित करती रहेगी और हमारे जीवन को एक ‘मधुबन’ बना देगी।

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