आ लौट के आजा हनुमान जी भजन लिरिक्स: अर्थ, महिमा और संकटमोचन कृपा
सनातन धर्म में हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और सेवा का पर्याय माना जाता है। वे भगवान राम के परम भक्त, संकटमोचन और कलयुग के प्रत्यक्ष देवता हैं। जब भी भक्त किसी संकट में होता है, हृदय से निकली ‘जय श्री राम’ की पुकार के साथ-साथ ‘जय हनुमान’ का उद्घोष स्वतः ही होता है। ऐसे में ‘आ लौट के आजा हनुमान’ भजन केवल शब्दों का एक समूह नहीं, बल्कि एक व्याकुल हृदय की पुकार है, जो अपने आराध्य को अपने पास बुलाने की तीव्र इच्छा से भरा है। यह भजन हर उस भक्त की भावनाओं को व्यक्त करता है, जो जीवन की विषम परिस्थितियों में हनुमान जी की उपस्थिति और मार्गदर्शन की आकांक्षा रखता है। यह भजन केवल सुनने और गुनगुनाने के लिए नहीं, बल्कि हनुमान जी के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और विश्वास को प्रकट करने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है। आइए, इस भावुक भजन के गहरे अर्थ, इसकी महिमा और हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के सरल उपायों को विस्तार से जानें।
कथा प्रसंग: संकटमोचन की पुकार
हनुमान जी की कथाएं अनंत हैं और उनका हर प्रसंग भक्तों के लिए प्रेरणा और आस्था का स्रोत है। लंका दहन से लेकर संजीवनी बूटी लाने तक, हनुमान जी ने हर बार अपनी अद्भुत शक्ति और अद्वितीय भक्ति का परिचय दिया है। इस भजन की भावना को समझने के लिए हमें उस पल की कल्पना करनी होगी जब भक्त स्वयं को असहाय पाता है, जब उसे लगता है कि उसके चारों ओर निराशा का अंधकार गहरा रहा है और कोई मार्ग नहीं सूझ रहा। ऐसे समय में भक्त का मन व्याकुल होकर हनुमान जी को पुकारता है – “आ लौट के आजा हनुमान!”
यह पुकार सिर्फ शारीरिक रूप से हनुमान जी को वापस बुलाने की नहीं है, बल्कि उनकी दिव्य उपस्थिति, उनकी शक्ति और उनके आशीर्वाद को अपने जीवन में फिर से अनुभव करने की इच्छा है। यह उस समय की याद दिलाती है जब भगवान राम, लक्ष्मण और वानर सेना के साथ लंका विजय के अभियान पर थे। हर कदम पर चुनौतियां थीं, हर पल संकट का साया था। जब लक्ष्मण मूर्छित हुए और उनके प्राणों पर संकट छा गया, तब हनुमान जी ने ही अपनी अतुलनीय गति और शक्ति से संजीवनी बूटी लाकर उनके जीवन की रक्षा की। उस समय, राम और पूरी सेना ने हनुमान जी को जिस व्याकुलता से पुकारा होगा, वह ‘आ लौट के आजा’ की भावना का ही एक रूप था। उन्होंने हनुमान जी के लौटने की प्रार्थना की थी, क्योंकि वे जानते थे कि उनकी अनुपस्थिति में कार्य असंभव था।
आज भी, कलयुग में, जब भक्त जीवन के युद्धों में स्वयं को अकेला पाता है – चाहे वह बीमारी का संकट हो, आर्थिक परेशानी हो, मानसिक तनाव हो, या किसी प्रियजन के खोने का दुख हो – तब उसे हनुमान जी जैसे किसी संरक्षक की तीव्र आवश्यकता महसूस होती है। हनुमान जी को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है क्योंकि उन्होंने हर युग में अपने भक्तों के संकटों का निवारण किया है। उनकी चिरंजीवी होने की विशेषता यह सुनिश्चित करती है कि वे आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं और भक्तों की पुकार सुनते हैं। जब भक्त हृदय से उन्हें पुकारता है, तो यह विश्वास प्रबल होता है कि हनुमान जी अवश्य उनकी सहायता के लिए आएंगे, जैसे वे भगवान राम और सीता माता के लिए आते थे। यह भजन उसी दृढ़ विश्वास और प्रेम की अभिव्यक्ति है, जहाँ भक्त अपने जीवन की गाड़ी को हनुमान जी के हाथों सौंपने के लिए व्याकुल है।
कई पौराणिक कहानियों में यह भी वर्णित है कि किस प्रकार ऋषि-मुनियों और देवताओं ने जब स्वयं को असुरों द्वारा पीड़ित पाया, तो उन्होंने शक्ति के प्रतीक हनुमान जी का आह्वान किया। हर बार हनुमान जी ने अपनी वीरता और निष्ठा से सभी संकटों का हरण किया। यह भजन उसी परंपरा को आगे बढ़ाता है, जहाँ भक्त का अंतरमन एक बालक की भांति अपने पिता समान हनुमान जी को सहायता के लिए बुलाता है। हनुमान जी का नाम मात्र ही नकारात्मक शक्तियों का नाश कर देता है, और यह भजन उस नाम की शक्ति को बार-बार दोहराकर भक्त के मन में आशा और विश्वास का संचार करता है।
भजन का आध्यात्मिक महत्व: हनुमान भक्ति के लाभ
“आ लौट के आजा हनुमान” भजन का आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक गहरा है। यह केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक भक्त के हृदय की अनमोल प्रार्थना है जो उसे हनुमान जी से जोड़ती है।
- विश्वास और समर्पण का प्रतीक: यह भजन भक्त के हनुमान जी पर अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। जब कोई भक्त इस भजन को गाता है, तो वह यह स्वीकार करता है कि उसकी सभी समस्याओं का समाधान केवल हनुमान जी ही कर सकते हैं। यह समर्पण उसे मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
- संकटों से मुक्ति: हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। इस भजन का नियमित जप या श्रवण भक्तों को बड़े से बड़े संकटों और परेशानियों से निकलने की शक्ति प्रदान करता है। यह मान्यता है कि हनुमान जी अपने भक्तों के सभी दुख और भय दूर करते हैं।
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश: हनुमान जी का नाम और उनके भजन बुरी शक्तियों, नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत बाधाओं को दूर करने में अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं। इस भजन को गाने से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- शारीरिक और मानसिक शक्ति: हनुमान जी स्वयं बल, बुद्धि और विद्या के दाता हैं। उनके भजन का गायन या श्रवण शारीरिक बीमारियों से लड़ने की शक्ति और मानसिक दृढ़ता प्रदान करता है। यह हमें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आत्मविश्वास से भर देता है।
- मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति: हनुमान भक्ति केवल भौतिक लाभों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है। हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं और उनकी भक्ति हमें भगवान राम से भी जोड़ती है, जिससे आध्यात्मिक जागरण होता है।
- राम नाम की महिमा: हनुमान जी सदैव राम नाम का जप करते हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त भी राम नाम की शक्ति से जुड़ते हैं, क्योंकि हनुमान जी वहीं प्रकट होते हैं जहाँ राम नाम का कीर्तन होता है। इस प्रकार यह भजन अप्रत्यक्ष रूप से राम भक्ति को भी बढ़ावा देता है।
- प्रेम और करुणा की भावना: यह भजन एक भक्त के हृदय में हनुमान जी के प्रति अगाध प्रेम और करुणा की भावना को जागृत करता है। यह भावना भक्त को और अधिक विनम्र, दयालु और सेवाभावी बनाती है, जो कि आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण गुण हैं।
हनुमान जी की कृपा कैसे पाएं: अनुष्ठान और परंपराएं
हनुमान जी की कृपा पाने और “आ लौट के आजा हनुमान” जैसे भजनों का पूरा लाभ उठाने के लिए कुछ विशेष अनुष्ठानों और परंपराओं का पालन किया जा सकता है:
- मंगलवार और शनिवार का महत्व: मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इन दिनों में हनुमान मंदिर जाना, हनुमान जी की आरती करना, सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करना और इस भजन का गायन करना अत्यंत फलदायी होता है।
- भजन का शुद्ध मन से गायन/श्रवण: इस भजन को पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ गाना या सुनना चाहिए। यदि आप गा नहीं सकते, तो शुद्ध और पवित्र वातावरण में इसका श्रवण करें। भजन गाते या सुनते समय हनुमान जी के स्वरूप का ध्यान करें, उनके गुणों का स्मरण करें।
- भोग और प्रसाद: हनुमान जी को बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चूरमा और मीठा पान बहुत प्रिय हैं। मंगलवार या शनिवार को पूजा के समय ये भोग अर्पित करें और फिर प्रसाद के रूप में वितरित करें।
- सिंदूर और चोला चढ़ाना: हनुमान जी को सिंदूर और चोला चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। इससे वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यह कार्य किसी अनुभवी पुजारी के माध्यम से मंदिर में कराना अधिक उचित है।
- हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ: “आ लौट के आजा हनुमान” भजन के साथ-साथ हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से भक्ति कई गुना बढ़ जाती है। सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
- राम नाम का जप: हनुमान जी के किसी भी अनुष्ठान में राम नाम का जप अवश्य करना चाहिए, क्योंकि हनुमान जी वहीं निवास करते हैं जहाँ राम नाम का स्मरण होता है। “श्री राम जय राम जय जय राम” का जप हनुमान जी को प्रसन्न करता है।
- सेवा और दान: हनुमान जी स्वयं सेवा के प्रतीक हैं। इसलिए, उनकी कृपा पाने के लिए दीन-दुखियों और जरूरतमंदों की सेवा करनी चाहिए। दान-पुण्य करना, गरीब बच्चों को भोजन या वस्त्र देना भी हनुमान जी को प्रसन्न करता है।
- सात्विक जीवन: हनुमान जी ब्रह्मचर्य के पालनकर्ता हैं। उनकी कृपा पाने के लिए सात्विक जीवन शैली अपनाना, मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखना आवश्यक है।
इन परंपराओं का पालन करते हुए “आ लौट के आजा हनुमान” भजन का गायन करने से भक्त हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और शांति अनुभव करते हैं।
निष्कर्ष: हर पुकार पर आएंगे बजरंगबली
“आ लौट के आजा हनुमान” भजन सिर्फ एक प्रार्थना नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव है। यह हमें सिखाता है कि जीवन के सबसे कठिन क्षणों में भी, जब सब कुछ अंधकारमय लगे, तब भी हमें हार नहीं माननी चाहिए। हमें अपने परम रक्षक, संकटमोचन हनुमान जी पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए। यह भजन हमें याद दिलाता है कि हनुमान जी चिरंजीवी हैं, वे सदैव अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं और उनकी सहायता के लिए तत्पर रहते हैं।
इस भजन के माध्यम से हम न केवल हनुमान जी को अपने पास बुलाते हैं, बल्कि उनके गुणों – बल, बुद्धि, विद्या, विवेक और निस्वार्थ सेवा – को भी अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करते हैं। उनकी कृपा से हमारे भय दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है, और हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति प्राप्त करते हैं। तो आइए, अपने हृदय के द्वार खोलें और श्रद्धा व प्रेम से भरकर इस शक्तिशाली भजन को गाएं या सुनें। निश्चय ही हनुमान जी आपकी पुकार सुनेंगे और आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएंगे। जय श्री राम, जय हनुमान!

