आरती क्यों की जाती है? जानें इसके आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व को।

आरती क्यों की जाती है? जानें इसके आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व को।

प्रस्तावना

भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में ‘आरती’ का एक विशेष स्थान है। मंदिरों में, घरों में और किसी भी शुभ कार्य के समापन पर आरती की जाती है। यह मात्र एक कर्मकांड नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति हमारी अनन्य भक्ति, श्रद्धा और प्रेम की अभिव्यक्ति है। अक्सर हम आरती तो करते हैं, लेकिन इसके गहरे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व को पूरी तरह समझ नहीं पाते। आइए, आज हम आरती के इस पावन अनुष्ठान के पीछे छिपे रहस्यों को उजागर करें और जानें कि यह हमारी आत्मा को किस प्रकार प्रकाशित करता है।

आरती क्या है?

‘आरती’ शब्द संस्कृत के ‘आरार्तिक’ से आया है, जिसका अर्थ है ‘अंधेरे को दूर करना’। यह प्रकाश, ध्वनि और सुगंध के माध्यम से ईश्वर को समर्पित एक पवित्र अनुष्ठान है। आरती में भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीपक या कपूर जलाकर उसे घुमाया जाता है, साथ में भजन-कीर्तन और घंटे-घड़ियाल बजाए जाते हैं। यह माना जाता है कि आरती से वातावरण शुद्ध होता है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।

आरती का आध्यात्मिक महत्व

  1. प्रकाश का प्रतीक: आरती में जलाया गया दीपक अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश को फैलाने का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि ईश्वर ही परम प्रकाश है और हम उसी के अंश हैं।
  2. पंचतत्त्वों का अर्पण: आरती की थाली में दीपक (अग्नि), जल (पानी), फूल (पृथ्वी), धूप (वायु) और घंटे की ध्वनि (आकाश) – ये पंचतत्त्व ईश्वर को अर्पित किए जाते हैं। यह दर्शाता है कि हम अपनी पूरी सृष्टि और स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित करते हैं।
  3. ईश्वर के प्रति कृतज्ञता: आरती ईश्वर द्वारा प्रदान किए गए जीवन, सुख और समृद्धि के लिए आभार व्यक्त करने का एक तरीका है। यह हमें विनम्रता सिखाती है और यह महसूस कराती है कि हम सब ईश्वर की कृपा से ही जीवित हैं।
  4. नकारात्मकता का नाश: आरती की लौ और सुगंधित धुआं वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जाओं को नष्ट कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे मन और आत्मा में शांति आती है।
  5. ध्यान और एकाग्रता: आरती करते समय या उसे देखते समय मन स्वतः ही एकाग्र हो जाता है। प्रकाश की लौ पर ध्यान केंद्रित करने से मन की चंचलता कम होती है और आध्यात्मिक अनुभव गहरा होता है।

आरती का वैज्ञानिक महत्व

  1. वातावरण की शुद्धि: आरती में जलाए जाने वाले कपूर, घी के दीपक और धूप से निकलने वाला धुआं वायुमंडल में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है। कपूर में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो हवा को शुद्ध करने में सहायक होते हैं।
  2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार: आरती के दौरान बजने वाले घंटे-घड़ियाल और शंख की ध्वनि से एक विशेष प्रकार की कंपन (वाइब्रेशन) उत्पन्न होती है। ये कंपन मस्तिष्क में सकारात्मक तरंगें पैदा करती हैं, जो तनाव को कम कर मन को शांत करती हैं।
  3. मनोवैज्ञानिक प्रभाव: आरती में सभी इंद्रियां (देखना, सुनना, सूंघना, महसूस करना) शामिल होती हैं। यह एक समग्र अनुभव प्रदान करता है जो मन को शांत और एकाग्र करता है। प्रकाश, ध्वनि और सुगंध का संयोजन एक शांतिपूर्ण और ध्यानपूर्ण वातावरण बनाता है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है।
  4. प्राकृतिक कीटाणुनाशक: घी के दीपक से निकलने वाला धुंआ भी सूक्ष्म जीवों को नष्ट करने में सहायक माना जाता है। यह एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक के रूप में कार्य करता है।

आरती करने की सही विधि

आरती हमेशा श्रद्धा और भक्ति भाव से करनी चाहिए। दीपक या कपूर को भगवान की प्रतिमा के चरणों से शुरू करके नाभि, हृदय और फिर मुख तक घुमाया जाता है, और फिर पूरे शरीर पर। यह प्रक्रिया कम से कम सात बार या अधिक बार भी की जा सकती है, हमेशा घड़ी की दिशा (clockwise) में। आरती के बाद हाथों को लौ के ऊपर घुमाकर आंखों पर लगाया जाता है, जिसे ‘आरती लेना’ कहते हैं। यह लौ की सकारात्मक ऊर्जा को आत्मसात करने का प्रतीक है।

निष्कर्ष

आरती केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि स्वयं को ईश्वर से जोड़ने का एक शक्तिशाली माध्यम है। यह हमारे भीतर के अंधकार को दूर कर ज्ञान और प्रेम के प्रकाश से भर देती है। चाहे आप इसके आध्यात्मिक महत्व को समझें या वैज्ञानिक लाभों को, आरती एक ऐसा अनुष्ठान है जो हमें शांति, सकारात्मकता और परमात्मा से जुड़ाव का अनुभव कराता है। तो अगली बार जब आप आरती करें, तो इसके प्रत्येक पहलू को महसूस करें और ईश्वर की महिमा में लीन हो जाएं।

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