आरती: एक दिव्य प्रकाश, भक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम

आरती: एक दिव्य प्रकाश, भक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम

## आरती: एक दिव्य प्रकाश, भक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम

हमारे आध्यात्मिक जीवन में ‘आरती’ का एक विशेष स्थान है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति हमारी अगाध श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता की एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। जब हम किसी मंदिर में प्रवेश करते हैं या अपने घर के पूजा-स्थल पर बैठते हैं, तो आरती की मधुर ध्वनि और जगमगाते दीयों का प्रकाश मन को एक अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। आइए, इस दिव्य क्रिया के आध्यात्मिक महत्व और इसके हर पहलू को गहराई से समझते हैं।

### आरती क्या है और इसका इतिहास क्या है?

‘आरती’ शब्द संस्कृत के ‘आरात्रिक’ शब्द से आया है, जिसका अर्थ है ‘रात को दूर करने वाला’ या ‘प्रकाश से युक्त’। यह भगवान के सामने दीपक, धूप, कपूर आदि जलाकर उनके चारों ओर घुमाने की एक विधि है। माना जाता है कि आरती की परंपरा वैदिक काल जितनी पुरानी है, जहां अग्नि की पूजा और स्तुति की जाती थी। धीरे-धीरे, यह देवताओं के सम्मान और उनकी उपस्थिति को महसूस करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गई।

### आरती का आध्यात्मिक महत्व

आरती केवल बाहरी प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह आंतरिक शुद्धि और एकाग्रता का मार्ग है। इसके प्रत्येक तत्व का गहरा प्रतीकात्मक अर्थ है:

1. **दीपक का प्रकाश (अग्नि):** दीपक अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान और चेतना के प्रकाश का प्रतीक है। यह हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर ही परम प्रकाश हैं जो हमारे जीवन को प्रकाशित करते हैं। अग्नि पंचभूतों में से एक है और देवताओं तक हमारी प्रार्थना पहुंचाने का माध्यम मानी जाती है।
2. **कपूर (आत्म-त्याग):** कपूर स्वयं जलकर सुगंध फैलाता है और कोई अवशेष नहीं छोड़ता। यह आत्म-त्याग और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक है, जो हमें अहंकार को मिटाकर स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने की प्रेरणा देता है।
3. **घंटी और शंख की ध्वनि:** घंटी की ध्वनि मन को शांत करती है और पूजा के वातावरण को शुद्ध करती है। शंख ध्वनि सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और बुरी शक्तियों को दूर भगाती है। ये ध्वनियाँ हमें बाहरी दुनिया से कटकर ईश्वर में लीन होने में मदद करती हैं।
4. **धूप (पवित्रता और सुगंध):** धूप की सुगंध वातावरण को शुद्ध करती है और मन को एकाग्र करती है। यह हमारी प्रार्थनाओं और शुभ विचारों को ईश्वर तक पहुंचाने का प्रतीक है।
5. **आरती की थाली (समर्पण):** आरती की थाली में सजाए गए सभी तत्व (दीपक, फूल, कुमकुम, चावल) हमारे द्वारा ईश्वर को अर्पित किए जाने वाले समर्पण और कृतज्ञता का प्रतीक हैं।

### आरती कैसे करें: विधि और भाव

आरती करते समय केवल विधि का पालन करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसमें श्रद्धा और प्रेम का भाव होना अत्यंत आवश्यक है।

* **शारीरिक क्रिया:** आरती को घड़ी की सुई की दिशा में (clockwise) घुमाया जाता है, जो जीवन के चक्र और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह का प्रतीक है। इसे तीन से सात बार घुमाना शुभ माना जाता है।
* **मानसिक एकाग्रता:** आरती करते समय हमारा मन पूरी तरह से ईश्वर में लीन होना चाहिए। उनकी स्तुति करते हुए, उनके गुणों का स्मरण करते हुए, हम अपने भीतर एक दिव्य ऊर्जा का संचार महसूस करते हैं।
* **सामूहिक भागीदारी:** अक्सर आरती सामूहिक रूप से की जाती है। इससे भक्तों के बीच एकता और सकारात्मकता का भाव बढ़ता है।

### निष्कर्ष

आरती केवल पूजा का एक समापन नहीं, बल्कि ईश्वर के साथ हमारे संबंध को मजबूत करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। यह हमें सिखाती है कि कैसे हम अपने जीवन में प्रकाश, त्याग और समर्पण के भाव को अपनाकर आंतरिक शांति और आनंद प्राप्त कर सकते हैं। अगली बार जब आप आरती करें, तो केवल विधि का पालन न करें, बल्कि इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को आत्मसात करें और उस दिव्य प्रकाश को अपने हृदय में महसूस करें। यह आपको परमात्मा के और करीब ले जाएगा और आपके जीवन को भक्ति के अनुपम आनंद से भर देगा।

**भक्तिभाव से की गई एक आरती आपके पूरे दिन को सकारात्मक ऊर्जा से भर सकती है!**

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