# अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं: नाम जप की महिमा और जन्माष्टमी पर कृष्ण कृपा का अनुपम मार्ग
सनातन धर्म में भगवान के नाम जप को कलियुग में भवसागर पार करने का सबसे सुगम और शक्तिशाली साधन माना गया है। भगवान श्री कृष्ण के अनगिनत नाम हैं, और इनमें से प्रत्येक नाम अपनी विशिष्ट लीला और गुणों को धारण किए हुए है। ‘अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं’ श्लोक या भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भगवान के दिव्य स्वरूप का एक संक्षिप्त, किंतु अत्यंत प्रभावशाली आह्वान है। यह उन भक्तों के हृदय में विशेष स्थान रखता है जो भगवान कृष्ण की मधुर लीलाओं और उनके परम कृपालु स्वरूप में लीन रहना चाहते हैं। विशेषकर जन्माष्टमी के पावन अवसर पर, जब संपूर्ण ब्रह्मांड भगवान कृष्ण के प्राकट्य का उत्सव मनाता है, इस दिव्य नाम का स्मरण हमें उनके और भी निकट ले आता है। आइए, इस मंत्र के गहरे अर्थ, इसके जप से होने वाले लाभ और भगवान कृष्ण की अनंत कृपा प्राप्त करने के मार्ग को समझें।
## कृष्ण कथा: नाम जप की अलौकिक शक्ति और भगवान की भक्त वत्सलता
द्वापर युग की एक मार्मिक कृष्ण कथा है, जो हमें नाम जप की अतुलनीय शक्ति का बोध कराती है। मथुरा में एक ऐसा समय था जब कंस के अत्याचारों से प्रजा त्राहि-त्राहि कर रही थी। देवकी और वसुदेव कारागार में थे, और उनके पुत्रों को जन्म लेते ही कंस निर्ममता से मार डालता था। ऐसे ही भयावह और निराशाजनक क्षणों में, माता देवकी और वसुदेव के हृदय में भगवान विष्णु के प्रति अटूट विश्वास ही उनका एकमात्र सहारा था। वे निरंतर भगवान के विभिन्न नामों का स्मरण करते, उनकी स्तुति करते, और अपने मन में ‘अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं’ जैसे मधुर नामों का ध्यान करते रहते। वे जानते थे कि केवल अच्युत (जो कभी च्युत न हो, अविनाशी) ही उनकी रक्षा कर सकते हैं। वे केशवं (जो केशी दैत्य का वध करने वाले हों, जो सुंदर केशों वाले हों) का स्मरण करते, यह जानते हुए कि वे ही समस्त बुराइयों का नाश कर सकते हैं।
जब भगवान श्री कृष्ण ने देवकी के गर्भ में प्रवेश किया, तो कारागार का वातावरण भी दिव्य प्रकाश से भर उठा। माता देवकी और वसुदेव ने भगवान के चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन किए, उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित थे। यह वह क्षण था जब उनके सभी कष्टों का अंत निश्चित हो गया था। भगवान ने उन्हें आश्वस्त किया और बालक रूप धारण कर गोकुल में जाने का निर्देश दिया। इस प्रकार, उनके नाम जप और अटूट विश्वास ने भगवान को उनके समक्ष प्रकट होने के लिए विवश कर दिया।
परंतु इस कथा का एक और पहलू है, जो नाम जप और भक्त वत्सलता की शक्ति को और भी उजागर करता है। गोकुल में बाल कृष्ण की लीलाएं प्रारंभ हुईं। एक बार माता यशोदा ने देखा कि बाल गोपाल ने मिट्टी खा ली है। वे क्रोधित होकर उन्हें डांटने लगीं और दंडस्वरूप उन्हें एक ऊखल से बांधने का प्रयास किया। किंतु यह क्या! जैसे ही वे रस्सी बांधतीं, रस्सी छोटी पड़ जाती। कितने भी प्रयास कर लें, रस्सी हमेशा कम ही पड़ती। अंततः, भगवान कृष्ण ने माता की ममता और प्रेम के वशीभूत होकर स्वयं को बंधने दिया। इस लीला के कारण ही भगवान का एक नाम ‘दामोदरं’ पड़ा, जिसका अर्थ है ‘जिसके उदर (पेट) पर रस्सी (दाम) बंधी हो’।
इस लीला से यह स्पष्ट होता है कि भगवान, जो अच्युत हैं, जो केशवं हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी हैं, वे प्रेम और भक्ति के बंधनों में सहज ही बंध जाते हैं। जब माता यशोदा दामोदरं नाम से पुकारती थीं, तो उस नाम में उनकी ममता, वात्सल्य और संपूर्ण प्रेम समाहित होता था। यही प्रेम और भक्ति भगवान को अपने भक्तों के निकट लाता है। यह ‘दामोदरं’ नाम हमें याद दिलाता है कि भगवान कितने सुलभ हैं, कितने मृदु स्वभाव के हैं, और प्रेम के वशीभूत होकर वे किसी भी भक्त के हृदय में विराजमान हो जाते हैं।
यह कथा हमें सिखाती है कि चाहे देवकी-वसुदेव की भांति भय और संकट में हों, या माता यशोदा की भांति वात्सल्य में लीन हों, भगवान के नाम का स्मरण हर परिस्थिति में कल्याणकारी है। यह केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और शरणागति की पराकाष्ठा है। यह हमें भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से लेकर उनके पालक और रक्षक स्वरूप तक के दर्शन कराता है। ‘कृष्ण कथा’ का यह अंश दर्शाता है कि नाम में कितनी शक्ति है, जो सबसे बड़े दुखों का निवारण कर सकती है और असीम आनंद प्रदान कर सकती है।
## अच्युतम केशवं श्लोक का आध्यात्मिक अर्थ और devotional significance
‘अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं’ श्लोक भगवान कृष्ण के अनेक दिव्य नामों का एक मधुर संकलन है, जो उनके विभिन्न गुणों और लीलाओं का स्मरण कराता है। इस श्लोक का प्रत्येक शब्द अपने आप में एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ समेटे हुए है:
* **अच्युतम (Achyutam):** अच्युत का अर्थ है ‘जो कभी च्युत न हो’, ‘अविनाशी’, ‘स्थिर’। भगवान कृष्ण स्वयं कहते हैं, “मैं कभी भी अपने भक्तों का साथ नहीं छोड़ता, चाहे वे कितनी भी विपरीत परिस्थितियों में क्यों न हों।” अच्युतम नाम हमें भगवान की अविनाशी प्रकृति, उनकी स्थिरता और अपने भक्तों के प्रति उनके अटूट प्रेम का स्मरण कराता है। यह विश्वास दिलाता है कि वे सदैव हमारे साथ हैं, हमारी रक्षा कर रहे हैं।
* **केशवं (Keshavam):** केशवं नाम के दो मुख्य अर्थ हैं। पहला, ‘केशी’ नामक राक्षस का वध करने वाले। भगवान ने केशी दैत्य का वध करके भक्तों को भयमुक्त किया था। दूसरा अर्थ है ‘सुंदर केशों वाले’ या ‘जिसके केश बहुत सुंदर हों’। यह नाम भगवान के दिव्य सौंदर्य और उनकी शक्ति का प्रतीक है, जो सभी बाधाओं और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करती है।
* **कृष्ण (Krishna):** कृष्ण नाम ‘कृष्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है ‘आकर्षण करना’। भगवान कृष्ण ऐसे हैं जो सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं – अपने सौंदर्य से, अपनी लीलाओं से, अपने प्रेम से, और अपने ज्ञान से। वे ‘अखिल-जगत्-मोहनाय’ हैं। कृष्ण नाम ही पूर्ण ब्रह्म का प्रतीक है, जो आनंदमय है, चैतन्यमय है, और प्रेममय है।
* **दामोदरं (Damodaram):** यह नाम भगवान की बाल लीला का स्मरण कराता है, जब माता यशोदा ने उन्हें ऊखल से बांध दिया था। ‘दाम’ का अर्थ है रस्सी और ‘उदर’ का अर्थ है पेट। दामोदरं का अर्थ है ‘जिसके उदर पर रस्सी बंधी हो’। यह नाम भगवान की सरलता, उनकी भक्त वत्सलता और उनके वात्सल्य प्रेम में बंध जाने की लीला को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि भगवान कितने सुलभ हैं, जो प्रेम के धागे से सहज ही बंध जाते हैं।
* **राम नारायणं जानकी वल्लभम् (Ram Narayan Janaki Vallabham):** श्लोक का यह विस्तार भगवान की सर्वव्यापकता को दर्शाता है। यह बताता है कि कृष्ण ही राम हैं, राम ही नारायण हैं। जानकी वल्लभम् (सीता पति) राम के अवतार को इंगित करता है। यह हमें यह संदेश देता है कि सभी देवी-देवता एक ही परम सत्ता के विभिन्न स्वरूप हैं। कृष्ण ही राम हैं, राम ही विष्णु हैं। यह नाम जप की शक्ति को एक व्यापक दृष्टिकोण देता है, जो हमें सभी अवतारों के प्रति आदर और भक्ति सिखाता है।
### लाभ और कृष्ण कृपा मंत्र
इस श्लोक का निरंतर जप करने से अनगिनत लाभ प्राप्त होते हैं:
1. **पापों का नाश:** यह श्लोक अनजाने में किए गए सभी पापों का नाश करता है और आत्मा को शुद्ध करता है।
2. **मानसिक शांति:** भगवान के मधुर नामों का उच्चारण मन को शांत करता है, तनाव और चिंताएं दूर करता है।
3. **भक्ति की वृद्धि:** यह भक्त के हृदय में भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा को बढ़ाता है।
4. **सुरक्षा:** ‘अच्युतम’ नाम का स्मरण हमें सभी प्रकार के भय और संकटों से बचाता है। भगवान स्वयं अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
5. **मोक्ष प्राप्ति:** निरंतर नाम जप से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर भगवान के परम धाम को प्राप्त होता है। यह कलियुग में मोक्ष प्राप्त करने का सबसे सरल और सीधा मार्ग है।
6. **कृष्ण कृपा:** इस मंत्र का शुद्ध भाव से जप करने पर भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह स्वयं एक ‘कृष्ण कृपा मंत्र’ है जो भक्तों को उनके सबसे प्रिय बनाता है।
## जन्माष्टमी पर अच्युतम केशवं जप के rituals और परंपराएं
जन्माष्टमी का पावन पर्व भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का सबसे बड़ा उत्सव है। इस दिन ‘अच्युतम केशवं’ श्लोक का जप और भी अधिक फलदायी हो जाता है। यहां कुछ परंपराएं और अनुष्ठान दिए गए हैं जिनमें आप इस दिव्य नाम को शामिल कर सकते हैं:
* **नियमित नाम जप:** प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तुलसी माला या रुद्राक्ष माला से ‘अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं’ का कम से कम 108 बार जप करें। यह आपके दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और भगवान के आशीर्वाद से करेगा।
* **जन्माष्टमी पूजा विधि:** जन्माष्टमी की रात बाल गोपाल की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें स्नान कराएं, सुंदर वस्त्र पहनाएं, चंदन लगाएं और फूलों से सजाएं। पूजा के दौरान धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करते समय इस श्लोक का निरंतर उच्चारण करें। यह आपकी ‘पूजा विधि’ को और भी प्रभावशाली बनाएगा।
* **अखंड कीर्तन:** जन्माष्टमी की रात या पूरे दिन ‘अच्युतम केशवं’ और अन्य कृष्ण भजनों का अखंड कीर्तन करें। परिवार और मित्रों के साथ मिलकर इस दिव्य नाम का संकीर्तन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह वातावरण को शुद्ध करता है और सभी के हृदय में भक्ति भाव जगाता है।
* **आरती में शामिल करें:** भगवान की आरती करते समय इस श्लोक की पंक्तियों को शामिल करें या आरती के बाद इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करें। जन्माष्टमी की विशेष ‘जन्माष्टमी आरती’ में यह श्लोक बहुत मधुर लगता है और इसका प्रभाव कई गुणा बढ़ जाता है।
* **श्रवण और मनन:** इस श्लोक को केवल जपना ही नहीं, बल्कि इसके अर्थ और भगवान की लीलाओं का श्रवण और मनन भी करें। यह आपके हृदय में भगवान के प्रति प्रेम को गहरा करेगा और आपको उनकी महिमा से अवगत कराएगा।
* **बच्चों को सिखाएं:** अपने बच्चों को भगवान कृष्ण की कथाएं सुनाएं और उन्हें यह मधुर श्लोक जपना सिखाएं। यह उन्हें बचपन से ही भक्ति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ेगा और उन्हें सही संस्कार देगा।
इन अनुष्ठानों के माध्यम से आप भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति को और भी दृढ़ कर सकते हैं और जन्माष्टमी के पर्व को सच्चे अर्थों में मना सकते हैं।
## निष्कर्ष: अच्युतम केशवं का अमृत और कृष्ण कृपा का मार्ग
‘अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं राम नारायणं जानकी वल्लभम्’ – यह केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि भगवान श्री कृष्ण के प्रति असीम प्रेम, भक्ति और विश्वास की अभिव्यक्ति है। यह हमें स्मरण कराता है कि भगवान अच्युत हैं, वे शक्तिशाली हैं, वे प्रेममय हैं, और वे अपने भक्तों के लिए सुलभ हैं। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर, जब संपूर्ण जगत ‘बाल गोपाल’ के जन्म का उत्सव मनाता है, तब इस दिव्य नाम का स्मरण हमें उस परम आनंद और कृष्ण कृपा से जोड़ता है।
आइए, हम सब अपने दैनिक जीवन में इस मधुर नाम को अपनाएं, इसे अपनी श्वास में उतारें और भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा को अक्षुण्ण रखें। चाहे सुख हो या दुःख, भय हो या आनंद, भगवान के नाम का निरंतर जप हमें हर परिस्थिति में सहारा देता है और अंततः मोक्ष के परम लक्ष्य तक पहुंचाता है। यह नाम जप ही कलियुग में सबसे बड़ा तप, सबसे बड़ा यज्ञ और सबसे बड़ी साधना है। भगवान श्री कृष्ण की असीम कृपा हम सब पर सदैव बनी रहे, यही मंगल कामना है। “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।”

